देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा है। 2 नवंबर 2026 को कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। कुछ रिपोर्टों में AQI का अधिकतम स्तर 428 दर्ज किया गया, जबकि भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के दिल्ली एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम ने सुबह 10 बजे जहांगीरपुरी में AQI 427 दर्ज किया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 401 से 500 के बीच AQI को गंभीर (Severe) श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर पर हवा का प्रदूषण स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है और पहले से बीमार लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
जहांगीरपुरी और रोहिणी में सबसे खराब स्थिति
दिल्ली के अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा दर्ज किया गया। IITM के 2 नवंबर सुबह 10 बजे के आंकड़ों के अनुसार:
इलाका AQI
जहांगीरपुरी 427
रोहिणी 404
पंजाबी बाग 402
मुंडका 381
अलीपुर 388
विवेक विहार 380
आरके पुरम 375
नरेला 382
ITO 353
आनंद विहार 257
ये अलग-अलग निगरानी केंद्रों की रीडिंग हैं। इन्हें पूरी दिल्ली के औसत AQI के रूप में नहीं समझना चाहिए।
दिल्ली का औसत AQI भी बिगड़ा
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 324 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। यह 4 फरवरी के बाद इस साल का सबसे ऊंचा औसत स्तर बताया गया।
शहर के 58 निगरानी केंद्रों में से 37 बहुत खराब, 17 खराब और तीन गंभीर श्रेणी में रहे। केवल एक केंद्र पर हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण?
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल, सड़कों की धूल और कचरा जलाना शामिल हैं।
दिल्ली के Decision Support System के अनुसार, 2 नवंबर को परिवहन क्षेत्र का प्रदूषण में योगदान करीब 19.2% अनुमानित किया गया। पराली जलाने का योगदान लगभग 8.4% बताया गया। इसके अलावा दिल्ली और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों, आवासीय गतिविधियों तथा अन्य स्रोतों से भी प्रदूषण बढ़ा।
सरकार ने तेज की कार्रवाई, हजारों वाहनों की जांच
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार और ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, 1 नवंबर को:
- 14,930 वाहनों की जांच की गई।
- PUC प्रमाणपत्र उल्लंघन पर 566 चालान काटे गए।
- 300 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी 1 नवंबर को रात 8 बजे तक 7,279 वाहनों की जांच की। इनमें से 714 वाहनों को वापस भेजा गया और 38 वाहनों को जब्त किया गया। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग विभागों की कार्रवाई से संबंधित हैं।
अगले दिनों में भी राहत की उम्मीद कम
दिल्ली के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के पूर्वानुमान के अनुसार, 3 से 5 नवंबर के बीच राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में रह सकती है। इसके बाद अगले छह दिनों में कुछ सुधार के साथ AQI खराब श्रेणी में आने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, मौसम, हवा की गति और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों में बदलाव के कारण वास्तविक स्थिति पूर्वानुमान से अलग हो सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा स्वास्थ्य जोखिम
गंभीर प्रदूषण के दौरान हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, खासकर PM2.5, फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इससे सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन और अस्थमा के मरीजों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और हृदय या सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण अधिक होने पर बाहर व्यायाम करने से बचना और स्थानीय स्वास्थ्य सलाह का पालन करना बेहतर है।