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लखनऊ में भर्ती परीक्षा पर लगा ब्रेक, 8,500 अभ्यर्थियों की मेहनत पर फिरा पानी; अब STF खंगालेगी गड़बड़ी की पूरी कहानी

SGPGI की नर्सिंग ऑफिसर और हॉस्पिटल अटेंडेंट ग्रेड-II भर्ती परीक्षा तकनीकी अव्यवस्था के बाद रद्द। बायोमेट्रिक सत्यापन में गड़बड़ी और बिना जांच प्रवेश देने के आरोपों की जांच शुरू।

लखनऊ में भर्ती परीक्षा पर लगा ब्रेक, 8,500 अभ्यर्थियों की मेहनत पर फिरा पानी; अब STF खंगालेगी गड़बड़ी की पूरी कहानी
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

लखनऊ में परीक्षा रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों को झटका
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) की भर्ती परीक्षा रद्द होने से करीब 8,500 अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। यह परीक्षा 1 नवंबर 2026 को नर्सिंग ऑफिसर और हॉस्पिटल अटेंडेंट ग्रेड-II पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की जानी थी। परीक्षा दूसरे चरण की थी और इसे ऑफलाइन माध्यम से सात केंद्रों पर कराया जा रहा था।

परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों पर तकनीकी समस्याएं और अव्यवस्था सामने आई। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने दूसरे चरण की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा, जो पहले चरण में सफल होने के बाद अगली प्रक्रिया में शामिल होने के लिए लखनऊ पहुंचे थे।

बायोमेट्रिक सत्यापन में देरी, तीन केंद्रों पर उठे सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, गोमतीनगर के छोटा भरवारा स्थित तीन परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन में परेशानी आई। इन केंद्रों में SDSN डिग्री कॉलेज, SDSN पब्लिक स्कूल और जूरिस कॉलेज ऑफ लॉ शामिल हैं।

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को कथित तौर पर बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा था। वहीं, प्रवेश में देरी और परीक्षा समय पर शुरू न होने को लेकर भी नाराजगी सामने आई। कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में धांधली की आशंका जताई।

शुरुआत में तीन केंद्रों पर परीक्षा रोकने की कार्रवाई हुई, लेकिन बाद में संस्थान ने सभी केंद्रों की दोनों पालियों की परीक्षा निरस्त कर दी। हालांकि, बिना बायोमेट्रिक जांच प्रवेश देने के आरोपों की पुष्टि अभी जांच के अधीन है।

STF जांच में तकनीकी गड़बड़ी और साइबर हमले की आशंका
मामले की गंभीरता को देखते हुए SGPGI प्रशासन ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) से जांच में मदद मांगी है। STF अब परीक्षा में आई तकनीकी बाधाओं, बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली और परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में तकनीकी गड़बड़ी के साथ-साथ संभावित साइबर हमले के पहलू को भी देखा जा रहा है। परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में अभ्यर्थियों को पैसे लेकर पास कराने के कथित नेटवर्क और सर्वर में जानबूझकर बाधा डालने की आशंका जताई गई है। लेकिन इन दावों को अभी साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि परीक्षा में व्यवधान के पीछे तकनीकी लापरवाही थी या कोई सुनियोजित साजिश।

एक महीने के भीतर दोबारा परीक्षा कराने का आश्वासन
संस्थान के निदेशक डॉ. आर.के. धीमान ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संस्थान ने लगभग एक महीने के भीतर दोबारा परीक्षा कराने का आश्वासन दिया है।

नई परीक्षा की तारीख घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों को इसकी जानकारी दी जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे SGPGI की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली अधिसूचनाओं पर नजर रखें।

अभ्यर्थियों के सामने अब क्या चुनौतियां?
परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों को केवल परीक्षा की तारीख बदलने की परेशानी नहीं हुई है। कई उम्मीदवार दूसरे शहरों और राज्यों से लखनऊ पहुंचे थे। ऐसे अभ्यर्थियों को यात्रा, ठहरने और अन्य खर्चों का नुकसान उठाना पड़ा।

अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोबारा परीक्षा कब होगी और इस बार संस्थान किस तरह की व्यवस्था करेगा, ताकि बायोमेट्रिक सत्यापन और परीक्षा संचालन में ऐसी समस्या दोबारा न आए।

इस मामले में STF की जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे न केवल परीक्षा रद्द होने के कारणों का पता चलेगा, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने में भी मदद मिल सकती है।