विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने तेज की राजनीतिक गतिविधियां
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपना राजनीतिक और संगठनात्मक अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राएं शुरू की हैं।
यह अभियान 3 से 5 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके जरिए भाजपा विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि पदयात्राओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया जाएगा।
लखनऊ से अभियान की शुरुआत, बड़े नेता हुए शामिल
अभियान के पहले दिन 3 नवंबर को लखनऊ के अवध क्षेत्र में पदयात्रा आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी रही।
लखनऊ में पदयात्रा का कार्यक्रम लोकभवन से परिवर्तन चौक के बीच रखा गया था। पार्टी नेताओं ने इस दौरान कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच पहुंचकर अपने राजनीतिक संदेश को सामने रखा।
छह क्षेत्रों में तीन दिन तक चलेगा अभियान
भाजपा ने पूरे प्रदेश को छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बांटकर पदयात्राओं का कार्यक्रम तय किया है। इसकी समय-सारिणी इस प्रकार है:
तारीख संगठनात्मक क्षेत्र पदयात्रा का शहर
3 नवंबर अवध लखनऊ
3 नवंबर ब्रज बरेली
4 नवंबर काशी प्रयागराज
4 नवंबर गोरखपुर गोरखपुर
4 नवंबर कानपुर-बुंदेलखंड कानपुर
5 नवंबर पश्चिम गाजियाबाद
इस कार्यक्रम के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी के वरिष्ठ नेता पदयात्राओं का नेतृत्व करेंगे। बरेली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, प्रयागराज में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की भूमिका निर्धारित की गई है। गोरखपुर और गाजियाबाद के कार्यक्रमों में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की भागीदारी रखी गई है।
विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को जवाब देने की रणनीति
भाजपा इस अभियान के जरिए विपक्षी दलों पर राजनीतिक हमला भी कर रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रियाओं और अन्य मुद्दों को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का कहना है कि पदयात्राओं के माध्यम से वह अपनी बात सीधे लोगों तक पहुंचाएगी।
यह अभियान ऐसे समय में हो रहा है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बहस चल रही है। भाजपा इसे विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और अपने पक्ष को जनता के सामने रखने के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक संगठनों को जोड़ने की तैयारी
पदयात्राओं में केवल पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की योजना बनाई गई है। इनमें संत-महात्मा, व्यापारी, शिक्षक, अधिवक्ता, चिकित्सक और सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
पार्टी नेतृत्व का जोर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाने पर है। पदयात्राओं के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनसंपर्क गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा हैं।
2027 के चुनाव की तैयारी से जुड़ा अभियान
राजनीतिक दृष्टि से यह पदयात्रा भाजपा के लिए केवल एक जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की सक्रियता दिखाने की कवायद भी है। छह क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और अपने राजनीतिक मुद्दों को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
अब यह देखना अहम होगा कि इस अभियान का स्थानीय स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और विपक्षी दल भाजपा के इस राजनीतिक संदेश का किस तरह जवाब देते हैं।