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लखनऊ के शिवा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, श्रद्धा दुबे समेत तीनों आरोपी जेल भेजे गए

नागपुर से गिरफ्तारी के बाद लखनऊ में हुई घंटों पूछताछ; मोबाइल और दूसरे सामान फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए

लखनऊ के शिवा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, श्रद्धा दुबे समेत तीनों आरोपी जेल भेजे गए
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

लखनऊ के कारोबारी और कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब एक अहम चरण में पहुंच गई है। मुख्य आरोपी बताई जा रही श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को नागपुर से गिरफ्तार करने के बाद लखनऊ लाया गया। यहां हजरतगंज पुलिस ने तीनों से कई घंटे तक पूछताछ की और इसके बाद अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

नागपुर से हुई थी तीनों की गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, शिवा शर्मा की मौत के बाद श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और ड्राइवर फरार थे। यूपी STF, लखनऊ पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान तीनों को नागपुर के एक फ्लैट से गिरफ्तार किया गया। नागपुर की अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उन्हें सड़क मार्ग से लखनऊ लाया गया था।

शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में चौथी मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआत में घटना को दुर्घटना के तौर पर देखा गया था, लेकिन बाद में शिवा की मां की शिकायत के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और जांच का रुख बदल गया।

पुलिस ने पूछे करीब 120 सवाल

लखनऊ पहुंचने के बाद तीनों आरोपियों से हजरतगंज थाने में पूछताछ की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने करीब साढ़े छह घंटे तक पूछताछ की और श्रद्धा से लगभग 120 सवाल पूछे। जांच टीम का फोकस घटना से पहले की परिस्थितियों, 9 अक्टूबर की रात की घटनाओं और घटना के बाद तीनों के फरार होने से जुड़े सवालों पर बताया गया है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान तीनों किन-किन जगहों पर रहे और उन्हें किसने मदद पहुंचाई। अधिकारियों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की भूमिका फरार आरोपियों को छिपाने या मदद करने में सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

मोबाइल फोन जांच में अहम कड़ी

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन और अन्य सामान को सील किया है। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस आरोपियों से जुड़े दूसरे मोबाइल नंबरों की भी पहचान कर रही है, ताकि कॉल, लोकेशन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े सुरागों को जांच में शामिल किया जा सके।

डिजिटल जांच से यह पता लगाने की कोशिश हो सकती है कि घटना से पहले और उसके बाद आरोपियों की गतिविधियां क्या थीं और फरारी के दौरान उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

कोर्ट ने भेजा 10 दिन की न्यायिक हिरासत में

पूछताछ और मेडिकल जांच के बाद तीनों को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बलवंत कुमार भारती की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद तीनों को लखनऊ जिला जेल भेज दिया गया।

यानी मौजूदा स्थिति में तीनों आरोपी पुलिस की कस्टडी में नहीं, बल्कि न्यायिक हिरासत में हैं। आगे की जांच में पुलिस को आरोपियों से जुड़े डिजिटल और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण करना होगा तथा जरूरत पड़ने पर अदालत से आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ की अनुमति लेनी पड़ सकती है।

श्रद्धा दुबे का अपना पक्ष भी सामने आया

इस मामले में श्रद्धा दुबे पहले सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए अपना पक्ष रख चुकी हैं। उन्होंने शिवा की मौत में अपनी भूमिका से इनकार किया था और दावा किया था कि शिवा ने खुद बालकनी से छलांग लगाई। उन्होंने शिवा पर आर्थिक कर्ज से जुड़ी परेशानी का भी आरोप लगाया था।

दूसरी तरफ, शिवा के परिवार की ओर से हत्या का आरोप लगाया गया है। पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों के साथ-साथ CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा, फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को जोड़कर मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।

अब जांच का अगला फोकस क्या होगा?

पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि 9 अक्टूबर की रात वास्तव में क्या हुआ था। जांच में घटना से पहले आरोपियों और शिवा के बीच क्या हुआ, अपार्टमेंट में मौजूद लोगों की गतिविधियां क्या थीं, शिवा के चौथी मंजिल से गिरने की परिस्थितियां क्या थीं और घटना के बाद आरोपियों ने लखनऊ से बाहर जाने का फैसला क्यों किया—इन सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।

इसके अलावा, फरारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों और मददगारों की जानकारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस यह भी देख रही है कि नागपुर पहुंचने से पहले तीनों किन स्थानों पर गए थे।

मामला अभी जांच के दौर में

शिवा शर्मा केस में गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के बाद जांच जरूर तेज हुई है, लेकिन अदालत से दोष सिद्ध होने तक किसी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।

फिलहाल तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस की जांच का अगला बड़ा आधार डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, CCTV तथा आरोपियों के बयानों की आपसी पुष्टि होगा।