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लखनऊ में सेना-पुलिस को निशाना बनाने की कथित साजिश बेनकाब, पंजाब के 3 युवक गिरफ्तार; नाबालिग भी हिरासत में

यूपी ATS का दावा—पाकिस्तान से जुड़े शहजाद भट्टी नेटवर्क के हैंडलर ‘राना भाई’ के निर्देश पर पहुंचे थे चारों आरोपी। जवान की हत्या का वीडियो भेजने पर ₹3 लाख देने का कथित वादा, विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद।

लखनऊ में सेना-पुलिस को निशाना बनाने की कथित साजिश बेनकाब, पंजाब के 3 युवक गिरफ्तार; नाबालिग भी हिरासत में
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सेना या पुलिस के जवान को निशाना बनाने की कथित साजिश का यूपी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने खुलासा किया है। इस मामले में पंजाब के तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक 17 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। ATS के मुताबिक, चारों आरोपी पाकिस्तान में बैठे एक कथित हैंडलर के संपर्क में थे और उसके निर्देश पर लखनऊ में वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे।

जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों को किसी सेना या पुलिसकर्मी की हत्या करने, घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजने और इसके बदले 3 लाख रुपये पाने का लालच दिया गया था। आरोपियों के पास से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

कौन हैं गिरफ्तार किए गए आरोपी?
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीन वयस्क आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- गगनदीप सिंह (26 वर्ष) – अमृतसर, पंजाब
- रजत कुमार (19 वर्ष) – अमृतसर, पंजाब
- क्रिश (21 वर्ष) – गुरदासपुर, पंजाब
- एक 17 वर्षीय नाबालिग – पहचान कानूनी कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई है।
ATS ने चारों को लखनऊ में कार्रवाई के दौरान पकड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, तीनों वयस्कों को गिरफ्तार किया गया, जबकि नाबालिग को हिरासत में लिया गया है।

पाकिस्तानी हैंडलर ‘राना भाई’ से संपर्क का आरोप
ATS की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े ‘राना भाई’ नामक हैंडलर के संपर्क में थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने उससे Instagram और WhatsApp के जरिए बातचीत की थी।

ATS का आरोप है कि हैंडलर ने उन्हें लखनऊ में किसी सेना या पुलिसकर्मी को निशाना बनाने का निर्देश दिया था। वारदात को रिकॉर्ड करके उसका वीडियो भेजने के लिए भी कहा गया था। जांच एजेंसी इस कथित नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका और आरोपियों के स्थानीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी है।

₹3 लाख का कथित लालच, नेपाल भागने की थी योजना
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों को वारदात पूरी करने के बाद 3 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। इसके अलावा, लखनऊ पहुंचने और ठहरने के खर्च के लिए भी कथित तौर पर पैसे भेजे गए थे।

आरोप है कि घटना के बाद आरोपियों को नेपाल भागने और वहां छिपने के निर्देश दिए गए थे, ताकि गिरफ्तारी से बच सकें। ATS के अनुसार, आरोपियों ने 27 अक्टूबर को अमृतसर से यात्रा शुरू की, दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात लखनऊ पहुंचे।

लखनऊ रेलवे स्टेशन का वीडियो भी भेजने का दावा
ATS की जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर कथित हैंडलर को भेजा था।

जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों के मोबाइल फोन से संदिग्ध चैट, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से जुड़ी सामग्री मिली है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने किन-किन स्थानों की जानकारी जुटाई और उसे किस तरह विदेश में बैठे संपर्कों तक पहुंचाया।

विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद
ATS के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से एक विदेशी निर्मित पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि हथियार उन्हें लखनऊ में नेटवर्क से जुड़े एक स्थानीय व्यक्ति ने उपलब्ध कराए थे।

जांच एजेंसी अब उस स्थानीय संपर्क की पहचान करने, हथियारों की आपूर्ति के स्रोत का पता लगाने और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच करने में जुटी है। इस मामले में केवल गिरफ्तार युवकों तक जांच सीमित नहीं है; ATS नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में लखनऊ स्थित ATS थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और 61(2), आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 और 38 के तहत कार्रवाई की गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ATS पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर उनसे पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि कथित साजिश, स्थानीय मददगारों, हथियारों की सप्लाई और फंडिंग से जुड़ी कड़ियों का पता लगाया जा सके।

आगे जांच में क्या पता लगाया जाएगा?
इस मामले में जांच के मुख्य बिंदु हैं:
1. कथित पाकिस्तानी हैंडलर और गिरफ्तार आरोपियों के बीच संपर्क की वास्तविक प्रकृति।
2. लखनऊ में हथियार उपलब्ध कराने वाले स्थानीय व्यक्ति की पहचान।
3. संवेदनशील प्रतिष्ठानों की कथित रेकी और साझा किए गए वीडियो का उद्देश्य।
4. आरोपियों को भेजी गई रकम और उसके स्रोत का पता लगाना।
5. क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या किसी दूसरी वारदात की योजना बनाई जा रही थी।
जांच पूरी होने के बाद ही कथित साजिश के पूरे नेटवर्क और उसकी वास्तविक सीमा की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।