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अमृतसर में गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व की धूम, स्वर्ण मंदिर से निकला भव्य नगर कीर्तन; गतका ने बांधा समां

श्री अकाल तख्त साहिब से निकले नगर कीर्तन में सुनहरी पालकी में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई रही; पंच प्यारों के नेतृत्व में उमड़ी संगत, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

अमृतसर में गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व की धूम, स्वर्ण मंदिर से निकला भव्य नगर कीर्तन; गतका ने बांधा समां
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

पंजाब के अमृतसर में श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। प्रकाश पर्व से पहले 26 अक्टूबर 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब से भव्य नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। शहर की ऐतिहासिक गलियों और प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए नगर कीर्तन ने पूरे अमृतसर को धार्मिक रंग में रंग दिया।

श्री गुरु रामदास जी सिख धर्म के चौथे गुरु और अमृतसर के संस्थापक माने जाते हैं। उनके प्रकाश पर्व पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में देश-विदेश से संगत के पहुंचने की परंपरा रही है। इस वर्ष भी स्वर्ण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।

पंच प्यारों की अगुवाई में निकला नगर कीर्तन

नगर कीर्तन का शुभारंभ श्री अकाल तख्त साहिब से हुआ। पंच प्यारों ने इसकी अगुवाई की, जबकि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को श्रद्धापूर्वक सुनहरी पालकी में विराजमान किया गया।

संगत ने रास्ते भर ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। जगह-जगह श्रद्धालुओं और विभिन्न संगठनों ने नगर कीर्तन का स्वागत किया और फूलों की वर्षा की।

नगर कीर्तन में धार्मिक अनुशासन, सेवा और श्रद्धा का विशेष वातावरण दिखाई दिया। कई स्थानों पर संगत की ओर से लंगर की व्यवस्था भी की गई, जहां श्रद्धालुओं को सेवा भाव के साथ भोजन कराया गया।

गतका प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

नगर कीर्तन का एक प्रमुख आकर्षण सिख युवाओं और गतका दलों का पारंपरिक मार्शल आर्ट ‘गतका’ प्रदर्शन रहा। तलवार, लाठी और पारंपरिक युद्ध-कौशल पर आधारित इस प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने अपनी फुर्ती और कौशल का प्रदर्शन किया।

गतका सिख परंपरा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मार्शल आर्ट शैली है, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अक्सर प्रदर्शित किया जाता है। नगर कीर्तन के दौरान इसके प्रदर्शन ने श्रद्धालुओं और दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

ऐतिहासिक रास्तों से गुजरा नगर कीर्तन

नगर कीर्तन अमृतसर के कई ऐतिहासिक मार्गों और पुराने शहर के प्रमुख द्वारों से होकर गुजरा। इनमें घंटाघर प्लाजा, जलियांवाला बाग, घी मंडी चौक, शेरांवाला गेट, महा सिंह गेट, रामबाग, हाल गेट, हाथी गेट और लोहगढ़ गेट समेत कई प्रमुख स्थान शामिल रहे।

इसके बाद नगर कीर्तन शहर के अन्य ऐतिहासिक मार्गों से होते हुए वापस श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचा। रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

फूलों की वर्षा और सेवा का माहौल

नगर कीर्तन के स्वागत में कई जगहों पर फूलों की वर्षा की गई। संगत ने पंच प्यारों और निशानची सिंहों का सम्मान किया। अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए लंगरों में स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने सेवा की।

घंटाघर प्लाजा के पास पंजाब पुलिस की ओर से भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सम्मान दिया गया। एक हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा ने धार्मिक आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।

तीन दिन चल रहे हैं विशेष धार्मिक आयोजन

श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व को लेकर 25 से 27 अक्टूबर तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें विशेष कीर्तन दरबार, नगर कीर्तन, धार्मिक सभाएं और अन्य कार्यक्रम शामिल हैं।

26 अक्टूबर को नगर कीर्तन के बाद 27 अक्टूबर को मुख्य प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के विशेष स्वरूप की स्थापना, ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन और स्वर्ण मंदिर परिसर में पारंपरिक दीपमाला और आतिशबाजी की भी तैयारी की गई है।

गुरु रामदास जी की शिक्षाओं को याद करने का अवसर

धार्मिक कार्यक्रमों में वक्ताओं ने संगत से गुरु रामदास जी की शिक्षाओं और जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उनके जीवन से जुड़े प्रमुख मूल्यों में सेवा, विनम्रता, भक्ति, मानव कल्याण और भाईचारे को विशेष महत्व दिया जाता है।

SGPC की ओर से भी प्रकाश गुरपुरब पर संगत को शुभकामनाएं दी गईं और गुरु साहिब के बताए रास्ते पर चलने, नाम सिमरन, सेवा और मानवता के कल्याण की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

अमृतसर में भक्तिमय माहौल

नगर कीर्तन के दौरान अमृतसर की सड़कों पर धार्मिक उत्साह साफ दिखाई दिया। गुरबाणी, सतनाम वाहेगुरु के जयकारे, नगाड़ों और नरसिंगों की आवाज के बीच संगत श्रद्धा के साथ आगे बढ़ती रही।

श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि गुरु रामदास जी की शिक्षाओं, सेवा और आध्यात्मिक विरासत को याद करने का अवसर भी रहा। प्रकाश पर्व के मुख्य दिन स्वर्ण मंदिर परिसर में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।