Skip to content
24/7 News Uttar Pradesh
Breaking

गुजरात के सरकारी स्कूलों में अब बिना लिखित मंजूरी एंट्री नहीं, कैमरा चलाने पर भी सख्ती

शिक्षा विभाग का नया परिपत्र लागू; बाहरी व्यक्ति को प्रिंसिपल की पूर्व अनुमति जरूरी, फोटो-वीडियो, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी लिखित मंजूरी अनिवार्य

गुजरात के सरकारी स्कूलों में अब बिना लिखित मंजूरी एंट्री नहीं, कैमरा चलाने पर भी सख्ती
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

गुजरात के सरकारी स्कूलों में अब बाहरी लोगों की अनधिकृत एंट्री पर सख्ती कर दी गई है। राज्य शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों की सुरक्षा, बच्चों की निजता और शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित रखने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पहले प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख की पूर्व लिखित अनुमति लेनी होगी।

शिक्षा विभाग का यह परिपत्र प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि, अपने आधिकारिक दायित्वों को पूरा करने के लिए विधिवत अधिकृत सरकारी अधिकारियों को इस पूर्व अनुमति की शर्त से छूट दी गई है।

विजिटर रजिस्टर में दर्ज करनी होगी पूरी जानकारी

नए नियमों के अनुसार, केवल अनुमति मिल जाना ही पर्याप्त नहीं होगा। स्कूल में प्रवेश करने वाले बाहरी व्यक्ति को विजिटर रजिस्टर में अपना विवरण दर्ज करना होगा।

यानी स्कूल प्रशासन के पास यह रिकॉर्ड रहेगा कि कौन व्यक्ति किस उद्देश्य से स्कूल में आया और उसे प्रवेश की अनुमति किस आधार पर दी गई।

प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर किसी व्यक्ति की मौजूदगी से स्कूल की सुरक्षा, गोपनीयता, अनुशासन या शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका हो तो वह उसे प्रवेश देने से मना कर सकते हैं।

कक्षा से लेकर खेल मैदान तक—हर जगह के लिए अनुमति

दिशानिर्देश सिर्फ स्कूल के मुख्य गेट तक सीमित नहीं हैं। बाहरी व्यक्ति को कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, शौचालय या ऐसे अन्य स्थानों पर जाने के लिए भी पूर्व लिखित अनुमति की जरूरत होगी, जहां छात्रों की गतिविधियां चलती हैं।

ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश के दौरान संबंधित व्यक्ति के साथ प्रधानाचार्य, शिक्षक या अधिकृत स्कूल अधिकारी का मौजूद रहना भी जरूरी होगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल परिसर में आने वाला कोई बाहरी व्यक्ति बिना निगरानी के छात्रों या संवेदनशील क्षेत्रों तक न पहुंच सके।

बिना अनुमति फोटो-वीडियो और इंटरव्यू भी नहीं

नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फोटोग्राफी और रिकॉर्डिंग से जुड़ा है।

परिपत्र के मुताबिक, प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की:

फोटोग्राफी

वीडियोग्राफी

इंटरव्यू

ऑडियो रिकॉर्डिंग

लाइव स्ट्रीमिंग

नहीं की जा सकेगी।

ऐसी गतिविधियों को केवल कानूनी और स्वीकृत उद्देश्यों के लिए अनुमति दी जा सकती है। इसका मतलब यह है कि कोई बाहरी व्यक्ति सिर्फ स्कूल में प्रवेश करके अपने मोबाइल फोन से छात्रों या स्कूल की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग शुरू नहीं कर सकता।

छात्रों की फोटो और निजी जानकारी को लेकर भी सख्ती

गुजरात शिक्षा विभाग ने केवल कैमरे पर ही नहीं, बल्कि बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों की तस्वीरें, वीडियो या निजी जानकारी इस तरह एकत्र, प्रकाशित या प्रसारित न हो, जिससे उनकी सुरक्षा, गरिमा या निजता प्रभावित हो।

