सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की बेंच ने कहा कि यह संशोधित फॉर्म बिहार विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के मामले में फैसला सुनाते समय मौजूद नहीं था।
प्रिया मिश्रा की याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "नए फॉर्म 6 पर कोई न्यायिक निर्णय नहीं है। बस यही कहा गया है।" याचिकाकार के वकील नरेंद्र मिश्रा ने अदालत को बताया कि मुख्य न्यायाधीश ने पिछले सप्ताह चुनाव आयोग के दावे को खारिज किया था।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। इसमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 के बिहार एसआईआर फैसले में नए फॉर्म 6 को मंजूरी दी है। यह दावा गलत था।
संशोधित फॉर्म 6 के तहत नए मतदाता के रूप में पंजीकरण चाहने वाले आवेदकों को बताना होता है कि क्या वे या उनके माता-पिता पिछले एसआईआर में शामिल थे। अन्य राज्यों में एसआईआर के समय इस्तेमाल किए गए पुराने फॉर्म 6 में ऐसी कोई शर्त नहीं थी।
मुख्य न्यायाधीश कांत ने न्यायालय के बयानों से चुनिंदा शब्दों को निकालकर समाचार के लिए इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "कृपया समाचार के लिए शब्दों का चयन न करें।"