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दिल्ली की हवा ने 288 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ा, AQI 377 पहुंचा; पंजाब में पराली पर CAQM का शिकंजा

दिवाली से पहले राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। CAQM ने पंजाब के 12 जिलों में निगरानी और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। पांच जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए।

दिल्ली की हवा ने 288 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ा, AQI 377 पहुंचा; पंजाब में पराली पर CAQM का शिकंजा
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 4 नवंबर को दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 377 दर्ज किया गया। यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और पिछले 288 दिनों में राजधानी का सबसे खराब औसत स्तर बताया गया है। इससे पहले 20 जनवरी को AQI 378 दर्ज हुआ था।

दिवाली नजदीक आने के साथ प्रदूषण बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है। इसी बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है।

दिल्ली के कई इलाकों में हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में
4 नवंबर को दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 22 केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी है। IIT दिल्ली, जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद ऊंचा रहा।

CPCB के अनुसार AQI की श्रेणियां इस प्रकार हैं:
- 0–50: अच्छा
- 51–100: संतोषजनक
- 101–200: मध्यम
- 201–300: खराब
- 301–400: बहुत खराब
- 401–500: गंभीर
एक जरूरी अपडेट यह भी है कि 5 नवंबर की सुबह कुछ समय पर दिल्ली का AQI 482 तक पहुंचने की रिपोर्ट आई। यह 4 नवंबर के 24 घंटे के औसत 377 से अलग समय का आंकड़ा है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही रीडिंग नहीं समझना चाहिए।

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर सख्ती
दिल्ली की बिगड़ती हवा के बीच CAQM ने पंजाब में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर चिंता जताई है। आयोग ने 4 नवंबर को जालंधर, फरीदकोट, बठिंडा, बरनाला और फाजिल्का के उपायुक्तों (DC) तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कारण बताओ नोटिस जारी किए।

आयोग का आरोप है कि इन जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जारी निर्देशों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। इससे पहले अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और कपूरथला के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई थी। इस तरह चार दिनों में पंजाब के नौ जिले सीधे नियामकीय कार्रवाई के दायरे में आ गए।

एक दिन में पंजाब में पराली जलाने की 151 घटनाएं
ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के उपग्रह आंकड़ों के अनुसार, 4 नवंबर को पंजाब में पराली जलाने की 151 घटनाएं दर्ज की गईं। छह राज्यों में कुल 467 सक्रिय घटनाएं सामने आईं।
राज्य 4 नवंबर की घटनाएं
मध्य प्रदेश 157
पंजाब 151
राजस्थान 111
उत्तर प्रदेश 33
हरियाणा 10
उत्तराखंड 5

15 सितंबर से 4 नवंबर के बीच पंजाब में कुल 2,347 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 2,839 थी।

CAQM ने 12 जिलों में निगरानी बढ़ाई
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, CAQM अध्यक्ष राजेश वर्मा ने पंजाब के 12 जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। आयोग ने निर्देश दिया कि:
- पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी और तेज की जाए।
- नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
- स्थानीय समुदायों और ग्रामीण प्रतिनिधियों को रोकथाम अभियान से जोड़ा जाए।
- बायोमास के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए।
- ताप विद्युत संयंत्रों को कम से कम 5 प्रतिशत बायोमास को-फायरिंग का लक्ष्य पूरा करना होगा।
आयोग ने नियमों का पालन नहीं करने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

दिल्ली की हवा और बिगड़ने की आशंका
मौसम और वायु गुणवत्ता पूर्वानुमानों के मुताबिक, कम हवा की गति, नमी और धुंध प्रदूषक कणों को वातावरण में जमा रहने में मदद कर सकती है। पूर्वानुमान में 6 और 7 नवंबर को दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई गई है।

IITM के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के अनुमान के अनुसार, 4 नवंबर को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 16.28 प्रतिशत था, जबकि परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 18.17 प्रतिशत आंका गया। इसका अर्थ है कि दिल्ली का प्रदूषण केवल पराली से नहीं, बल्कि वाहनों और अन्य स्थानीय स्रोतों से भी बढ़ रहा है।

आम लोगों के लिए क्या सावधानी जरूरी?
बहुत खराब और गंभीर हवा में बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना और प्रदूषण के अधिक स्तर वाले समय में अनावश्यक बाहर निकलने से परहेज करना उपयोगी हो सकता है।