अस्पताल में बच्ची की मौत के बाद हंगामा
लखनऊ में डेढ़ साल की बच्ची की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामला आईटी चौराहे के पास स्थित विवेकानंद अस्पताल का है। घटना के बाद परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच कराने की बात कही है। हालांकि, अभी तक जांच में चिकित्सा लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन ने परिवार के आरोपों को खारिज किया है।
सर्दी-जुकाम और बुखार के बाद बिगड़ी तबीयत
रिपोर्ट के मुताबिक, मड़ियांव के रहीमनगर डुडौली निवासी मुनेश यादव की डेढ़ साल की बेटी अविका को सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत थी। परिवार ने पहले कई जगह उसका इलाज कराया, लेकिन बच्ची को राहत नहीं मिली।
बाद में बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद रविवार को उसे विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के मुताबिक, भर्ती के समय बच्ची की तबीयत खराब थी और इलाज शुरू किया गया था।
ब्लड सैंपल लेने के बाद हालत बिगड़ने का आरोप
परिजनों के अनुसार, 26 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे बच्ची ने पानी मांगा था। इसके कुछ समय बाद नर्स ने उसका ब्लड सैंपल लिया।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद बच्ची की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ से बच्ची को तत्काल उपचार देने का अनुरोध किया, लेकिन उनके मुताबिक समय पर उचित उपचार नहीं मिला।
कुछ देर बाद बच्ची की मौत हो गई।
हालांकि, यह परिवार का आरोप है और ब्लड सैंपल लेने तथा बच्ची की हालत बिगड़ने के बीच सीधे चिकित्सकीय कारण की अभी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
पैसे मांगने और रसीद न देने का भी आरोप
परिवार ने इलाज के दौरान पैसे मांगने और भुगतान की रसीद नहीं देने का भी आरोप लगाया है। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से इलाज के दौरान किए गए उपचार और अंतिम समय की परिस्थितियों को लेकर जवाब मांगा।
परिवार ने अब स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की जांच केवल मौखिक बयानों तक सीमित न रहे, बल्कि इलाज के दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, दवाओं का रिकॉर्ड, डॉक्टरों की ड्यूटी का विवरण और CCTV फुटेज भी सुरक्षित कर उनकी जांच की जाए।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
बच्ची की मौत की सूचना के बाद परिजन अस्पताल में हंगामा करने लगे। स्थिति की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिवार को शांत कराया।
इसके बाद परिवार ने सीएमओ को लिखित शिकायत भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की। परिवार का कहना है कि अगर जांच में किसी डॉक्टर या अस्पताल कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अस्पताल ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी तरफ, विवेकानंद अस्पताल प्रशासन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है।
अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बच्ची को दूसरे निजी अस्पताल से रेफर करके लाया गया था और उसकी स्थिति पहले से ही गंभीर थी। अस्पताल का दावा है कि बच्ची की हालत में सुधार के बजाय लगातार गिरावट आई और चिकित्सकों ने उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों के अनुसार उसका उपचार किया।
अस्पताल प्रशासन ने परिवार की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
अब जांच से सामने आएगी सच्चाई
मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वास्थ्य विभाग की जांच की होगी। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने शिकायत मिलने के बाद जांच कराने की बात कही है। उनके अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की जा सकती है।
जांच में यह देखा जा सकता है कि बच्ची को अस्पताल में किस हालत में भर्ती कराया गया था, डॉक्टरों ने कौन-कौन से उपचार किए, कौन-सी जांच कराई गई, दवाएं कब दी गईं और बच्ची की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल की ओर से क्या चिकित्सकीय कदम उठाए गए।
इसके अलावा CCTV फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड भी घटना की परिस्थितियों को समझने में अहम हो सकते हैं।
आरोप और मेडिकल निष्कर्ष में फर्क जरूरी
बच्ची की मौत बेहद दुखद है, लेकिन इस समय इलाज में लापरवाही को स्थापित तथ्य के रूप में बताना उचित नहीं होगा। परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल ने उन्हें नकार दिया है।
ऐसे मामलों में चिकित्सा विशेषज्ञों की जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या बच्ची की गंभीर बीमारी के कारण उसकी स्थिति बिगड़ी।
फिलहाल परिवार निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, जबकि अस्पताल अपने इलाज को उचित बता रहा है।