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क्या दिल्ली में खेती की जमीन के दाम कई गुना बढ़ने वाले हैं? 18 साल बाद सर्किल रेट बदलने की तैयारी से किसानों की उम्मीदें बढ़ीं

कुछ जिलों में कृषि भूमि का प्रस्तावित सर्किल रेट ₹5 करोड़ प्रति एकड़ तक पहुंच सकता है। किसान ₹10 करोड़ की दर की मांग कर रहे हैं, लेकिन नई दरों पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

क्या दिल्ली में खेती की जमीन के दाम कई गुना बढ़ने वाले हैं? 18 साल बाद सर्किल रेट बदलने की तैयारी से किसानों की उम्मीदें बढ़ीं
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

देश की राजधानी दिल्ली में कृषि भूमि के सर्किल रेट को लेकर एक बड़ा बदलाव चर्चा में है। सरकार करीब 18 साल बाद खेती की जमीन की सरकारी मूल्यांकन दरों में संशोधन करने पर विचार कर रही है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्रेशन खर्च और भूमि विकास से जुड़े मामलों पर असर पड़ सकता है।

कृषि भूमि की दरों में बदलाव की मांग लंबे समय से उठ रही है। किसानों का कहना है कि सरकारी मूल्यांकन दरें मौजूदा बाजार कीमतों और जमीन के बढ़ते महत्व के अनुरूप नहीं हैं। वहीं, सरकार के सामने चुनौती यह है कि दिल्ली के अलग-अलग जिलों, गांवों और भूमि श्रेणियों में कीमतों का अंतर देखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जो वास्तविक परिस्थितियों के ज्यादा करीब हो।

मौजूदा दर कितनी है और बदलाव की जरूरत क्यों महसूस हुई?

दिल्ली में कृषि भूमि के लिए अक्सर उद्धृत न्यूनतम संकेतात्मक दर ₹53 लाख प्रति एकड़ है। यह दर वर्ष 2008 से चली आ रही व्यवस्था से जुड़ी है। यमुना के नदी-तटीय क्षेत्रों के लिए ₹17.6 लाख प्रति एकड़ की दर भी रिपोर्टों में बताई गई है। हालांकि, कृषि भूमि के अलग-अलग क्षेत्रों और भूमि-पूलिंग जैसी योजनाओं के लिए लागू दरों की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए ₹53 लाख को दिल्ली की हर कृषि भूमि पर लागू एक समान अंतिम दर नहीं समझना चाहिए। 

पिछले वर्षों में दिल्ली के आसपास शहरीकरण, सड़क और परिवहन परियोजनाओं तथा आवासीय विकास के कारण कई ग्रामीण इलाकों में जमीन का बाजार मूल्य काफी बढ़ा है। इसके बावजूद पुराने सरकारी मूल्यांकन और बाजार में होने वाले वास्तविक सौदों के बीच अंतर बना हुआ है।

इसी अंतर को कम करने के लिए सरकार अलग-अलग जिलों और गांवों के हिसाब से नई दरें तय करने के विकल्प पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य केवल दर बढ़ाना ही नहीं, बल्कि भूमि की स्थिति और उसके संभावित उपयोग के अनुसार मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना भी है।

किन जिलों में ₹5 करोड़ प्रति एकड़ तक पहुंच सकता है प्रस्ताव?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी समितियों की सिफारिशों में कृषि भूमि के लिए अलग-अलग जिलों के हिसाब से कई करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दरों पर विचार किया गया है। ये प्रस्तावित दरें हैं, अंतिम रूप से अधिसूचित नई दरें नहीं।

रिपोर्टों में सामने आए प्रस्तावों का एक मोटा विवरण इस प्रकार है:

दक्षिण दिल्ली और नई दिल्ली: लगभग ₹5 करोड़ प्रति एकड़।

उत्तर, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिल्ली: लगभग ₹3 करोड़ प्रति एकड़।

मध्य दिल्ली: लगभग ₹2.5 करोड़ प्रति एकड़।

शाहदरा, उत्तर-पूर्व और पूर्वी दिल्ली: लगभग ₹2.2–2.25 करोड़ प्रति एकड़।

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली: लगभग ₹3.5 करोड़ प्रति एकड़ का प्रस्ताव।

दक्षिण-पूर्व दिल्ली: लगभग ₹3 करोड़ प्रति एकड़ का प्रस्ताव।

अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में कुछ जिलों की प्रस्तावित दरों में मामूली अंतर भी दिखता है। अंतिम मूल्यांकन इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कौन-सी सिफारिश स्वीकार करती है और गांवों तथा भूमि की श्रेणियों को किस तरह परिभाषित किया जाता है। 

किसान ₹10 करोड़ प्रति एकड़ की मांग क्यों कर रहे हैं?

