अलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर पूरे कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि OBC आयोग की रिपोर्ट के लिए चुनाव को स्थगित नहीं किया जा सकता।
पंचायतों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो गया था, लेकिन सरकार ने चुनाव नहीं कराए। न्यायालय के आदेश में कहा गया कि अस्थायी प्रशासन चुनी हुई संस्थाओं की जगह अनिश्चितकाल तक नहीं ले सकता।
OBC आरक्षण पर अदालत की चिंता
अदालत ने OBC आरक्षण के डेटा जमा करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। आगरा में 25 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी होने के बावजूद सर्वे में केवल 175 लोगों ने भाग लिया और 29 फॉर्म जमा हुए।
सरकार ने मई 2026 में पूर्व न्यायाधीश राम अवतार सिंह की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग बनाया था। आयोग ने बताया कि उसका लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हुआ है और 40 जिलों में सर्वे किया गया है।
मौजूदा आरक्षण के तहत चुनाव होंगे
न्यायालय ने कहा कि चुनाव मौजूदा 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के ढाँचे में होंगे। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण क़ानून के अनुसार बना रहेगा, लेकिन कुल ऊर्ध्वाधर आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
अदालत ने कहा कि अधूरी जाँच के कारण आरक्षित सीटों को सामान्य सीटें नहीं बनाई जा सकतीं। संविधान के अनुच्छेद 243-E और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए न्यायालय ने यह निर्णय दिया।
विपक्षी दलों ने सरकार पर चुनाव टालकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा को चुनावों में हार का डर है।