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ईरान की तेल सप्लाई पर अमेरिकी दबाव तेज: समुद्री दस्तावेज़ों के कथित फर्जीवाड़े पर कार्रवाई

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत भारत से जुड़े एक कथित समुद्री धोखाधड़ी नेटवर्क, उसके सहयोगियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। वॉशिंगटन का आरोप है कि इस नेटवर्क ने ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित टैंकरों को दूसरे देशों के झंडे और फर्जी समुद्री प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए।

ईरान की तेल सप्लाई पर अमेरिकी दबाव तेज: समुद्री दस्तावेज़ों के कथित फर्जीवाड़े पर कार्रवाई
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

फर्जी जहाज पंजीकरण के जरिए प्रतिबंधों से बचने का आरोप
अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर दबाव बढ़ाते हुए अब उन समुद्री सेवाओं और दस्तावेज़ों को निशाना बनाया है, जिनके जरिए प्रतिबंधित जहाज अपनी पहचान छिपाकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सक्रिय रह सकते हैं।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारत में आधारित सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद पर ऐसा नेटवर्क चलाने का आरोप है, जो अलग-अलग देशों की अधिकृत समुद्री पंजीकरण एजेंसियों की तरह खुद को पेश करता था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस नेटवर्क ने ईरानी पेट्रोलियम ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को कथित तौर पर फर्जी झंडे और समुद्री प्रमाणपत्र मुहैया कराए।

अमेरिकी कार्रवाई का दायरा 13 व्यक्तियों और कंपनियों तक बताया गया है। इसमें शर्मा और शाहिद के अलावा उनके कारोबारी सहयोगियों तथा उनसे जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाया गया है।

किन देशों के नाम पर बनाए गए कथित फर्जी रजिस्ट्रेशन?
अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों और वेबसाइटों ने गुयाना, इस्वातिनी, अरूबा, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते सहित कई देशों के नाम पर जहाजों का पंजीकरण और समुद्री सेवाएं देने का दावा किया।

आरोप है कि इन वेबसाइटों के जरिए जहाजों की रजिस्ट्रेशन सेवाओं के साथ नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा जहाजों के वर्गीकरण जैसी सुविधाएं भी पेश की गईं। जबकि संबंधित देशों की सरकारों ने कथित तौर पर इन संस्थाओं को अपनी अधिकृत एजेंसियां मानने से इनकार किया था।

अमेरिकी विभाग का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से प्रतिबंधित जहाजों को अपनी वास्तविक राष्ट्रीय पहचान छिपाने और समुद्री निगरानी से बचने में मदद मिल सकती है।

भारत से जुड़ी कंपनियों का भी उल्लेख
अमेरिकी दस्तावेज़ में Oceaniek Technologies India और Aryavart Ship Management Private Limited जैसी भारत से जुड़ी कंपनियों का नाम भी आया है। इसके अलावा सिंगापुर में पंजीकृत Eswatini Maritime Affairs and International Ship Registry PTE. Ltd. को भी कार्रवाई में शामिल किया गया है।

ट्रेजरी का दावा है कि इस नेटवर्क की गतिविधियां कम-से-कम 2014 से चल रही थीं। 2023 में सुनील कुमार शर्मा ने सिंगापुर में इस्वातिनी समुद्री मामलों और अंतरराष्ट्रीय जहाज रजिस्ट्री से जुड़ी कंपनी स्थापित की थी। अमेरिकी विभाग के अनुसार, इस्वातिनी प्रशासन द्वारा सार्वजनिक रूप से उस रजिस्ट्री से दूरी जताए जाने के बाद भी उससे जुड़ी सेवाएं जारी रहीं।

किन जहाजों का नाम सामने आया?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कुछ ऐसे टैंकरों का भी उल्लेख किया है, जिन्हें कथित तौर पर इस नेटवर्क से फर्जी पंजीकरण या झंडे की सेवाएं मिलीं। इनमें शामिल हैं:
- LATTAFA — IMO 9245794
- BINARY STAR — IMO 9380570
- VERA — IMO 9304655
- PING SHUN — IMO 9231901
अमेरिकी विभाग के अनुसार, इन जहाजों का संबंध ईरानी पेट्रोलियम की ढुलाई से रहा है। एक अन्य मामले में MAJESTIC X, जिसका पुराना नाम PHONIX था, का भी उल्लेख किया गया है। अमेरिका का कहना है कि 22 अप्रैल 2026 को जब इस जहाज को अमेरिकी सैन्य बलों ने रोका, तब यह ईरानी तेल ले जा रहा था और कथित तौर पर गुयाना का झंडा इस्तेमाल कर रहा था।

समुद्री सुरक्षा और बीमा पर भी चिंता
यह मामला सिर्फ प्रतिबंधों से बचने तक सीमित नहीं है। जहाजों का झूठा पंजीकरण उनकी सुरक्षा, बीमा और पर्यावरणीय जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक, फर्जी झंडे के तहत चलने वाले जहाजों के पास वैध Protection and Indemnity (P&I) बीमा नहीं हो सकता। यदि ऐसे जहाज किसी देश के समुद्री क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होते हैं या तेल रिसाव होता है, तो नुकसान की भरपाई और कानूनी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो सकता है।

इसीलिए अमेरिका ने समुद्री उद्योग के लिए नई चेतावनी जारी की है। इसमें जहाज मालिकों, बंदरगाहों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से कहा गया है कि वे जहाजों के पंजीकरण और प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता की जांच करें।

ईरान की कमाई रोकने की अमेरिकी रणनीति
यह कार्रवाई अमेरिका के ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान के तेल कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान प्रतिबंधों के बावजूद तेल बेचकर राजस्व जुटाता है और उसका इस्तेमाल अपनी सैन्य तथा क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए करता है।

4 नवंबर की कार्रवाई में अमेरिका ने तुर्किये स्थित Fugo Ground Services Inc. पर भी प्रतिबंध लगाए। अमेरिकी ट्रेजरी का आरोप है कि यह कंपनी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइनों को सेवाएं दे रही थी। इस तरह कार्रवाई का दायरा समुद्री कारोबार से आगे बढ़कर विमानन सेवाओं तक भी पहुंचा है।

भारत के लिए क्या मायने?
इस मामले में भारत से जुड़े व्यक्तियों और कंपनियों के नाम आने के कारण भारतीय कारोबारी और समुद्री क्षेत्र की निगरानी पर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों में किसी व्यक्ति या कंपनी का नाम शामिल होना अपने-आप में अदालत में अपराध साबित होने के बराबर नहीं है। आरोपों और संबंधित पक्षों के जवाब या न्यायिक निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

आगे इस मामले का असर अंतरराष्ट्रीय जहाज पंजीकरण सेवाओं, समुद्री बीमा, बंदरगाहों की जांच और ईरानी तेल की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर पड़ सकता है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कंपनियां और व्यक्ति अमेरिकी आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और क्या अन्य देश भी ऐसी रजिस्ट्रियों की जांच शुरू करते हैं।