पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत हुई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुंबई में UAE के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है और इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।
बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति को भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि भारत UAE के साथ मिलकर ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा, जिनका उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के जरिए क्षेत्रीय तनाव को कम करना और शांति का रास्ता तैयार करना है। भारत ने खास तौर पर व्यापार, ऊर्जा और उर्वरकों की मुक्त, सुरक्षित और बिना बाधा आवाजाही को महत्वपूर्ण बताया है।
इस बातचीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में किसी भी लंबे समय तक चलने वाले तनाव से तेल आपूर्ति, समुद्री परिवहन और व्यापारिक मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और जरूरी व्यापारिक एवं ऊर्जा मार्ग सुरक्षित बने रहें।
जयशंकर और शेख अब्दुल्ला के बीच बातचीत केवल क्षेत्रीय संकट तक सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों ने भारत-UAE संबंधों की व्यापक समीक्षा भी की। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। UAE की ओर से भी भारत के साथ रिश्तों को और नजदीकी, मजबूत और विविध बनाने की प्रतिबद्धता जताई गई।
भारत और UAE के आर्थिक रिश्ते भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा हैं। जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। Comprehensive Economic Partnership Agreement यानी CEPA के बाद व्यापारिक संबंधों को नई गति मिली है और दोनों देशों के बीच निवेश भी लगातार बढ़ रहा है।
बैठक में ऊर्जा और रक्षा सहयोग को भी रणनीतिक महत्व दिया गया। भारत और UAE के बीच पहले से ही ऊर्जा, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग चल रहा है, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों में इन क्षेत्रों की अहमियत और बढ़ गई है। भारत के लिए ऊर्जा की नियमित आपूर्ति और सुरक्षित व्यापार मार्ग जरूरी हैं, जबकि UAE के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध खाड़ी क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक पहुंच को भी मजबूत करते हैं।
इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर आपसी समन्वय को लेकर भी विचार साझा किए। UAE दिसंबर में 2026 UN Water Conference की मेजबानी करने वाला है, जिसमें भारत की भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई। इससे साफ है कि भारत-UAE संबंध अब केवल व्यापार और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों तक उनका दायरा बढ़ रहा है।
इस पूरी बातचीत के बीच एक और महत्वपूर्ण पहलू भारत में रहने वाले और UAE में काम करने वाले भारतीय समुदाय से जुड़ा रहा। जयशंकर ने UAE नेतृत्व को वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए धन्यवाद दिया। UAE में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए दोनों देशों के रिश्तों में प्रवासी भारतीयों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
इसी दौरान भारत, अमेरिका और UAE के विदेश मंत्रियों के बीच मुंबई में त्रिपक्षीय बातचीत भी हुई, जिसमें क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा West Asia संकट के बीच भारत केवल द्विपक्षीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रमुख साझेदार देशों के साथ मिलकर ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है।
कुल मिलाकर, जयशंकर और शेख अब्दुल्ला की मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब West Asia की घटनाओं का असर क्षेत्रीय सुरक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ सकता है। भारत ने जहां शांति के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है, वहीं UAE के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा भी साफ की है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता पर सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।