इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की हालत का वीडियो बनाने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) सदस्य गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। भारती छात्र भी हैं और उन पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर रखी है।
जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक मामले पर अंतिम फैसला नहीं आता, भारती को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
16 अगस्त को गौरव भारती फर्रुखाबाद के करनपुर मजरा बसमल स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय परिसर में गए और वहां का वीडियो बनाया। याचिका के मुताबिक उस दिन स्कूल में छुट्टी थी।
वीडियो में एक जर्जर इमारत दिखाई गई थी, जिसमें एक हिस्से पर क्रॉस का निशान लगाकर बताया गया कि वह ढांचा उपयोग में है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वीडियो में स्कूल में जलभराव की स्थिति भी दिखाई गई, जिसकी वजह से बच्चों के बैठने की जगह नहीं बचती और स्कूल में छुट्टी करनी पड़ती है।
भारती ने अदालत में कहा कि उन्होंने यह वीडियो "सद्भावना में" बनाया और सार्वजनिक शिक्षण संस्थान की हालत तथा बच्चों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए साझा किया।
एफआईआर में क्या आरोप
19 अगस्त को फतेहगढ़ जिले के नवाबगंज थाने में भारती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 और 353 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत एफआईआर दर्ज हुई। यह मामला केस क्राइम नंबर 0246/2026 के रूप में दर्ज है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया कि भारती बिना अनुमति स्कूल परिसर में घुसे और संस्थान की स्थिति को गलत तरीके से पेश किया। इसमें यह भी कहा गया कि भारती के साथ मौजूद एक व्यक्ति नशे में था और उसने शिक्षकों से "बेकार की बातें" कीं।
याचिकाकर्ता की दलील
भारती ने कोर्ट में दलील दी कि एफआईआर में न तो कथित बातचीत का ब्योरा दिया गया है, न यह बताया गया कि किसके खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे गए। उनके वकील ने कहा कि एफआईआर में जानबूझकर अपमान, हमला, आपराधिक बल, धमकी या रुकावट जैसे तत्व साबित नहीं होते।
याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत मिला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार, "जनहित से जुड़े मुद्दों" पर विचार रखने के अधिकार को भी शामिल करता है। भारती ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जरूरी तत्वों के बिना एफआईआर जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
आगे क्या
हाईकोर्ट ने पहले 22 सितंबर को राज्य सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद 28 सितंबर को कोर्ट ने भारती को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी। मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब आने के बाद कोर्ट एफआईआर रद्द करने की मांग पर विचार करेगा।