उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक निजी अस्पताल में महिला की मौत के बाद हंगामा हो गया। मामला मड़ियांव क्षेत्र के हाईवे हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर का है, जहां रविवार, 1 नवंबर 2026 को 41 वर्षीय महिला ऊषा की इलाज के दौरान मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार का कहना है कि महिला की हालत सामान्य थी, लेकिन इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराया।
पैर में फ्रैक्चर के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सीतापुर जिले के मुंशीनगर निवासी गुड्डू की पत्नी ऊषा के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का 28 अक्टूबर को ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद वह अस्पताल में भर्ती थीं। परिजनों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य में सुधार के बाद उन्हें 1 नवंबर को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।
इंजेक्शन के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों का आरोप है कि रविवार सुबह महिला को ऑपरेशन वाले पैर में हल्का दर्द महसूस हुआ था। उन्होंने डॉक्टर को इसकी जानकारी दी। परिवार के मुताबिक, इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें इंजेक्शन दिया।
आरोप है कि इंजेक्शन दिए जाने के कुछ देर बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें गंभीर हालत में ICU में शिफ्ट किया गया और वेंटिलेटर पर रखने की भी बात सामने आई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
परिजनों का कहना है कि वे महिला को डिस्चार्ज कराने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक अस्पताल से उनकी मौत की सूचना मिली।
शव सौंपने में देरी का भी आरोप
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में नाराजगी जताई और हंगामा किया। बेटे मोहित ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने करीब दो घंटे तक शव परिवार को नहीं सौंपा।
हालांकि, अस्पताल संचालक ने इस आरोप को भी गलत बताया है। मामले की जानकारी मिलने पर मड़ियांव पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
अस्पताल संचालक डॉ. सुरभि ने परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि महिला को डिस्चार्ज किए जाने से पहले दिल का दौरा पड़ा था।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, महिला को बचाने के लिए ICU में भर्ती कर उपचार किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस तरह परिवार और अस्पताल प्रबंधन की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
CMO ने शिकायत मिलने पर जांच कराने की बात कही
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय पुलिस की ओर से उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ था।
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के इलाज संबंधी दस्तावेज, इंजेक्शन और दवाओं का विवरण तथा डॉक्टरों की भूमिका जांच के महत्वपूर्ण बिंदु होंगे। इन्हीं के आधार पर मौत की वास्तविक वजह और किसी संभावित चिकित्सकीय लापरवाही का पता लगाया जा सकेगा।
मौत की असली वजह जांच के बाद होगी स्पष्ट
इस घटना में सबसे अहम सवाल यह है कि महिला की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी और मौत का वास्तविक कारण क्या था। केवल इंजेक्शन दिए जाने के बाद मौत होने से यह साबित नहीं होता कि मौत इंजेक्शन के कारण ही हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि महिला की मौत हार्ट अटैक, किसी अन्य चिकित्सकीय जटिलता या किसी संभावित उपचार संबंधी चूक के कारण हुई।