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कानपुर में मिलावटखोरी का बड़ा खुलासा: 876 नमूनों में 344 जांच में फेल, कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर सवाल

दूध, मिठाई और मसालों की शुद्धता पर चिंता बढ़ी। खाद्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय वर्ष में लिए गए 876 नमूनों में 248 अधोमानक और 66 असुरक्षित पाए गए। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने में तीन से चार महीने लगने से मिलावट करने वालों पर समय रहते कार्रवाई की चुनौती बनी हुई है।

कानपुर में मिलावटखोरी का बड़ा खुलासा: 876 नमूनों में 344 जांच में फेल, कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर सवाल
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

क्या है पूरा मामला?
कानपुर में खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और उसकी गति पर सवाल उठ रहे हैं। 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दूध, खोया, मिठाई, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आई हैं।

खास चिंता इस बात को लेकर है कि विभाग नमूने तो लेता है, लेकिन प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में कई महीने लग जाते हैं। इस दौरान संबंधित खाद्य सामग्री बाजार में बिक चुकी हो सकती है।

876 नमूनों में 344 में मिली गड़बड़ी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक लिए गए 876 नमूनों की जांच में:
- 248 नमूने अधोमानक पाए गए।
- 66 नमूने असुरक्षित श्रेणी में मिले।
- 30 नमूनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया।
इस तरह कुल 344 नमूनों में गुणवत्ता या सुरक्षा से जुड़ी कमियां सामने आईं। इनमें 100 से अधिक नमूने दूध और दुग्ध उत्पादों के बताए गए हैं।

पिछले साल की तुलना में कार्रवाई के आंकड़े
रिपोर्ट में पिछले वित्तीय वर्ष और मौजूदा वर्ष की कार्रवाई का भी तुलनात्मक विवरण दिया गया है।
कार्रवाई पिछले वित्तीय वर्ष मौजूदा वित्तीय वर्ष
निरीक्षण 7,063 3,111
छापेमारी 1,237 588
लिए गए नमूने 1,772 876
अधोमानक नमूने 833 248
असुरक्षित नमूने 80 66
नियम उल्लंघन वाले नमूने 37 30

मौजूदा वित्तीय वर्ष के आंकड़े रिपोर्ट प्रकाशित होने तक के हैं; दोनों अवधियों की अवधि समान होना जरूरी नहीं है।

कार्रवाई में देरी की सबसे बड़ी वजह क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर में लिए गए खाद्य नमूने जांच के लिए लखनऊ, आगरा और झांसी की प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में लगभग तीन से चार महीने लग जाते हैं।

इस देरी के कारण विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। जब तक नमूने की रिपोर्ट आती है, तब तक संबंधित कारोबारी खाद्य सामग्री की बड़ी खेप बेच चुका हो सकता है। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराने, जुर्माना लगाने और वसूली की प्रक्रिया में भी समय लगता है।

दिवाली से पहले हुई कार्रवाई, लेकिन सवाल कायम
मिलावट के खिलाफ अभियान के दौरान 24 से 30 अक्टूबर के बीच खाद्य विभाग ने 27 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान:
- चार प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
- 19 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी हुए।
- 21 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए।
- गंदे कपड़ों में रखा 1.20 क्विंटल खोया नष्ट कराया गया।
- नियमों के उल्लंघन पर पैक पानी की 312 बोतलें सीज की गईं।

यह कार्रवाई दिखाती है कि विभाग ने त्योहारों के दौरान जांच तेज की, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसी तरह की निगरानी सामान्य दिनों में भी लगातार जारी रहती है?

दूध, खोया और मिठाइयों पर विशेष चिंता
त्योहारों के समय दूध, पनीर, घी, खोया और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में इन उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण की जांच बेहद जरूरी है। कानपुर में मौजूदा वित्तीय वर्ष के नमूनों में 100 से अधिक दूध और दुग्ध उत्पादों से जुड़े नमूनों का अधोमानक या असुरक्षित श्रेणी में आना चिंता का विषय है।

खाद्य विभाग का क्या कहना है?
सहायक आयुक्त खाद्य संजय प्रताप सिंह के अनुसार, फेल नमूनों के मामलों में वाद दायर कर जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जाती है। जुर्माना जमा नहीं करने वालों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।