अयोध्या: रामनगरी अयोध्या एक बार फिर लाखों दीयों की रोशनी से जगमगाने की तैयारी में है। 10वें दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए सरयू नदी के किनारे तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस बार 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीप सजाने और प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। घाटों की साफ-सफाई के बाद अब दीपों को व्यवस्थित तरीके से सजाने के लिए मार्किंग का काम शुरू हो चुका है।
56 घाटों पर होगा रोशनी का विशाल आयोजन
इस वर्ष दीपोत्सव का दायरा पहले की तुलना में बढ़ाया गया है। राम की पैड़ी सहित सरयू तट के 56 घाटों को दीप सजाने के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल जैसे प्रमुख क्षेत्र भी शामिल हैं।
अवध विश्वविद्यालय की टीम ने घाटों पर ब्लॉक आधारित मार्किंग शुरू कर दी है। प्रत्येक ब्लॉक में तय संख्या में दीप रखने की योजना बनाई जा रही है, ताकि लाखों दीपों को एक समान और आकर्षक पैटर्न में सजाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार मार्किंग का काम करीब तीन से चार दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है।
30 लाख दीपों के लिए 33 लाख दीये मंगाए गए
आयोजन की तैयारियों में किसी तरह की कमी न रह जाए, इसके लिए लक्ष्य से ज्यादा दीयों की व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के अनुसार 30 लाख दीप जलाने के लक्ष्य के मुकाबले करीब 33 लाख मिट्टी के दीये मंगाए गए हैं। अतिरिक्त दीयों का इस्तेमाल परिवहन, रखरखाव और सजावट के दौरान होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा।
इससे साफ है कि प्रशासन इस बार दीपोत्सव को सिर्फ धार्मिक आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और बड़े पर्यटन आयोजन के रूप में भी पेश करने की तैयारी में है।
35 हजार स्वयंसेवक निभाएंगे अहम भूमिका
इतने बड़े स्तर पर दीप सजाने और उन्हें एक निर्धारित समय पर प्रज्ज्वलित करने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा जा रहा है। करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को घाटवार जिम्मेदारियां देने की तैयारी है।
इनमें अवध विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों तथा इंटर कॉलेजों के विद्यार्थी शामिल होंगे। स्वयंसेवकों का पंजीकरण और प्रशिक्षण किया जा रहा है। उन्हें घाट और ब्लॉक के हिसाब से जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि लाखों दीपों को समय पर व्यवस्थित तरीके से सजाया जा सके।
स्वयंसेवकों को पहचान पत्र भी उपलब्ध कराए जाएंगे। व्यवस्था को तकनीक से जोड़ते हुए उनके पंजीकरण और तैनाती का डेटा तैयार किया जा रहा है।
पिछले साल के रिकॉर्ड से बड़ी होगी इस बार की तैयारी
अयोध्या का दीपोत्सव पिछले कई वर्षों से अपने भव्य दीप प्रज्ज्वलन के कारण देश और दुनिया में चर्चा में रहा है। 2025 में 56 घाटों पर 26,17,215 दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे और इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जोड़ा गया था। अब 2026 में करीब 30 लाख दीपों का लक्ष्य रखा गया है, जिससे एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाने की कोशिश होगी।
हालांकि अंतिम रिकॉर्ड इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कितने दीप एक साथ और तय समय तक जलते हैं।
सिर्फ दीप ही नहीं, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी
10वें दीपोत्सव की तैयारियां केवल घाटों तक सीमित नहीं हैं। प्रमुख मंदिरों और आयोजन स्थलों पर एलईडी लाइटिंग, सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी की जा रही है।
अक्टूबर की शुरुआत में सामने आई तैयारियों के मुताबिक दीपोत्सव के लिए तेल, बाती, कपूर, टी-शर्ट और अन्य सामग्री की व्यवस्था के लिए अलग-अलग टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई थी। राम की पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सजावट के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच तैयार किए जाने की योजना है।
सरकार ने दीपोत्सव को और आकर्षक बनाने के लिए ड्रोन शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भी योजना बनाई है। सितंबर में राज्य सरकार की ओर से करीब 2,100 ड्रोन के शो की तैयारी की जानकारी दी गई थी।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाओं पर जोर
दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने केवल दीप सजाने की चुनौती नहीं है, बल्कि सुरक्षा, ट्रैफिक, सफाई, भीड़ प्रबंधन और घाटों पर सुविधाओं को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन मिलकर स्वयंसेवकों की तैनाती, घाट प्रबंधन और कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। घाटों की मार्किंग के बाद दीपों की सजावट और प्रज्ज्वलन से जुड़ा अगला चरण शुरू किया जाएगा।
अयोध्या फिर बनेगी रोशनी का केंद्र
10वें दीपोत्सव की तैयारियों से साफ है कि इस बार अयोध्या में दीयों की संख्या, घाटों का विस्तार, स्वयंसेवकों की भागीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों—चारों स्तर पर आयोजन को बड़ा बनाने की कोशिश की जा रही है।
जब सरयू तट के 56 घाटों पर लाखों दीप एक साथ रोशन होंगे, तो अयोध्या की राम की पैड़ी और आसपास का पूरा क्षेत्र एक विशाल रोशनी के दृश्य में बदल जाएगा। फिलहाल प्रशासन और विश्वविद्यालय की टीमें तैयारियों को समय पर पूरा करने में जुटी हैं।