दिल्ली पंचायत संघ सहित किसान संगठनों ने कृषि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाकर ₹10 करोड़ प्रति एकड़ करने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि राजधानी में जमीन का महत्व और बाजार मूल्य बहुत बढ़ गया है, जबकि पुरानी सरकारी दरों के कारण भूमि मालिकों को नुकसान हो सकता है।

किसान संगठनों ने यह मांग भी रखी है कि संशोधित दरें लागू होने तक नई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने पर विचार किया जाए। इसके अलावा, पहले अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे की समीक्षा की मांग भी उठाई गई है।

हालांकि, सर्किल रेट और भूमि अधिग्रहण का मुआवजा एक ही चीज नहीं हैं। सर्किल रेट रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी के लिए सरकारी मूल्यांकन का आधार होता है, जबकि भूमि अधिग्रहण का मुआवजा संबंधित कानून, लागू नियमों, पात्रता और अन्य कारकों के अनुसार तय होता है। इसलिए सर्किल रेट में वृद्धि से किसानों के हर मुआवजे में स्वतः समान अनुपात में बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है।

नई दरें लागू हुईं तो जमीन खरीदने-बेचने वालों पर क्या असर होगा?

सर्किल रेट वह न्यूनतम सरकारी मूल्य है, जिसका इस्तेमाल संपत्ति के पंजीकरण और स्टांप ड्यूटी की गणना में किया जाता है। यदि नई दरें बढ़ती हैं, तो उन सौदों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन खर्च बढ़ सकता है, जहां संशोधित सरकारी मूल्यांकन पहले की तुलना में अधिक होगा।

इसका असर केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि कृषि भूमि खरीदने वाले लोगों, जमीन विकसित करने वाली कंपनियों और ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के सौदे करने वालों पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, जमीन मालिकों को सरकारी मूल्यांकन में अपनी संपत्ति का अधिक मूल्य दर्ज होने का लाभ मिल सकता है। वास्तविक असर संबंधित जमीन की श्रेणी, सौदे के मूल्य और लागू शुल्कों पर निर्भर करेगा। 

क्या दिल्ली की सभी जमीनों के सर्किल रेट बढ़ेंगे?

यह मामला सिर्फ कृषि भूमि तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। दिल्ली सरकार की व्यापक समीक्षा में आवासीय और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों के मूल्यांकन ढांचे पर भी विचार हो रहा है। रिपोर्टों में आवासीय सर्किल रेट के लिए अलग-अलग कॉलोनियों और श्रेणियों के अनुसार बदलाव की चर्चा है।

प्रस्तावित व्यवस्था में ग्रामीण गांवों, शहरीकृत गांवों और ग्रीन-बेल्ट क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें तय करने पर विचार किया जा रहा है। इससे एक ही जिले में स्थित लेकिन विकास और बाजार मूल्य के लिहाज से अलग-अलग जमीनों का मूल्यांकन अधिक स्पष्ट हो सकता है। हालांकि, कौन-सी श्रेणी में कितना बदलाव होगा, यह अंतिम सरकारी निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। 

फैसला कब तक आ सकता है?

दिल्ली सरकार ने सर्किल रेट की समीक्षा के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की थी और अक्टूबर 2025 में जनता, किसानों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। इसके बाद प्रस्तावों पर विचार-विमर्श हुआ।

लेकिन 22 अक्टूबर 2026 के आसपास केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच प्रस्तावित समीक्षा बैठक टलने की खबर सामने आई। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अगली बैठक जनवरी 2027 में होने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद भी नई दरों को लागू करने के लिए सरकार की मंजूरी और औपचारिक अधिसूचना जरूरी होगी। 

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि नई दरें लागू हो चुकी हैं या जमीन की सरकारी कीमत निश्चित रूप से ₹5 करोड़ प्रति एकड़ हो गई है। अभी मामला प्रस्तावों, समीक्षा और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में है।

निष्कर्ष: किसानों को राहत या जमीन खरीदना और महंगा?

दिल्ली में कृषि भूमि के सर्किल रेट में प्रस्तावित बदलाव ग्रामीण जमीन के मालिकों और संपत्ति बाजार, दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि सरकार बाजार मूल्य और भूमि की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर नई दरें तय करती है, तो पुराने मूल्यांकन और मौजूदा कीमतों के बीच अंतर कम करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन अंतिम तस्वीर तभी सामने आएगी, जब सरकार जिलेवार दरें, गांवों की श्रेणियां, लागू होने की तारीख और संबंधित नियम स्पष्ट करेगी। तब तक ₹5 करोड़ प्रति एकड़ की चर्चा को प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि लागू सरकारी दर के रूप में।