भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम सोमवार को घोषित कर दिए। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय, राम प्रताप सिंह चौहान, प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति से मंजूरी मिलने के बाद यह सूची जारी हुई। संगठन महामंत्री बीएल संतोष दिल्ली से नामों की चिट्ठी लेकर लखनऊ पहुंचे, जिसके बाद ही ऐलान संभव हो सका।
सभी नए चेहरों पर दांव
इस बार भाजपा ने राज्यसभा के लिए पूरी तरह नए चेहरों को उतारा है। पार्टी की सूची में मंत्री, पूर्व सांसद, वकील और संगठन से जुड़े नेताओं को जगह मिली है।
धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। राधाकांत ओझा वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। प्रकाश पाल प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष रहे हैं। विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत पूर्व सांसद हैं। गोपी कृष्ण पांडेय वरिष्ठ संगठनकर्ता माने जाते हैं। राम प्रताप सिंह चौहान प्रदेश महामंत्री का पद संभालते रहे हैं।
दो महिलाओं को मौका, कुर्मी समीकरण साधा
पार्टी ने दो महिला उम्मीदवारों प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को मैदान में उतारा है। श्रुति गंगवार बरेली के पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं, जो चार दशकों से इस क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, रुहेलखंड क्षेत्र यानी बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में कुर्मी समुदाय की निर्णायक उपस्थिति है। माना जा रहा है कि इसी समीकरण को ध्यान में रखकर यह चयन किया गया है।
इन दिग्गजों का कटा टिकट
इस सूची की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मौजूदा आठ भाजपा सांसदों में से किसी को दोबारा मौका नहीं मिला। टिकट कटने वालों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी शामिल हैं।
इनके अलावा अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृजलाल और दिनेश को भी उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इनमें से कई नेताओं का मौजूदा कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है।
सपा पहले ही घोषित कर चुकी है दो नाम
उत्तर प्रदेश की दस राज्यसभा सीटों के लिए समाजवादी पार्टी पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। इन सभी सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना है।
इंडियान्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक यह चयन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हुआ है, इसलिए सूची पर राजनीतिक हलकों की गहरी नजर है।