समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर जेल से रिहा होने के कुछ ही समय बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें एक नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 1 नवंबर 2026 को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
अदालत के आदेश के बाद आजम खान को गाजियाबाद की डासना जिला जेल में भेज दिया गया। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब वह और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान एक अन्य मामले में जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से बाहर आए थे।
जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला
ED की जांच मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है। आजम खान इस ट्रस्ट के संस्थापक हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन का कथित तौर पर दुरुपयोग कर निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ED ने इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज 58 FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एजेंसी ने विश्वविद्यालय से जुड़ी जमीन और इमारतों को भी कुर्क किया है, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिन पर न्यायिक प्रक्रिया में फैसला होना बाकी है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत, डासना जेल भेजे गए
ED ने आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया था। विशेष न्यायाधीश अवनीश कुमार पांडेय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें रामपुर के बजाय गाजियाबाद की डासना जेल में रखा गया।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेजा है, न कि 14 दिन की ED रिमांड पर। न्यायिक हिरासत के दौरान वह जेल में रहेंगे और आगे की पूछताछ या रिमांड के लिए एजेंसी को अदालत से अलग अनुमति लेनी होगी।
आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट में दी गिरफ्तारी को चुनौती
2 नवंबर को आजम खान ने ED की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की, लेकिन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिका इसी सप्ताह सूचीबद्ध की जा सकती है।
आजम खान के पक्ष ने गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाए हैं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और गाजियाबाद की विशेष अदालत में आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज
आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। हालांकि, इस मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश साक्ष्यों और कानूनी सुनवाई के बाद ही तय होगा।