करछना-मिर्जापुर रेलखंड पर शुरू हुई नई प्रणाली
भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपने स्वदेशी Kavach 4.0 सिस्टम का विस्तार किया है। उत्तर मध्य रेलवे ने दिल्ली-हावड़ा रेल कॉरिडोर के करछना-मिर्जापुर के बीच 69.5 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर इस प्रणाली को चालू कर दिया है।
इस नए विस्तार के बाद उत्तर मध्य रेलवे में कवच प्रणाली का कुल परिचालित नेटवर्क बढ़कर 785 रूट किलोमीटर हो गया है। यह विस्तार खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली-हावड़ा मार्ग देश के प्रमुख और व्यस्त रेल कॉरिडोर में शामिल है।
आखिर क्या है Kavach 4.0?
कवच भारतीय रेलवे की स्वदेशी रूप से विकसित Automatic Train Protection (ATP) प्रणाली है। इसका उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय चूक से होने वाले जोखिम को कम करना है।
यदि लोको पायलट किसी खतरे के संकेत या निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं कर पाता, तो सिस्टम स्थिति के अनुसार चेतावनी देने के साथ स्वतः ब्रेक लगाने में सक्षम होता है। खराब मौसम और कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी यह ट्रेन संचालन को सुरक्षित बनाने में सहायता करता है।
Kavach 4.0 में क्या हैं खास सुधार?
कवच के नए संस्करण 4.0 में पहले की तुलना में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं:
- बेहतर लोकेशन एक्यूरेसी: ट्रेन की स्थिति की अधिक सटीक जानकारी।
- सिग्नल की बेहतर जानकारी: बड़े रेलवे यार्ड में सिग्नल संबंधी सूचनाओं का बेहतर संचार।
- स्टेशन-टू-स्टेशन कनेक्टिविटी: ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए स्टेशनों के बीच बेहतर संचार।
- इंटरलॉकिंग सिस्टम से जुड़ाव: मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग व्यवस्था के साथ सीधा इंटरफेस।
इन सुधारों का मकसद ट्रेन संचालन के दौरान सूचना और सुरक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाना है।
दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में कैसे मिलेगी मदद?
रेलवे नेटवर्क पर कई बार सिग्नल की अनदेखी, निर्धारित गति से अधिक रफ्तार या मानवीय चूक गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। कवच ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा की अतिरिक्त परत उपलब्ध कराता है।
उदाहरण के लिए, यदि ट्रेन निर्धारित गति से अधिक चल रही हो या लोको पायलट खतरे के सिग्नल पर आवश्यक कार्रवाई न करे, तो सिस्टम चेतावनी और स्वचालित ब्रेकिंग के जरिए दुर्घटना की आशंका कम करने में मदद कर सकता है।
हालांकि, कवच को सभी तरह की रेल दुर्घटनाओं को रोकने की गारंटी नहीं समझना चाहिए। ट्रैक की स्थिति, रखरखाव, सिग्नलिंग और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर आगे भी जारी रहेगा विस्तार
दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख रेलखंड आते हैं। इस मार्ग पर कवच का विस्तार होने से प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रेनों को भी सुरक्षा की अतिरिक्त तकनीकी सहायता मिलेगी।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है: 785 रूट किलोमीटर उत्तर मध्य रेलवे में कवच का कुल परिचालित नेटवर्क है, न कि पूरे दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग की लंबाई। करछना-मिर्जापुर का 69.5 किलोमीटर वाला खंड इसी नेटवर्क में नया जुड़ा है।
आगे क्या है रेलवे की तैयारी?
रेलवे देश के प्रमुख और व्यस्त रेलमार्गों पर कवच प्रणाली का विस्तार कर रहा है। इसके लिए ट्रैकसाइड उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, स्टेशन डेटा सेंटर और इंजनों में संबंधित उपकरण लगाए जा रहे हैं। लक्ष्य है कि तकनीक के जरिए ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जाए।