किसी आगंतुक को किसी बच्चे की व्यक्तिगत जानकारी जुटाने या उसकी पहचान अथवा तस्वीर प्रकाशित करने की भी अनुमति नहीं होगी, खासकर तब जब ऐसी गतिविधि बच्चे के सर्वोत्तम हित में न हो या उससे उसकी सुरक्षा और गोपनीयता पर खतरा पैदा हो सकता हो।

बिना अनुमति घुसने या रिकॉर्डिंग करने पर पुलिस को सूचना

अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करता है, परिसर से बाहर जाने से इनकार करता है, अनधिकृत फोटो-वीडियो बनाने की कोशिश करता है या स्कूल के कामकाज में बाधा डालता है, तो प्रधानाचार्य को तत्काल स्थानीय पुलिस और संबंधित शिक्षा अधिकारियों को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूल प्रशासन जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता लेकर ऐसे व्यक्ति को परिसर से बाहर भी कर सकता है।

दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि मामले की परिस्थितियों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), POCSO Act, Juvenile Justice Act और Information Technology Act समेत लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और निजता को बताया आधार

गुजरात सरकार ने इन नियमों के पीछे बच्चों की सुरक्षा, सम्मान, निजता और कल्याण को प्रमुख आधार बताया है।

परिपत्र में ‘In Loco Parentis’ के सिद्धांत का उल्लेख किया गया है। इसका अर्थ है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर राज्य की जिम्मेदारी एक अभिभावक जैसी है।

दिशानिर्देशों में संविधान के अनुच्छेद 21 और सुप्रीम कोर्ट के K.S. Puttaswamy फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की स्कूल सुरक्षा नीति और दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।

स्कूलों में नियमों की निगरानी भी होगी

शिक्षा विभाग ने सभी निरीक्षण अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों के पालन की निगरानी करने को कहा है।

इसका मतलब है कि अब स्कूल प्रशासन को केवल नियम जारी करने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विजिटर रजिस्टर, प्रवेश अनुमति और फोटो-वीडियो से जुड़े प्रावधानों का वास्तविक रूप से पालन हो।

खास तौर पर छात्रों की तस्वीरों और व्यक्तिगत जानकारी के डिजिटल प्रसार को लेकर स्कूलों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

क्या पत्रकारों और अन्य बाहरी लोगों पर भी लागू होंगे नियम?

नए नियमों में बाहरी व्यक्तियों के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इसलिए स्कूल परिसर में रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले पत्रकारों अथवा अन्य मीडिया/डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को भी पहले लिखित अनुमति लेने की आवश्यकता होगी, जब तक वे ऐसे अधिकृत सरकारी अधिकारी न हों जिन्हें नियमों में छूट दी गई है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि स्कूलों में सभी बाहरी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई हैं। नियमों का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रवेश और रिकॉर्डिंग नियंत्रित प्रक्रिया के तहत हो तथा बच्चों की सुरक्षा और निजता से समझौता न हो।

क्या पत्रकारों और अन्य बाहरी लोगों पर भी लागू होंगे नियम?

नए नियमों में बाहरी व्यक्तियों के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इसलिए स्कूल परिसर में रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले पत्रकारों अथवा अन्य मीडिया/डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को भी पहले लिखित अनुमति लेने की आवश्यकता होगी, जब तक वे ऐसे अधिकृत सरकारी अधिकारी न हों जिन्हें नियमों में छूट दी गई है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि स्कूलों में सभी बाहरी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई हैं। नियमों का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रवेश और रिकॉर्डिंग नियंत्रित प्रक्रिया के तहत हो तथा बच्चों की सुरक्षा और निजता से समझौता न हो।

अब स्कूल परिसरों में बढ़ेगी निगरानी

गुजरात सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब स्कूलों में बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ रही है।

नए नियमों के बाद स्कूलों में आने वाले बाहरी लोगों का रिकॉर्ड रखना, संवेदनशील स्थानों तक पहुंच सीमित करना और फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएगा।

फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि गुजरात के सरकारी स्कूलों में बिना लिखित अनुमति बाहरी व्यक्ति की एंट्री आसान नहीं होगी और बिना अनुमति कैमरा चलाने पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।