कर्नाटक के कलबुर्गी शहर में आवारा कुत्ते के हमले से चार साल के बच्चे की मौत हो गई। बच्चा सड़क पर खेल रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मृतक की पहचान मनोज पुजारी जामबगा के रूप में हुई है। इस घटना के बाद इलाके में बच्चों की सुरक्षा और आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
गणदेवता मंदिर के पास खेल रहा था बच्चा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना कलबुर्गी शहर के दरियापुर इलाके में गणदेवता मंदिर के पास हुई। मनोज सड़क पर खेल रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ते ने अचानक उस पर हमला कर दिया।
हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। परिवार के लोग उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार शुरू किया गया। हालांकि, चोटें गंभीर होने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पिता शहर में करते हैं चौकीदारी का काम
रिपोर्टों के अनुसार, मनोज के पिता शरणबसप्पा पुजारी कलबुर्गी में चौकीदार के रूप में काम करते हैं। उनका मूल गांव कलबुर्गी तालुक का जामबगा बताया गया है। परिवार शहर के कोटनूर इलाके में रह रहा था।
बच्चे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
इससे पहले भी बच्चों पर हो चुके हैं हमले
कलबुर्गी और आसपास के क्षेत्रों में हाल के महीनों में बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं।
- सेदम तालुक: पिछले महीने मीनाहबल गांव में चार साल की बच्ची सान्वी पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला किया था। बच्ची के चेहरे, होंठ और गाल पर गंभीर चोटें आई थीं। उसे अस्पताल में इलाज और टांके लगाने पड़े।
- रायचूर: इसी साल मालियाबाद इलाके में चार साल के बच्चे गोपाल पर कुत्ते ने हमला किया था। उसके सिर में गंभीर चोटें आई थीं।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने नगर प्रशासन से आवारा कुत्तों की समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आवासीय इलाकों और सड़कों पर बच्चों का खेलना भी जोखिम भरा होता जा रहा है।
नागरिकों ने कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों के प्रबंधन के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है।
आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान करते समय सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी है। स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से इस समस्या से निपटें।
आगे क्या?
इस घटना के बाद अब निगाहें कलबुर्गी के स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित इलाके में कुत्तों की निगरानी, नसबंदी और टीकाकरण अभियान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल बच्चे की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आवासीय इलाकों में छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय निकायों की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।