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क्या बदल सकती है दुनिया की ताकतों की आवाज? BRICS के संयुक्त घोषणा-पत्र में UNSC सुधार और आतंकवाद पर सख्त रुख

नई दिल्ली में 12वें BRICS संसदीय मंच का समापन; सदस्य देशों ने वैश्विक शासन में ग्लोबल साउथ की बड़ी भूमिका, सीमापार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।

क्या बदल सकती है दुनिया की ताकतों की आवाज? BRICS के संयुक्त घोषणा-पत्र में UNSC सुधार और आतंकवाद पर सख्त रुख
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

दुनिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 12वां BRICS संसदीय मंच 27 अक्टूबर 2026 को संयुक्त घोषणा-पत्र अपनाने के साथ संपन्न हो गया। दो दिवसीय बैठक में सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संसदों की कार्यक्षमता और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और वैश्विक फैसले लेने वाली संस्थाओं में ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने का समर्थन रहा। संयुक्त घोषणा-पत्र में सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाने की बात कही गई।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग क्यों अहम है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली संस्था है। इसकी मौजूदा संरचना में पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—वीटो का अधिकार रखते हैं। लंबे समय से अनेक देश इस व्यवस्था में सुधार की मांग करते रहे हैं, ताकि आज की वैश्विक परिस्थितियों और विकासशील देशों की भूमिका को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित किया जा सके।

BRICS संसदीय मंच की संयुक्त घोषणा में सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन किया गया। इसका उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं को अधिक न्यायसंगत, प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाना तथा एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को अधिक महत्व देना है। 

हालांकि, घोषणा में सुधारों का समर्थन करना अपने आप में सुरक्षा परिषद की संरचना बदलने के बराबर नहीं है। वास्तविक बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित नियमों और सदस्य देशों के बीच आगे की बातचीत की आवश्यकता होगी।

आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’, दोहरे मापदंडों का विरोध

घोषणा-पत्र में आतंकवाद को उसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अपराध और अन्यायपूर्ण कृत्य बताते हुए इसकी निंदा की गई। इसमें विशेष रूप से सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के लिए वित्तीय मदद और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह देने जैसे मुद्दे शामिल किए गए।

सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों को समाप्त करने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों तथा उन्हें समर्थन देने वालों को संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराने पर जोर दिया। घोषणा में संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद सम्मेलन को अंतिम रूप देने और अपनाने की दिशा में भी तेजी लाने की बात कही गई। 

बैठक में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की भी निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। संयुक्त घोषणा-पत्र में आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।

ओम बिरला ने संवाद और शांति पर दिया जोर

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंच के समापन सत्र में कहा कि वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान युद्ध या टकराव के बजाय संवाद, शांति और सहयोग के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने वैश्विक शासन में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया।

बैठक का विषय था—“Fostering Parliaments for People-Centric Development”, यानी जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना। चर्चा में लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने पर भी ध्यान दिया गया। 

किन देशों ने लिया हिस्सा?

इस 12वें मंच में BRICS सदस्य देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आधिकारिक संयुक्त घोषणा-पत्र में शामिल सदस्य देशों के नाम हैं:

ब्राजील

चीन

मिस्र

इथियोपिया

भारत

इंडोनेशिया

ईरान

रूस

दक्षिण अफ्रीका

संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

घोषणा-पत्र में साझेदार देशों की भागीदारी और अंतर-संसदीय सहयोग को भी महत्व दिया गया। प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, देशों की संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

AI और डिजिटल तकनीक से संसदों को मजबूत करने पर जोर

बैठक में सुरक्षा और कूटनीति के अलावा आधुनिक तकनीक पर भी चर्चा हुई। घोषणा-पत्र ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से जुड़े संसाधनों के विस्तार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नैतिक तथा जिम्मेदार इस्तेमाल का समर्थन किया।

संसदों में डिजिटल तकनीक का बेहतर उपयोग विधायी कामकाज, जानकारी तक पहुंच और जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। साथ ही, पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। 

जलवायु परिवर्तन और सतत विकास भी चर्चा का हिस्सा रहे। घोषणा-पत्र में Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities (CBDR-RC) के सिद्धांत का समर्थन किया गया। इसका मूल विचार है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की साझा जिम्मेदारी तो सभी देशों की है, लेकिन उनकी ऐतिहासिक भूमिका, क्षमता और परिस्थितियों के अंतर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन के पास

मंच के समापन पर ओम बिरला ने BRICS संसदीय मंच की अध्यक्षता चीन को सौंप दी, जो 2027 में इसकी अगली अध्यक्षता संभालेगा। भारत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सदस्य देशों ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग और जन-केंद्रित विकास जैसे विषयों पर साझा रुख प्रस्तुत किया। 

अब आगे की चुनौती इस घोषणा-पत्र में व्यक्त सहमतियों को व्यावहारिक सहयोग में बदलने की होगी। सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना, आतंकवाद के खिलाफ सूचनाओं और कार्रवाई में समन्वय बढ़ाना तथा डिजिटल शासन और जलवायु नीति पर सहयोग को आगे ले जाना सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।

निष्कर्ष: नई दिल्ली में BRICS संसदीय मंच का समापन केवल एक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी करने तक सीमित नहीं रहा। इसने वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व, आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल पर सदस्य देशों की प्रतिबद्धता सामने रखी। लेकिन इन लक्ष्यों को वास्तविक बदलाव में बदलने के लिए आने वाले समय में ठोस कदम और निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी होगा।