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कोयला खनन में निवेश का नया रास्ता: अधूरी खोज वाली खदानों में अंडरग्राउंड माइनिंग पर 100% अग्रिम भुगतान माफ

केंद्र सरकार ने आंशिक रूप से खोजी गई कोयला खदानों के लिए अग्रिम भुगतान में छूट का दायरा बढ़ाया है। अब ऐसी खदानों की नीलामी जीतने वाली कंपनियों को भी यह राहत मिलेगी, बशर्ते वे पूरी खदान में केवल भूमिगत खनन करें और उसे ओपनकास्ट या मिश्रित खनन में न बदलें।

कोयला खनन में निवेश का नया रास्ता: अधूरी खोज वाली खदानों में अंडरग्राउंड माइनिंग पर 100% अग्रिम भुगतान माफ
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

कोयला क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार का नया फैसला
भारत के कोयला क्षेत्र में निजी निवेश और भूमिगत खनन को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है। कोयला मंत्रालय ने आंशिक रूप से खोजी गई (Partially Explored) कोयला खदानों के लिए भी अग्रिम भुगतान यानी Upfront Amount में पूरी छूट देने का प्रावधान बढ़ा दिया है।

यह सुविधा उन सफल बोलीदाताओं को मिलेगी, जो नीलामी में ऐसी खदान हासिल करने के बाद उसमें पूरी तरह अंडरग्राउंड माइनिंग (भूमिगत खनन) करेंगे। यह आदेश 30 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया।

पहले किन खदानों को मिलती थी छूट?
सरकार की मौजूदा नीलामी व्यवस्था में भूमिगत खनन के लिए पहले से कुछ वित्तीय राहत उपलब्ध थी।
- सामान्य कोयला खदानों में न्यूनतम राजस्व हिस्सेदारी की दर 4% निर्धारित है।
- भूमिगत खनन के लिए यह दर घटाकर 2% रखी गई है।
- पहले से भूमिगत खनन के लिए वर्गीकृत खदानों में अग्रिम भुगतान की छूट उपलब्ध थी।
- लेकिन आंशिक रूप से खोजी गई खदानों में खनन का प्रकार पहले से तय करना संभव नहीं होता था, इसलिए ऐसी खदानों पर सामान्यतः 4% की न्यूनतम राजस्व हिस्सेदारी और अग्रिम भुगतान की शर्त लागू होती थी।

अब आंशिक रूप से खोजी गई खदानों को भी राहत
नई व्यवस्था के तहत अब ऐसी आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के सफल बोलीदाता भी अग्रिम भुगतान में 100% छूट का लाभ उठा सकते हैं, जिन्हें नीलामी के दस्तावेजों में शुरुआत में भूमिगत खनन के लिए वर्गीकृत नहीं किया गया था।

इसके लिए कंपनी को यह शर्त माननी होगी कि वह खदान के पूरे जीवनकाल में केवल भूमिगत तरीके से ही कोयला निकालेगी।

ओपनकास्ट या मिक्स्ड माइनिंग की अनुमति नहीं होगी। यानी एक बार इस छूट का लाभ लेने के बाद कंपनी खदान को खुले तरीके या दोनों तरीकों से खनन करने वाली परियोजना में परिवर्तित नहीं कर सकेगी।

कंपनियों को कैसे होगा फायदा?
भूमिगत खनन में शुरुआती निवेश अधिक होता है। इसके लिए विशेष मशीनों, सुरंगों, वेंटिलेशन, सुरक्षा प्रणालियों और तकनीकी सुविधाओं की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा उत्पादन शुरू होने में भी अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है।

अग्रिम भुगतान की पूरी छूट मिलने से कंपनियों पर शुरुआती वित्तीय बोझ कम होगा। इससे बची हुई पूंजी को खदान के विकास, मशीनरी और सुरक्षा व्यवस्था में लगाया जा सकेगा।

सरकार का उद्देश्य ऐसी कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, जो भूमिगत खनन की आधुनिक तकनीकों में निवेश करने के लिए तैयार हैं।

पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है भूमिगत खनन
भूमिगत खनन में कोयला जमीन के नीचे बनी सुरंगों के माध्यम से निकाला जाता है। ओपनकास्ट खनन की तुलना में इससे जमीन की ऊपरी सतह पर कम बदलाव होता है और बड़े क्षेत्र में पेड़ों तथा प्राकृतिक संरचनाओं को हटाने की जरूरत अपेक्षाकृत कम पड़ सकती है।

सरकार का मानना है कि इस प्रोत्साहन से आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा। इनमें कंटीन्यूअस माइनर, लॉन्गवॉल सिस्टम, रिमोट सेंसिंग और AI आधारित सुरक्षा तकनीकें शामिल हैं।

कोयला उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा समर्थन
भारत में बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए कोयला महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बना हुआ है। घरेलू खदानों का तेजी से विकास होने से कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार पिछले कुछ वर्षों से व्यावसायिक कोयला खनन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नीलामी प्रक्रिया और वित्तीय शर्तों में बदलाव कर रही है। अग्रिम भुगतान में नई छूट इसी नीति का हिस्सा है।

कंपनियों के लिए जरूरी शर्तें
नई व्यवस्था का लाभ लेने वाली कंपनियों को इन शर्तों का पालन करना होगा:
1. खदान आंशिक रूप से खोजी गई हो।
2. कंपनी ने नीलामी के जरिए खदान हासिल की हो।
3. खनन पूरी तरह भूमिगत तरीके से किया जाए।
4. खदान को ओपनकास्ट या मिश्रित खनन में परिवर्तित न किया जाए।
5. खदान के पूरे परिचालन जीवनकाल में भूमिगत खनन की शर्त का पालन किया जाए।

आगे क्या होगा?
अब नई शर्तों के तहत पात्र खदानों की नीलामी में कंपनियों को शुरुआती वित्तीय राहत मिल सकेगी। इससे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी कंपनियां भूमिगत खनन की तकनीक अपनाती हैं और कितनी नई परियोजनाएं व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचती हैं।