सुप्रीम कोर्ट ने रविवार 11 अक्टूबर को दिल्ली में जारी प्रदर्शन की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की। न्यायमूर्ति जयमल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की खंडपीठ ने एक विशेष सुनवाई में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बेवजह हिरासत पर प्रतिबंध लगाया।
अदालत ने कहा कि कानून की प्रक्रिया के बिना किसी को हिरास्त नहीं किया जा सकता, विशेषकर उन इलाकों में जहाँ प्रतिबंधात्मक आदेश नहीं हैं। शांतिपूर्ण और निरस्त्र लोगों को केवल एकत्र होने के लिए नहीं पकड़ा जा सकता।
मेट्रो और रेल सेवाएँ चलेंगी
न्यायालय ने दिल्ली मेट्रो और रेलवे को सामान्य रूप से संचालित करने का निर्देश दिया। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिबंध के अलावा कोई रुकावट नहीं होगी। अदालत ने सभी बाधाओं की तुरंत समीक्षा करने को कहा, जिसमें यातायात और कानून-व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।
वकीलों की गिरफ्तारी की शिकायत
एक महिला वकील ने अदालत को बताया कि वह और करीब 150 अन्य वकील शांतिपूर्ण रूप से चल रहे थे, जब चार को पकड़कर पुलिस वैन में ले जाया गया। इसके अलावा, मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि रिपोर्टों के अनुसार करीब 7,000 लोग पकड़े गए हैं, लेकिन सरकार ने आधिकारिक आँकड़े नहीं दिए हैं।
रिपोर्टों में दिल्ली भर में 45 हिरासत केंद्रों का जिक्र है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी गई हैं और सभी मेट्रो स्टेशन खुले हैं। शनिवार को 303 मेट्रो स्टेशनों में से केवल 45 के प्रवेश-निकास बंद किए गए थे।
अन्य निर्देश
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायालय परिसरों के चारों ओर लगे प्रतिबंधात्मक सूचनाएँ हटाने का आदेश दिया ताकि न्यायालय तक पहुँचना आसान हो सके। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, रेलवे और दिल्ली पुलिस को मुद्दे पर जवाब देने का नोटिस दिया गया है। 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई रखी गई है, और अधिकारियों को मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी।