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ISRO की सैटेलाइट नजर में चक्रवात ‘अर्नब’, अंतरिक्ष से दिखा तूफान का खतरनाक रूप

सैटेलाइट तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बेहद संगठित बादलों का घेरा और स्पष्ट केंद्रीय परिसंचरण नजर आया; IMD के मुताबिक अर्नब के 27 अक्टूबर तक बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की संभावना

ISRO की सैटेलाइट नजर में चक्रवात ‘अर्नब’, अंतरिक्ष से दिखा तूफान का खतरनाक रूप
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

बंगाल की खाड़ी में तेजी से ताकतवर हो रहा चक्रवात ‘अर्नब’ अब अंतरिक्ष से भी अपने संगठित और मजबूत होते स्वरूप का संकेत दे रहा है। भारतीय उपग्रह आधारित निगरानी में तूफान के चारों ओर घने और घुमावदार बादलों की पट्टियां तथा एक स्पष्ट केंद्रीय परिसंचरण दिखाई दिया है। इन सैटेलाइट अवलोकनों से मौसम वैज्ञानिकों को तूफान की स्थिति, संरचना और उसके विकास पर लगातार नजर रखने में मदद मिल रही है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के INSAT-3DS आधारित सैटेलाइट बुलेटिन में भी अर्नब के आसपास केंद्रीय और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में मध्यम से बहुत तीव्र संवहनी गतिविधि दर्ज की गई। कुछ बादल क्षेत्रों में बहुत कम cloud-top temperatures दर्ज होना इस सिस्टम में मजबूत thunderstorm activity का संकेत है।

अंतरिक्ष से दिखी तूफान की संगठित संरचना

ताजा तस्वीरों में अर्नब के आसपास बादलों का घेरा पहले की तुलना में ज्यादा संगठित और सघन नजर आ रहा है। इसका केंद्रीय परिसंचरण भी स्पष्ट दिखाई देता है। ऐसे सैटेलाइट अवलोकन चक्रवात की intensity और structure का आकलन करने में मौसम वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

हालांकि, केवल तस्वीर देखकर संभावित नुकसान का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए हवा की गति, समुद्र की स्थिति, वर्षा, तूफान की दिशा और लैंडफॉल के समय उसकी वास्तविक ताकत जैसे कई मानकों का लगातार विश्लेषण किया जाता है।

27 अक्टूबर तक और ताकतवर होने का अनुमान

IMD के ताजा समुद्री बुलेटिन के अनुसार, अर्नब 26 अक्टूबर को पूर्व-मध्य और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में मौजूद था और लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। विभाग के मुताबिक इसके 26 अक्टूबर की रात तक Severe Cyclonic Storm और 27 अक्टूबर को Very Severe Cyclonic Storm में बदलने की संभावना है।

केंद्र सरकार ने भी चक्रवात को देखते हुए तैयारियों की समीक्षा की है। PIB के अनुसार, राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की बैठक में IMD ने बताया कि अर्नब आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है और संबंधित राज्यों को आवश्यक तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है तूफान

पूर्वानुमान के मुताबिक अर्नब के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश-यानम तट के बीच, लगभग बापटला से विशाखापत्तनम के बीच पहुंचने की संभावना है। IMD ने लैंडफॉल के दौरान अधिकतम लगातार हवा की गति 115–125 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों के साथ यह गति करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान जताया है।

इसका मतलब यह है कि तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और स्थानीय स्तर पर जलभराव जैसी स्थितियां बन सकती हैं। आंध्र प्रदेश के साथ दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी मौसम का असर देखने को मिल सकता है।

सैटेलाइट निगरानी क्यों है अहम?

चक्रवात के दौरान सैटेलाइट लगातार उस सिस्टम की लोकेशन, बादलों की संरचना, संवहनी गतिविधि और विकास पर नजर रखने में मदद करते हैं। समुद्र के ऊपर मौजूद तूफान के लिए यह निगरानी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां जमीन आधारित मौसम स्टेशनों की संख्या सीमित होती है।

अर्नब की सैटेलाइट तस्वीरें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके जरिए मौसम एजेंसियों को यह समझने में मदद मिलती है कि तूफान किस तरह संगठित हो रहा है और उसकी दिशा व तीव्रता में क्या बदलाव आ रहा है।

प्रशासन की तैयारियां तेज

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र और राज्य स्तर पर तैयारियां बढ़ाई जा रही हैं। सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां निकासी, राहत सामग्री, संचार व्यवस्था और बचाव दलों की तैयारी पर नजर रख रही हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अर्नब की ताकत और ट्रैक में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान बदलाव संभव है। इसलिए लोगों को सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं के बजाय IMD और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।