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क्या जेवर के पास बसने जा रही है ‘सिंगापुर सिटी’? हाईटेक टाउनशिप से यूपी में निवेश की नई उम्मीद

सिंगापुर के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में प्रस्तावित टाउनशिप पर चर्चा। सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की योजना; परियोजना का अंतिम स्वरूप अभी तय होना बाकी है।

क्या जेवर के पास बसने जा रही है ‘सिंगापुर सिटी’? हाईटेक टाउनशिप से यूपी में निवेश की नई उम्मीद
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और शहरी विकास को गति देने के लिए जेवर के पास ‘सिंगापुर सिटी’ नाम से एक हाईटेक औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसका उद्देश्य सिंगापुर की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास उद्योग, लॉजिस्टिक्स तथा आधुनिक व्यावसायिक सुविधाओं के विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की। बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, हरित ऊर्जा, शहरी नियोजन और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं में रुचि दिखाई। 

हालांकि, ‘सिंगापुर सिटी’ का नाम सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि वहां निर्माण कार्य शुरू हो गया है। अभी यह निवेश आकर्षित करने और प्रस्तावित विकास मॉडल से जुड़ी पहल है। इसके वास्तविक आकार, भूमि, सुविधाओं, लागत और निर्माण की समयसीमा को लेकर अंतिम जानकारी की प्रतीक्षा है।

जेवर के पास ही क्यों चुना जा रहा है यह क्षेत्र?

जेवर और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास का इलाका उत्तर प्रदेश के उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और माल ढुलाई से जुड़े बुनियादी ढांचे के कारण उद्योगों तथा लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए अवसर विकसित हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि यह क्षेत्र ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ाव तथा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के कारण उत्तरी भारत में आपूर्ति श्रृंखला के बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है। इससे माल की आवाजाही, गोदामों, वितरण केंद्रों और निर्यात से जुड़े कारोबार को मदद मिल सकती है। 

यदि भविष्य में टाउनशिप को औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाता है, तो आसपास की आर्थिक गतिविधियों में विनिर्माण, भंडारण, परिवहन, कार्यालयों और सहायक सेवाओं की भूमिका बढ़ सकती है। लेकिन यह लाभ तभी वास्तविक होगा, जब परियोजना को आवश्यक मंजूरियां मिलें और निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरें।

‘सिंगापुर सिटी’ में किस तरह के उद्योगों की संभावना है?

सिंगापुर प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई चर्चा में कई ऐसे क्षेत्र शामिल रहे, जिनमें आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उनके घटकों के उत्पादन से जुड़ी इकाइयां।

डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाएं: डिजिटल सेवाओं के लिए डेटा स्टोरेज और कंप्यूटिंग सुविधाएं।

लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग: माल के भंडारण, वितरण और परिवहन के लिए आधुनिक केंद्र।

ग्रीन एनर्जी: सौर ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक और ऊर्जा दक्षता से जुड़े कारोबार।

शहरी नियोजन और हॉस्पिटैलिटी: व्यावसायिक परिसरों, आधुनिक शहरी सुविधाओं और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़ी संभावनाएं।

इन क्षेत्रों में सिंगापुर की कंपनियों की भागीदारी से तकनीकी सहयोग और कारोबारी साझेदारी के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इन सभी उद्योगों का प्रस्तावित टाउनशिप में स्थापित होना अभी सुनिश्चित नहीं है। 

निवेश प्रस्तावों के बीच ₹775 करोड़ की परियोजना भी चर्चा में

सिंगापुर प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में निवेश से संबंधित कुछ ठोस कदम भी सामने आए। द टाइम्स ऑफ इंडिया की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में ₹775 करोड़ की यूनिवर्सल पैकेजिंग हब परियोजना के लिए ग्रेटर नासिक इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को पात्रता प्रमाणपत्र दिया गया। इस परियोजना के लिए 50 एकड़ भूमि से संबंधित जानकारी दी गई और करीब 1,880 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद जताई गई।

इसके अलावा, एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल के साथ खाद्य प्रसंस्करण तथा ब्लू प्लैनेट एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस के साथ कचरा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। रिपोर्ट में इन परियोजनाओं के तहत निवेश और रोजगार की संभावनाओं का भी उल्लेख है। 

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये परियोजनाएं और ‘सिंगापुर सिटी’ का प्रस्ताव अलग-अलग पहल हैं। पैकेजिंग हब के लिए पात्रता प्रमाणपत्र या अन्य कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन अपने आप में पूरी टाउनशिप की मंजूरी या निर्माण शुरू होने का प्रमाण नहीं है।

यूपी सरकार की निवेश रणनीति से कैसे जुड़ी है यह योजना?

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने और औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए नीतियों, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक क्षेत्रों तथा लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को प्रमुखता दे रही है।

मुख्यमंत्री ने सिंगापुर प्रतिनिधिमंडल के सामने बताया कि राज्य में औद्योगिक निवेश के लिए 75,000 एकड़ से अधिक भूमि का बैंक उपलब्ध है और 27 एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं और उत्पादन में बदलना है। 

फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री की सिंगापुर यात्रा के दौरान भी ‘सिंगापुर सिटी’ की अवधारणा पर चर्चा हुई थी। अक्टूबर की बैठक इसी निवेश संपर्क को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में सामने आई है। 

क्या इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के अवसर मिलेंगे?

यदि टाउनशिप विकसित होती है और वहां उद्योग स्थापित होते हैं, तो रोजगार के कई प्रकार के अवसर बन सकते हैं। इनमें तकनीकी कर्मचारियों, इंजीनियरों, डेटा सेंटर विशेषज्ञों, परिवहन कर्मियों, गोदाम प्रबंधन, निर्माण, सुरक्षा और अन्य सेवाओं से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं।

इसके साथ ही आसपास के छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना है। होटल, भोजनालय, वाहन सेवाएं, निर्माण सामग्री, मरम्मत और अन्य सहायक कारोबार औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।

लेकिन स्थानीय रोजगार की संख्या और उसकी प्रकृति इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-सी कंपनियां निवेश करती हैं, कितनी परियोजनाएं शुरू होती हैं और उनमें स्थानीय लोगों को काम देने के लिए क्या व्यवस्था होती है। अभी प्रस्तावित टाउनशिप के लिए रोजगार का कोई अंतिम आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

निर्माण कब शुरू होगा? इन सवालों के जवाब अभी बाकी

‘सिंगापुर सिटी’ की घोषणा के बाद सबसे अहम सवाल परियोजना के वास्तविक स्वरूप को लेकर है। अभी सार्वजनिक रिपोर्टों में इसके अंतिम मास्टर प्लान, क्षेत्रफल, निर्माण की निश्चित समयसीमा, कुल लागत और चरणबद्ध विकास का पूरा विवरण सामने नहीं आया है।

आगे बढ़ने के लिए भूमि और नियोजन से संबंधित निर्णय, संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरियां, निवेशकों की भागीदारी तथा बुनियादी सुविधाओं की योजना महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्रस्तावित टाउनशिप में कौन-से उद्योग और सुविधाएं होंगी और निर्माण किस चरण में शुरू होगा।

निष्कर्ष: जेवर के पास ‘सिंगापुर सिटी’ का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की एक संभावित पहल है। एयरपोर्ट और माल ढुलाई नेटवर्क से जुड़ाव इसे निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बना सकता है। मगर इसकी सफलता का आकलन तभी संभव होगा, जब प्रस्ताव ठोस योजना, स्वीकृत निवेश और जमीन पर शुरू होने वाली परियोजनाओं में बदलेगा।