Skip to content
24/7 News Uttar Pradesh
Breaking

कानपुर में भाजयुमो की कुर्सी पर ₹7 लाख का खेल? WhatsApp चैट वायरल होने से भाजपा संगठन में मची हलचल

कानपुर में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर कथित लेनदेन का मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल WhatsApp चैट में पद दिलाने के बदले 7 लाख रुपये की डील होने का दावा किया गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने चैट को फर्जी बताया है, जबकि पार्टी के जिला महामंत्री ने मामले की जांच कराने की बात कही है। वायरल चैट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कानपुर में भाजयुमो की कुर्सी पर ₹7 लाख का खेल? WhatsApp चैट वायरल होने से भाजपा संगठन में मची हलचल
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक पदों को लेकर चल रही खींचतान अब एक नए विवाद में बदलती दिखाई दे रही है। इस बार मामला भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के उत्तर जिलाध्यक्ष पद से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर एक कथित WhatsApp चैट वायरल होने के बाद पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है।

वायरल चैट में दावा किया जा रहा है कि भाजयुमो का जिलाध्यक्ष पद दिलाने के लिए 7 लाख रुपये में सौदा तय हुआ है। चैट में भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित का नाम भी लिया गया है। हालांकि, इन संदेशों की प्रामाणिकता अभी साबित नहीं हुई है और संबंधित पदाधिकारियों ने आरोपों को खारिज किया है।

WhatsApp चैट में क्या किया गया दावा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वायरल चैट में दो लोगों के बीच भाजयुमो अध्यक्ष पद को लेकर बातचीत दिखाई गई है। इसमें पद के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च होने की बात कही गई है।

इसके बाद एक संदेश में कथित तौर पर दावा किया गया कि सात लाख रुपये में डील फाइनल हो गई है और अब केवल सूची जारी होने का इंतजार है।

चैट में पदाधिकारियों पर पैसे लेकर संगठनात्मक काम करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। यही वजह है कि स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोपों को बताया फर्जी
मामले में भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने वायरल चैट को फर्जी बताया है। उनका कहना है कि संगठन की छवि खराब करने के उद्देश्य से इस तरह की सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही है।

उन्होंने कथित तौर पर स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी से पद के बदले पैसे नहीं मांगे और न ही किसी से इस तरह का लेनदेन किया है।

भाजपा उत्तर जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा ने भी इसे संगठन को बदनाम करने की साजिश बताया है।

जिला महामंत्री बोले—चैट की सच्चाई का पता लगाएंगे
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा उत्तर जिला के महामंत्री अवधेश सोनकर ने बताया कि उन्हें वायरल चैट की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई का पता लगाया जाएगा।

इस बयान के बाद अब निगाहें पार्टी संगठन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

अंशु ठाकुर ने भी चैट को बताया फर्जी
इस मामले में भाजपा उत्तर जिला उपाध्यक्ष अंशु ठाकुर का नाम भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने भी वायरल चैट और वीडियो को फर्जी बताया है।

अंशु ठाकुर ने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष की छवि खराब करने के लिए इस सामग्री को प्रसारित किया गया है। उन्होंने 31 अक्टूबर को पुलिस आयुक्त से मिलकर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करने की बात कही थी।

पहले भी संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उठा था विवाद
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में भाजपा की संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पहले से चर्चा चल रही थी।

क्षेत्रीय आईटी सेल के पदाधिकारियों की सूची को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके बाद भाजयुमो के उत्तर, दक्षिण और ग्रामीण जिलों में अध्यक्ष पदों की नियुक्तियों को लेकर दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक हलचल बढ़ गई।

अब सात लाख रुपये की कथित डील वाली चैट ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है।

अब जांच पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल वायरल चैट की वास्तविकता का है। क्या यह बातचीत असली है या किसी फेक WhatsApp चैट जनरेटर के माध्यम से तैयार की गई है? इसका जवाब तकनीकी जांच और पुलिस की कार्रवाई के बाद ही मिल सकेगा।

अभी तक वायरल स्क्रीनशॉट के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। भाजपा संगठन की ओर से भी जांच और कार्रवाई की बात कही गई है।

यदि चैट फर्जी साबित होती है तो इसे प्रसारित करने वालों की भूमिका की जांच हो सकती है। वहीं, यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो संगठनात्मक नियुक्तियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।