लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गृह मंत्रालय, लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के बीच हुई बातचीत को निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधानसभा सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों में भारी खाई है।
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोगों को उम्मीद थी कि केंद्र उनसे किए गए वादों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाएगा। लेकिन बातचीत में उन्हें विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ा।
2019 के वादों से मुकरना
2019 में जब लद्दाख को यूनियन टेरिटरी का दर्जा दिया गया था, तो सरकार ने लोकतांत्रिक ढाँचे को मजबूत करने और छठी अनुसूची सुरक्षा देने का आश्वासन दिया था। इन आश्वासनों के आधार पर लद्दाख में दो चुनाव हुए।
वांगचुक का आरोप है कि सरकार ने अब इन वादों से पीछे हटा लिया है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 371 के तहत सुरक्षा के संबंध में भी सरकार मुकर गई।
विधानसभा की जरूरत पर जोर
वांगचुक ने कहा कि बिना चुनी हुई विधानसभा के आर्टिकल 371 के तहत दी गई कोई भी सुविधा लोगों तक नहीं पहुँचेगी। केंद्र लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने की जगह आर्टिकल 371 की सुरक्षा देना चाहता है।
अगली बैठक की तैयारी
केंद्र ने 17 अक्टूबर तक संशोधित ड्राफ्ट सौंपने का वादा किया है। इसके बाद 22 अक्टूबर को दिल्ली में अगली बैठक होगी। वांगचुक की आलोचना के बाद अब सभी की नजर इस अगली मीटिंग पर है।