अवैध कॉलोनियों के लिए तीन साल की अतिरिक्त सुरक्षा की तैयारी
देश की राजधानी दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को राहत मिल सकती है। दिल्ली के स्थानीय निकायों ने Delhi Laws (Special Provisions) Act के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को तीन साल और बढ़ाने की सिफारिश की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह कानून उन अनधिकृत निर्माणों को कुछ विशेष परिस्थितियों में सीलिंग और तोड़फोड़ जैसी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देता है, जो जून 2014 से पहले अस्तित्व में आए थे।
मौजूदा प्रावधान के अनुसार यह सुरक्षा 31 दिसंबर 2026 तक लागू है। अब इसे दिसंबर 2029 तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हालांकि, यह विस्तार अभी मंजूर नहीं हुआ है। अंतिम फैसला संसद को लेना है।
2006 में शुरू हुई थी कानूनी सुरक्षा की व्यवस्था
दिल्ली में अनधिकृत निर्माण और कॉलोनियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। फरवरी 2006 में बड़े स्तर पर सीलिंग अभियान शुरू होने के बाद इस समस्या से निपटने के लिए संसद ने Delhi Laws (Special Provisions) Act, 2006 लागू किया था।
शुरुआत में इस कानून के तहत सुरक्षा सीमित अवधि के लिए दी गई थी, लेकिन बाद में इसे कई बार बढ़ाया गया। वर्ष 2023 में हुए संशोधन के बाद यह सुरक्षा 31 दिसंबर 2026 तक कर दी गई थी।
अब एक बार फिर इसे तीन साल बढ़ाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि सुरक्षा आगे नहीं बढ़ाई गई तो बड़ी संख्या में इमारतें सीलिंग और अन्य दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।
1,511 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण की योजना
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्तियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की घोषणा की थी।
इस योजना के तहत मकानों और संपत्तियों को मौजूदा स्थिति के आधार पर नियमित करने की व्यवस्था की गई है। इसे PM-UDAY (प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनियां आवास अधिकार योजना) से जोड़ा गया है।
नई व्यवस्था में स्वीकृत लेआउट प्लान की अनिवार्यता में छूट दी गई है। साथ ही पात्र संपत्तियों के निर्माण और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है।
PM-UDAY के आवेदन की तारीख 31 जनवरी 2027 तक बढ़ी
नियमितीकरण प्रक्रिया में लोगों की कम भागीदारी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने PM-UDAY के तहत आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है।
पहले आवेदन की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 जनवरी 2027 कर दिया गया है। पात्र निवासी इस अवधि में कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप के लिए आवेदन कर सकते हैं।
राजस्व विभाग के नोटिस के अनुसार, निर्धारित अंतिम तारीख के बाद प्राप्त आवेदनों पर ये दस्तावेज जारी नहीं किए जाएंगे।
आवेदन कम, नियमितीकरण की रफ्तार धीमी
योजना को आसान बनाने और शुल्क में राहत देने के बावजूद आवेदन की संख्या कम बनी हुई है।
हिन्दुस्तान टाइम्स की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, नियमितीकरण के लिए केवल 137 आवेदन मिले थे, जिनमें से 22 मंजूर किए गए थे। इसी धीमी प्रगति के कारण आवेदन की समयसीमा बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई।
सरकार ने पहले भी शुल्क कम करने और स्वतंत्र सूचीबद्ध आर्किटेक्ट के माध्यम से आवेदन की सुविधा देने जैसे कदम उठाए हैं।
क्या तीन साल की राहत मिलने से सभी निर्माण वैध हो जाएंगे?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। Delhi Laws (Special Provisions) Act के तहत सुरक्षा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली की सभी अनधिकृत इमारतें अपने आप वैध हो जाएंगी।
यह विशेष कानून के तहत कुछ निर्माणों को दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी सुरक्षा देने का प्रावधान है। वहीं, PM-UDAY के तहत संपत्ति अधिकार और निर्माण नियमितीकरण की प्रक्रिया अलग है। प्रत्येक संपत्ति को संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार जांच से गुजरना होगा।
विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई है कि कमजोर या असुरक्षित इमारतों को बिना पर्याप्त सुरक्षा जांच के नियमित करने से भवन दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब स्थानीय निकायों की सिफारिश और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर केंद्र सरकार आगे की प्रक्रिया तय करेगी। तीन साल के विस्तार को लागू करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी।
दूसरी ओर, PM-UDAY के पात्र लाभार्थियों को 31 जनवरी 2027 तक आवेदन करना होगा। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियमितीकरण की प्रक्रिया कितनी तेज होती है और कानूनी सुरक्षा बढ़ाने के प्रस्ताव पर संसद क्या फैसला लेती है।