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चक्रवात मुरासु से पहले बड़ा रेस्क्यू अभियान: तटीय इलाकों से हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए

आंध्र प्रदेश में समुद्र के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया। ओडिशा में भी बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया गया। प्रशासन ने भोजन, पेयजल, चिकित्सा और बचाव दलों की व्यवस्था की।

चक्रवात मुरासु से पहले बड़ा रेस्क्यू अभियान: तटीय इलाकों से हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान मुरासु के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा में प्रशासन ने बड़े स्तर पर बचाव एवं राहत अभियान चलाया। समुद्र के किनारे बसे गांवों, निचले इलाकों और कमजोर मकानों में रहने वाले लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई, ताकि तेज हवाओं, भारी बारिश और संभावित बाढ़ से जान-माल का नुकसान कम किया जा सके।

आंध्र प्रदेश में करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
रॉयटर्स की 2 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में शुरुआती चरण में लगभग 2,000 लोगों को संवेदनशील तटीय इलाकों से निकाला गया था। प्रशासन ने करीब 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई थी। नेल्लोर, प्रकाशम और आसपास के तटीय जिलों में अधिकारियों को निचले क्षेत्रों से लोगों को निकालने और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

ओडिशा में भी बड़े पैमाने पर निकासी
चक्रवात का खतरा केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं था। ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जैसे जिलों में भी प्रशासन ने अलर्ट जारी किया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार शाम तक ओडिशा में 1.6 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका था।

राहत शिविरों में जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था
आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रभावित जिलों में राहत और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 116 राहत केंद्र और 1,688 मेडिकल टीमें तैयार की थीं। इसके अलावा आपातकालीन बिस्तर, दवाइयां और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सावधानी के तहत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया।

चक्रवात तट से टकराया, अब नुकसान का आकलन
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चक्रवात मुरासु ने 3 नवंबर की सुबह ओंगोल के पास दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रही और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। तेज हवाओं से पेड़ और बिजली के खंभे उखड़े तथा कई इलाकों में जलभराव हुआ। प्रशासन के सामने अब बिजली, सड़क और अन्य जरूरी सेवाओं को बहाल करने की चुनौती है।