वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े विवाद में अब क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी जुड़ गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर एक गंभीर आरोप लगाया है।
उनके पत्र के मुताबिक एक गुट ने विराट कोहली को 5 करोड़ रुपये देकर आश्रम बुलाया था। आरोप है कि इसका मकसद आश्रम की लोकप्रियता और प्रचार बढ़ाना था।
दावे का स्रोत क्या है
फलाहारी महाराज के पत्र में कहा गया है कि राजस्थान की एक निजी कंपनी से जुड़े लोगों ने यह पेशकश की थी। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि इसी कंपनी से जुड़े लोग बाद में साधु बनकर आश्रम में दाखिल हो गए।
पत्र में आश्रम से जुड़ी संपत्ति गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा फलाहारी महाराज ने यह आशंका भी जताई कि केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज की जान को खतरा हो सकता है।
कोहली-अनुष्का की असली मुलाकात कब हुई
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कोई कल्पित घटना नहीं है। दोनों पहली बार 4 जनवरी 2023 को बेटी वामिका के साथ वृंदावन पहुंचे थे।
उस दौरान दोनों ने प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लिया था और इसकी तस्वीरें-वीडियो भी सामने आए थे। इसके बाद भी दंपती कई बार आश्रम पहुंचे, जिसमें जनवरी 2025 की यात्रा भी शामिल है। टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद भी कोहली अपनी पत्नी के साथ प्रेमानंद महाराज से मिलने वृंदावन गए थे।
5 करोड़ रुपये के भुगतान पर अब तक क्या पता चला
जांच में अभी तक इस भुगतान की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न तो कोई बैंक ट्रांजेक्शन सामने आया है, न ही भुगतान रसीद, अनुबंध या कंपनी रिकॉर्ड।
विराट कोहली या उनके किसी प्रतिनिधि की तरफ से भी इस बारे में कोई बयान नहीं आया है। एक स्वतंत्र फैक्ट-चेक में भी इस दावे को फिलहाल अपुष्ट बताया गया है।
इसलिए यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि कोहली को पैसे देकर बुलाया गया था। इसे फलाहारी महाराज का आरोप मानकर ही रिपोर्ट किया जाना उचित है।
सोशल मीडिया पर दावे ने कैसे पकड़ी रफ्तार
प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की मौत के बाद आश्रम को लेकर पहले से ही कई आरोप चल रहे थे। इसी बीच फलाहारी महाराज का पत्र सामने आया, जिसमें कोहली से जुड़ा दावा भी शामिल था।
सोशल मीडिया पर इसे कई जगह ऐसे फैलाया गया मानो भुगतान साबित हो चुका हो। लेकिन उपलब्ध प्रमाण इस दावे का समर्थन नहीं करते।