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लखनऊ में BJP-कांग्रेस की सियासी हलचल तेज, MLC नतीजों के बीच 2027 की चुनावी बिसात पर बढ़ी नजर

MLC Counting ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी, सीट शेयरिंग और विपक्षी एकता के सवालों के बीच BJP पर हमले तेज

लखनऊ में BJP-कांग्रेस की सियासी हलचल तेज, MLC नतीजों के बीच 2027 की चुनावी बिसात पर बढ़ी नजर
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 27 अक्टूबर 2026 को विधान परिषद चुनाव की मतगणना के साथ ही सियासी हलचल और तेज हो गई है। प्रदेश की 11 MLC सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था और मंगलवार सुबह से लखनऊ समेत सात केंद्रों पर मतगणना शुरू हुई। इन नतीजों को सिर्फ विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले BJP और विपक्ष की चुनावी क्षमता का शुरुआती संकेत भी माना जा रहा है।

लखनऊ में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल पर चल रही है। यहां दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 14-14 टेबल पर वोटों की गिनती की जा रही है।

MLC चुनाव क्यों बन गया 2027 का राजनीतिक टेस्ट?

उत्तर प्रदेश में इस बार 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर मुकाबला हुआ है। BJP और समाजवादी पार्टी प्रमुख दावेदारों में हैं और कई सीटों पर बागी तथा निर्दलीय उम्मीदवारों ने मुकाबले को और पेचीदा बनाया है। चुनाव के दौरान आरोप-प्रत्यारोप और संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन भी देखने को मिला।

विश्लेषकों के मुताबिक BJP के लिए अच्छा प्रदर्शन यह संदेश देने का मौका होगा कि उसकी चुनावी मशीनरी और संगठनात्मक पकड़ 2024 लोकसभा चुनाव के झटके के बाद भी मजबूत है। वहीं विपक्ष के लिए बेहतर नतीजे 2027 से पहले BJP के खिलाफ अपने आधार को मजबूत दिखाने का अवसर बन सकते हैं।

कांग्रेस-SP के बीच सीट बंटवारे ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

MLC चुनाव के समानांतर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग भी राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी ने SP के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत शुरू कर दी है और कांग्रेस अपने संगठनात्मक आधार तथा पिछले चुनावी प्रदर्शन के आधार पर सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है। कांग्रेस ने कुछ सीटों को लेकर अपनी प्राथमिकताएं भी सामने रखी हैं।

2024 लोकसभा चुनाव में SP ने उत्तर प्रदेश की 37 सीटें, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। दोनों दलों का INDIA गठबंधन कुल 43 सीटों पर सफल रहा था। अब कांग्रेस इसी प्रदर्शन को 2027 विधानसभा चुनाव में अपनी bargaining position मजबूत करने के लिए आधार बना रही है।

‘200 सीट’ वाले पोस्टर से गरमाई राजधानी की राजनीति

इसी बीच लखनऊ और प्रदेश के कुछ हिस्सों में ऐसे होर्डिंग सामने आने से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ जिनमें कांग्रेस के लिए 200 विधानसभा सीटों पर दावा किए जाने का संदेश दिया गया था।

BJP नेताओं ने इस दावे पर कांग्रेस-SP गठबंधन पर तंज कसा। दूसरी तरफ SP और कांग्रेस नेताओं ने इन पोस्टरों को गठबंधन में दरार पैदा करने की कोशिश बताया। SP अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि BJP INDIA गठबंधन की एकता से परेशान है और कथित फर्जी पोस्टरों के जरिए भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी BJP पर इस अभियान के पीछे होने का आरोप लगाया।

हालांकि, इन पोस्टरों के पीछे वास्तव में कौन था, इसका स्वतंत्र रूप से निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए BJP की भूमिका को राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

BJP भी विपक्षी रणनीति पर हमलावर

दूसरी ओर BJP नेताओं ने कांग्रेस-SP के बीच संभावित सीट बंटवारे और विपक्षी एकता को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। MLC चुनाव के दौरान भी BJP और SP खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।

मतदान के दौरान SP ने BJP और प्रशासन पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। BJP नेताओं ने इसके जवाब में SP उम्मीदवारों की पात्रता और मतदान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इन आरोपों की अलग-अलग स्तर पर जांच और चुनावी प्रक्रिया के तहत समीक्षा की जा रही है।

यही वजह है कि MLC की मतगणना के दौरान आने वाला हर राजनीतिक संकेत 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

MLC नतीजों से किसे मिलेगा मनोवैज्ञानिक फायदा?

इस चुनाव में BJP के लिए सिर्फ सीट जीतना ही महत्वपूर्ण नहीं है। पार्टी यह भी देखेगी कि कितने क्षेत्रों में उसका संगठन उम्मीदवारों के पीछे मजबूती से खड़ा रहा और बागी उम्मीदवारों का कितना प्रभाव पड़ा।

वहीं SP के लिए मजबूत प्रदर्शन यह संदेश दे सकता है कि विपक्षी वोट बैंक और स्थानीय संगठन BJP को चुनौती देने की स्थिति में हैं।

कांग्रेस के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। पार्टी के पास विधानसभा में फिलहाल सीमित संख्या में विधायक हैं, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में छह सीटें जीतने के बाद वह उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन फिर मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

असली लड़ाई अब 2027 की

MLC चुनाव का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों पर अगले साल चुनाव होना है। अभी से BJP, SP और कांग्रेस अपने-अपने संगठन, उम्मीदवारों और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं।

BJP के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष के सामने एकजुटता, सीट बंटवारा और वोट ट्रांसफर सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

कांग्रेस-SP के बीच अगर सीट शेयरिंग सफलतापूर्वक होती है तो विपक्षी रणनीति को नया आकार मिल सकता है। लेकिन सीटों को लेकर ज्यादा खींचतान गठबंधन की एकता पर असर डाल सकती है। इसी वजह से लखनऊ में होने वाली हर राजनीतिक बयानबाजी अब सिर्फ तत्कालीन विवाद नहीं, बल्कि 2027 की बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

अभी तस्वीर साफ नहीं, लेकिन संकेत महत्वपूर्ण

MLC चुनाव की मतगणना अभी जारी है और अंतिम परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस दल को कितनी सफलता मिली। शुरुआती बढ़त को अंतिम जीत मानना सही नहीं होगा, खासकर इसलिए क्योंकि इन चुनावों में प्राथमिकता क्रम और वोट ट्रांसफर वाली गणना प्रणाली लागू होती है।

लेकिन राजनीतिक तौर पर इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनावी माहौल समय से पहले गर्म हो चुका है। लखनऊ में BJP-कांग्रेस-SP की बयानबाजी, गठबंधन की चर्चाएं और MLC नतीजों पर नजर—तीनों मिलकर आने वाले महीनों की राजनीतिक दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं।