सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30% तक सीमित कर दिया है। इस फैसले से 110 कैंसर दवाओं की कीमत में 70% तक की गिरावट आ सकती है।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने यह घोषणा की है। नई व्यवस्था ब्रांडेड और जेनरिक दोनों दवाओं पर लागू होगी, चाहे वे देश में बनी हों या आयातित हों।
सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद आया है। 29 सितंबर को कोर्ट की सुनवाई में न्यायाधीशों ने बताया था कि एक कैंसर दवा की विक्रेता को लागत ₹2,700 थी, लेकिन दुकान पर कीमत ₹27,000 थी।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के विश्लेषण में पाया गया कि गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर औसत मार्कअप 170% है। कुछ दवाओं पर यह 700% तक पहुँच गया है।
पिछली योजना का असर
सरकार ने 2019 में भी ऐसा कदम उठाया था। तब 42 कैंसर दवाओं पर यही 30% की सीमा लागू की गई थी। उस योजना से दवाओं की कीमत औसतन 50% गिरी और मरीजों को सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई।
कीमतों में बड़ी राहत
इस बार का नियम 35 पेटेंटेड दवाओं सहित 110 कैंसर दवाओं को शामिल करेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे मरीजों को सालाना ₹2,500 करोड़ की बचत होगी।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अधीन एक विशेषज्ञ समिति दवाओं की पूरी सूची तैयार करेगी। उसके बाद एनपीपीए ने अधिसूचना जारी की जाएगी।
लागू होने के बाद सभी निर्माताओं को अपना वर्तमान उत्पादन स्तर बनाए रखना होगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दवाओं की खपत में कोई कमी न आए।