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SSC GD परीक्षा हैकिंग: 'डेविल' दिल्ली से गिरफ्तार

एसटीएफ ने शाहबाद डेयरी से अरुण कुमार को पकड़ा, अब तक मामले में 12 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस द्वारा बरामद रैस्पबेरी पाई और टीएफटी स्क्रीन जैसे हैकिंग उपकरण

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एसएससी जीडी कांस्टेबल ऑनलाइन परीक्षा में हेराफेरी के मुख्य आरोपियों में शामिल 'डेविल' उर्फ अरुण कुमार को बुधवार को दिल्ली से गिरफ्तार किया। आरोपी को दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके से पकड़ा गया, जो गौतम बुद्ध नगर के नॉलेज पार्क थाने में दर्ज परीक्षा फर्जीवाड़े के मामले में वांछित था।

कैसे होती थी हैकिंग

एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्रा के अनुसार जांच में सामने आया कि हैकरों ने परीक्षा सर्वर से छेड़छाड़ कर उम्मीदवारों के कंप्यूटर को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ दिया था। इससे परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे लोग रिमोट से सिस्टम को अपने कब्जे में लेकर उम्मीदवारों की मदद कर सकते थे।

एसटीएफ के मुताबिक हैकर अमित राणा और 'डेविल' नाम से सक्रिय व्यक्ति ने परीक्षा सर्वर की सोर्स फाइलों को डिकोड कर जरूरी बदलाव किए थे। मिश्रा ने बताया, "जांच के दौरान एसटीएफ को जानकारी मिली कि 'डेविल' नाम से सक्रिय व्यक्ति दिल्ली के शाहबाद डेयरी निवासी अरुण कुमार है।" अरुण कुमार तेजा यादव का पुत्र है और मूल रूप से बिहार के पटना जिले के पालीगंज इलाके का रहने वाला है, फिलहाल वह दिल्ली के बेगमपुर थाना क्षेत्र के शाहबाद डेयरी में रहता है।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

यह गिरफ्तारी 22 मई को गौतम बुद्ध नगर एसटीएफ की उस कार्रवाई के बाद हुई है जिसमें ग्रेटर नोएडा के बालाजी डिजिटल जोन से मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान और हैकर अमित राणा समेत सात लोग पकड़े गए थे। उसी केंद्र पर एसएससी जीडी कांस्टेबल परीक्षा आयोजित हो रही थी।

पुलिस के अनुसार गिरोह ने परीक्षा केंद्र में प्रॉक्सी सर्वर लगाकर उम्मीदवारों के कंप्यूटर को रिमोट सॉल्वरों से जोड़ा था। उस कार्रवाई में पुलिस ने 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए थे। अरुण की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक कुल 12 आरोपी पकड़े जा चुके हैं और सभी को जेल भेजा गया है।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से हैकिंग नेटवर्क तक

एसटीएफ के अनुसार अरुण करीब 30 साल का है और उसने बीए की डिग्री हासिल की है। उसने दिल्ली के जहांगीरपुरी स्थित आईटीआई से एक साल का कंप्यूटर फंडामेंटल कोर्स भी किया है।

अरुण ने पूछताछ में बताया कि 2019 में वह दिल्ली के मुखर्जी नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, तभी उसकी मुलाकात बिहार के दरभंगा निवासी मनोज से हुई, जो ऑनलाइन परीक्षाएं कराने के काम में शामिल था। एसटीएफ के मुताबिक मनोज के साथ काम करते हुए अरुण ने कंप्यूटर और हैकिंग की तकनीकें सीखीं और धीरे-धीरे परीक्षा सर्वर हैक करने में माहिर हो गया।

इसके बाद उसने परीक्षा फर्जीवाड़े के लिए मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार करना शुरू किया और हैकिंग नेटवर्क में 'डेविल' के नाम से पहचाना जाने लगा। जांचकर्ताओं के अनुसार उसने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, झारखंड और कई पूर्वोत्तर राज्यों में परीक्षा फर्जीवाड़े में शामिल लोगों से संपर्क बनाए।

2024 के नर्सिंग परीक्षा मामले से जुड़ाव

जांच में अरुण का संबंध सीतापुर में 2024 के ऑनलाइन नर्सिंग स्टाफ ऑफिसर परीक्षा फर्जीवाड़े से भी सामने आया है, जिसकी एफआईआर तालगांव थाने में दर्ज है। एसटीएफ के मुताबिक अरुण ने उस मामले के मुख्य आरोपी उत्कर्ष को पेन ड्राइव में सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया था, जिससे प्रॉक्सी सर्वर लगाकर परीक्षा सिस्टम को रीबूट किया जा सकता था। इस मामले में भी अरुण वांछित था।

एसएससी जीडी परीक्षा में भूमिका

एसटीएफ के अनुसार अरुण ने अप्रैल-मई 2026 में आयोजित एसएससी जीडी कांस्टेबल ऑनलाइन परीक्षा में भी अहम भूमिका निभाई। उसने कुछ जरूरी फाइलों को डिक्रिप्ट कर दूसरे हैकर अमित कुमार को दिया, जिसके बाद दोनों ने मिलकर एक स्क्रिप्ट तैयार की जो परीक्षा क्लाइंट को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ती थी। यह स्क्रिप्ट बाद में एडुक्विटी द्वारा कराई गई एसएससी जीडी परीक्षा में फर्जीवाड़े के लिए इस्तेमाल की गई। एसटीएफ ने बताया कि अरुण के अन्य परीक्षा फर्जीवाड़ा नेटवर्क से जुड़ाव और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान के लिए आगे जांच जारी है।

क्या-क्या बरामद हुआ

गिरफ्तारी के दौरान 12 खुली टीएफटी स्क्रीन, थिंकपैड और एप्पल समेत दो लैपटॉप, एक हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर, आठ वीजीए स्विच, 11 रैस्पबेरी पाई डिवाइस, 14 एचडीएमआई वीडियो-कैप्चर डिवाइस, नौ यूएसबी-टू-टाइप-सी अडैप्टर, 13 एचडीटीवी-वीजीए अडैप्टर, नौ टीपी-लिंक यूएसबी ब्लूटूथ डोंगल, चार वीजीए-टू-एचडीटीवी अडैप्टर, एक एक्सिटल ब्रॉडबैंड डिवाइस और दो सोल्डरिंग मशीनें बरामद हुईं।

अरुण को नॉलेज पार्क थाने में दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट, उत्तर प्रदेश लोक परीक्षा अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत नामजद किया गया है। एसटीएफ के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है।