सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं के फर्जी बीमा दावों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति प्रसन्न वी वरले की खंडपीठ ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और बीमा कंपनियों को चार हफ़्ते में महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्मों को जोड़ने का निर्देश दिया है।
इस आदेश के तहत ई-डीएआर (ई-विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट), वाहन डेटाबेस (वाहन), ड्राइवर डेटाबेस (सारथी) और बीमा सूचना ब्यूरो को एक साथ काम करना होगा। यह व्यवस्था गाड़ियों के बीमा रिकॉर्ड, पिछले दावों का इतिहास और हिट-एंड-रन मामलों की जानकारी साझा करने में मदद देगी।
एक गाड़ी, कई दुर्घटनाएँ
कोर्ट को इस मामले में एक अजीब चीज़ मिली थी। एक ही गाड़ी कई सड़क दुर्घटनाओं में शामिल बताई जा रही थी और हर बार अलग-अलग बीमा दावे किए जा रहे थे। इससे संगठित तरीके से फर्जी दावे दाखिल करने का संदेह उठा।
राज्यों को संदिग्ध दावों की जाँच का काम
कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि वे फर्जी बीमा दावों की जाँच के लिए खास टीमें (एसआईटी) बनाएँ। बीमा कंपनियों को हर संदिग्ध दावे के बारे में इन टीमों को बताना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि कोई दावा छिपाया जाता है तो बीमा कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन जवाबदेही का सामना कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश पहले ही ऐसी एक टीम बना चुका है। राज्य ने कोर्ट को बताया कि उसे हज़ारों संदिग्ध दावे मिले हैं और सैकड़ों लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
सच्चे ग्राहकों पर असर
कोर्ट ने कहा कि फर्जी दावे केवल बीमा कंपनियों को नुकसान नहीं पहुँचाते। ये पूरे बीमा ढाँचे पर दबाव डालते हैं। आख़िरकार, इससे सच्चे ग्राहकों को ज़्यादा महँगा बीमा भरना पड़ता है।
ई-डीएआर पोर्टल पहले से मौजूद है, लेकिन अब तक सभी राज्यों ने इस पर अपना डेटा अपलोड नहीं किया है। कोर्ट ने सभी राज्यों को बिना देर किए अपनी जानकारी अपलोड करने के लिए कहा है।
कोर्ट ने उन बीमा कंपनियों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किए हैं जो इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहीं। न्यू इंडिया असिरेंस कंपनी लिमिटेड और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (जीआईसी रे) को भी नोटिस दिए गए हैं।
यह मामला 27 नवंबर 2026 को दोबारा सुनवाई के लिए रखा गया है।