नई दिल्ली। अरब सागर में समुद्री लुटेरों के खिलाफ भारतीय नौसेना और वायुसेना ने मिलकर एक बड़ा अभियान चलाया। सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने मछली पकड़ने वाले ईरानी जहाज ‘अजिनी’ (Azini) को अगवा कर लिया था। इस जहाज पर सवार सभी 20 चालक दल के सदस्यों को भारतीय नौसेना ने 48 घंटे तक चले अभियान के बाद सुरक्षित बचा लिया।
इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान ने अहम भूमिका निभाई। विमान के जरिए नौसेना के विशेष मरीन कमांडो MARCOS को सटीक एयरड्रॉप के माध्यम से समुद्र में तैनात किया गया। इसके बाद कमांडो ने जहाज को सुरक्षित करने के लिए सामरिक कार्रवाई की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अभियान की सफलता पर नौसेना और वायुसेना की सराहना की।
29 अक्टूबर को समुद्री लुटेरों ने किया था जहाज पर कब्जा
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज अजिनी को 29 अक्टूबर 2026 को सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने अगवा कर लिया था। यह इलाका बंदर बायला और हाफुन के तटीय क्षेत्रों के बीच बताया गया है।
जहाज पर समुद्री लुटेरों का कब्जा भारत के लिए समुद्री सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन सकता था। आशंका थी कि लुटेरे इस जहाज को मदर शिप के रूप में इस्तेमाल कर आसपास से गुजरने वाले दूसरे व्यापारिक जहाजों पर हमले कर सकते हैं।
3,000 किलोमीटर दूर तक पहुंची भारतीय नौसेना
जहाज के अपहरण की जानकारी मिलने के बाद भारतीय नौसेना ने एक मिशन पर तैनात युद्धपोत को कार्रवाई के लिए भेजा। अभियान में समुद्री निगरानी विमान और अन्य तकनीकी संसाधनों की भी मदद ली गई।
नौसेना के निगरानी तंत्र ने लगातार जहाज की गतिविधियों पर नजर रखी, उसकी लोकेशन का पता लगाया और उसे भागने से रोकने के लिए नियंत्रित गैर-घातक उपाय अपनाए। यह पूरा अभियान मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर संचालित किया गया।
C-17 विमान से समुद्र में उतारे गए MARCOS कमांडो
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर-III विमान की भूमिका रही। इस भारी सैन्य परिवहन विमान से नौसेना के विशेष बल MARCOS (Marine Commandos) को सटीक एयरड्रॉप के जरिए ऑपरेशन क्षेत्र में पहुंचाया गया।
समुद्र में उतरने के बाद कमांडो ने जहाज को अपने नियंत्रण में लेने के लिए कार्रवाई की। नौसेना के युद्धपोत, समुद्री निगरानी विमान और Sea Guardian ड्रोन ने भी जहाज की स्थिति पर नजर रखने और अभियान को सफल बनाने में मदद की।
बिना किसी नुकसान के बचाए गए सभी 20 नाविक
भारतीय नौसेना ने जहाज को सुरक्षित करने के बाद उसमें सवार सभी 20 चालक दल के सदस्यों को मुक्त करा लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में किसी भी नाविक की मौत नहीं हुई और न ही कोई घायल हुआ।
नौसेना ने बताया कि लगातार निगरानी, जहाज की गतिविधियों को नियंत्रित करने और कमांडो की सामरिक कार्रवाई के तालमेल से ऑपरेशन पूरा किया गया। 2 नवंबर 2026 को अभियान सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की सराहना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना को सफल अभियान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर हथियारबंद समुद्री लुटेरों के कब्जे से जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित निकालना भारतीय नौसेना की उच्च परिचालन क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने इस अभियान में भारतीय वायुसेना के समय पर मिले सहयोग की भी सराहना की। रक्षा मंत्री के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा बलों ने एक बार फिर समुद्री रास्तों की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दिखाई है।
हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता का प्रदर्शन
यह अभियान केवल 20 नाविकों को बचाने तक सीमित नहीं था। समुद्री लुटेरों द्वारा किसी जहाज को अपने कब्जे में लेकर दूसरे व्यापारिक जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
भारत के लिए अरब सागर और हिंद महासागर के समुद्री रास्ते व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में नौसेना और वायुसेना के बीच इस तरह का संयुक्त अभियान भारत की दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में कार्रवाई करने की क्षमता को भी दर्शाता है।
इस सफल ऑपरेशन के बाद सभी 20 नाविक सुरक्षित हैं और जहाज को लुटेरों के कब्जे से मुक्त करा लिया गया है।