नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन बुक (Mahadev Online Book) से जुड़े कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। महादेव ऐप के सह-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किए जाने की खबर है। समाचार एजेंसी PTI और कई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, UAE अधिकारियों ने उन्हें भारत की जांच एजेंसियों की ओर से जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर गिरफ्तार किया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उनके सहयोगी और महादेव ऐप के एक अन्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को ओमान से भारत वापस लाया गया था। अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) रवि उप्पल को भी भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
महत्वपूर्ण अपडेट: 5 नवंबर की सुबह तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय एजेंसियों को गिरफ्तारी की जानकारी मिली है, लेकिन UAE अधिकारियों की ओर से भारत को औपचारिक सूचना मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पूरा हो चुका नहीं माना जा सकता।
इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर हुई गिरफ्तारी
रवि उप्पल के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों के अनुरोध पर अक्टूबर 2023 में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। दिसंबर 2023 में भी उन्हें दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन करीब 45 दिन बाद रिहा कर दिया गया था।
इसके बाद ED ने जनवरी 2024 में UAE को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उप्पल कुछ समय UAE से बाहर रहने के बाद दोबारा दुबई पहुंचे थे। इस बार उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई है।
सौरभ चंद्राकर के बाद अब रवि उप्पल पर एजेंसियों का फोकस
महादेव ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को जांच एजेंसियां नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटरों में गिनती हैं। CBI की टीम सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर को ओमान से भारत लेकर आई थी।
अब एजेंसियों की कोशिश है कि रवि उप्पल को भी भारत लाकर पूछताछ की जाए। इससे कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन, पैसों के लेनदेन, विदेशी संपर्कों और भारत में मौजूद सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है।
ED की जांच में हजारों करोड़ के लेनदेन का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि महादेव ऑनलाइन बुक एक बड़े नेटवर्क के रूप में काम करता था। इसमें अलग-अलग शहरों में पैनल और शाखाओं के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित की जाती थी।
ED की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि:
- पैनल संचालक उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन सट्टेबाजी से जोड़ते थे।
- रकम कई बैंक खातों के जरिए इकट्ठा की जाती थी।
- कथित कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
- विदेशी ठिकानों से नेटवर्क का संचालन और वित्तीय प्रबंधन किया जाता था।
ED ने जनवरी 2026 में रवि उप्पल से जुड़ी संपत्तियों सहित महादेव मामले में करीब ₹21.45 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई की थी। यह जांच एजेंसी की कार्रवाई है; आरोपों और संपत्ति के स्रोत का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया में होगा।
Vanuatu पासपोर्ट को लेकर भी जांच
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर के पास वानुआतु (Vanuatu) के पासपोर्ट होने की जानकारी जांच एजेंसियों के सामने आई है। एजेंसियों को आशंका है कि विदेशी नागरिकता और दस्तावेजों का इस्तेमाल भारत की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए किया गया हो सकता है।
हालांकि, इस मामले में पासपोर्ट और नागरिकता से जुड़े सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि तथा कानूनी स्थिति अलग से स्पष्ट होनी बाकी है।
भारत लाने के लिए क्या होगी आगे की प्रक्रिया?
रवि उप्पल को भारत लाने के लिए CBI और ED को UAE के अधिकारियों के साथ औपचारिक कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि, प्रत्यर्पण अनुरोध और संबंधित कानूनी दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
भारत पहुंचने के बाद उन्हें संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद जांच एजेंसियां अदालत से हिरासत लेकर पूछताछ की अनुमति मांग सकती हैं। फिलहाल उनके भारत पहुंचने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
जांच में किन सवालों के जवाब तलाशेंगी एजेंसियां?
रवि उप्पल से पूछताछ के जरिए जांच एजेंसियां मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाना चाहेंगी:
- महादेव ऐप का संचालन किन लोगों के जरिए किया जाता था?
- कथित सट्टेबाजी से प्राप्त रकम कहां-कहां भेजी गई?
- हवाला नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था?
- भारत में चल रहे पैनल और शाखाओं के संचालक कौन थे?
- कथित अवैध कमाई से जुड़े लाभार्थियों और संपत्तियों की पहचान कैसे हुई?
इन सवालों के जवाब मामले की वित्तीय कड़ियों और कथित नेटवर्क को समझने में अहम हो सकते हैं।