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लखनऊ में बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा: पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर जवान की हत्या का प्लान, 4 संदिग्ध गिरफ्तार

यूपी ATS ने पंजाब के तीन युवकों और एक नाबालिग को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े पाकिस्तानी हैंडलर 'राणा भाई' के निर्देश पर सेना या पुलिस के जवान की हत्या अथवा पुलिस प्रतिष्ठान पर हमला करने की तैयारी में थे। वारदात के बदले ₹3 लाख देने और वीडियो पाकिस्तान भेजने का वादा किए जाने की बात सामने आई है।

लखनऊ में बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा: पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर जवान की हत्या का प्लान, 4 संदिग्ध गिरफ्तार
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

यूपी ATS ने लखनऊ में साजिश का किया खुलासा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुरक्षा एजेंसियों ने एक कथित आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने 30 अक्टूबर 2026 को कार्रवाई करते हुए पंजाब के तीन युवकों और एक 17 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया।

ATS के अनुसार, आरोपियों का संपर्क पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर से था, जिसकी पहचान राणा भाई के रूप में बताई गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्हें लखनऊ में सेना या पुलिस के किसी जवान की हत्या करने अथवा पुलिस प्रतिष्ठान पर हमला करने का काम सौंपा गया था।

इस कथित साजिश का उद्देश्य वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजना और लोगों में डर पैदा करना था।

गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की पहचान
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार बताई गई है:
- गगनदीप सिंह (26 वर्ष): अमृतसर, पंजाब।
- रजत कुमार (19 वर्ष): अमृतसर, पंजाब।
- क्रिश (21 वर्ष): गुरदासपुर, पंजाब।
- एक नाबालिग: उम्र लगभग 17 वर्ष।
तीनों वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नाबालिग को किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के पास से एक विदेशी निर्मित पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं।

तीन लाख रुपये का लालच, हत्या का वीडियो भेजने की जिम्मेदारी
ATS की शुरुआती जांच के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलर ने आरोपियों को किसी सेना या पुलिसकर्मी को निशाना बनाने का निर्देश दिया था। इसके बदले उन्हें ₹3 लाख देने का वादा किया गया था।

आरोपियों को कथित तौर पर यह भी कहा गया था कि वारदात के दौरान वीडियो रिकॉर्ड करें और उसे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजें। जांच एजेंसी का मानना है कि इस वीडियो का इस्तेमाल लोगों में भय पैदा करने के लिए किया जाना था।

वारदात के बाद आरोपियों को नेपाल भागने का निर्देश दिए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।

27 अक्टूबर को पंजाब से निकले, 29 अक्टूबर की रात पहुंचे लखनऊ
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी 27 अक्टूबर 2026 को अमृतसर से निकले और दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात लगभग 12 बजे लखनऊ पहुंचे।

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलर ने उनके यात्रा खर्च के लिए ₹2,585 भेजे थे। लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर हैंडलर को भेजा। इसके बाद उन्हें रहने और अन्य खर्चों के लिए भी पैसे भेजे गए।

ATS का आरोप है कि लखनऊ पहुंचने पर एक स्थानीय संपर्क ने उन्हें पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराए। इस स्थानीय मददगार की तलाश जारी है।

मोबाइल फोन से मिले संदिग्ध चैट और संवेदनशील ठिकानों के वीडियो
ATS के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इनमें शामिल हैं:
- विदेशी नंबरों से की गई संदिग्ध बातचीत।
- इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए हैंडलर से संपर्क।
- वर्चुअल नंबरों से संचालित व्हाट्सऐप अकाउंट।
- संवेदनशील सरकारी और सुरक्षा प्रतिष्ठानों के वीडियो।
- कुछ स्थानों की लोकेशन और कथित रेकी से जुड़ी सामग्री।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने इन स्थानों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के साथ साझा की थी। अब यह पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने किन-किन जगहों की रेकी की और इस जानकारी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।

पाकिस्तान से हथियार आने का दावा, स्थानीय सप्लायर की तलाश
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि हैंडलर ने उन्हें हथियार पाकिस्तान से भेजे जाने की जानकारी दी थी। लखनऊ पहुंचने पर एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस उपलब्ध कराए।

हालांकि, हथियारों की वास्तविक उत्पत्ति और उनके भारत पहुंचने के रास्ते की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ATS अब स्थानीय सप्लायर, हथियारों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

शहजाद भट्टी नेटवर्क से संपर्क की जांच
ATS के अनुसार, आरोपी प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े पाकिस्तानी हैंडलर राणा भाई के संपर्क में थे। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा क्या आरोपियों को लखनऊ में किसी स्थानीय व्यक्ति से लगातार सहायता मिल रही थी।

जांच एजेंसियां आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्कों और पैसों के लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।

UAPA समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
इस मामले में लखनऊ के ATS थाने में FIR दर्ज की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और 61(2), आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 तथा UAPA की धारा 18 और 38 के तहत कार्रवाई की गई है।

ADG कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, ATS आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर उनसे पूछताछ करेगी। इसका उद्देश्य अन्य साथियों, स्थानीय मददगारों और हथियारों तथा वित्तीय सहायता के नेटवर्क का पता लगाना है।

आगे क्या होगा?
अब जांच के तीन प्रमुख पहलू होंगे—पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क की पूरी जानकारी, लखनऊ में हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की पहचान और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी में शामिल अन्य लोगों का पता लगाना।

आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही कथित साजिश के पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।