उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी कर्मी की कथित टारगेट किलिंग की साजिश का खुलासा किया है। ATS के मुताबिक, इस मामले में पाकिस्तान से संचालित प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े हैंडलर के निर्देश पर पंजाब के कुछ युवक लखनऊ पहुंचे थे। कार्रवाई में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक नाबालिग को पुलिस निगरानी में लिया गया।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
मीडिया रिपोर्टों और पुलिस अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार युवकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- गगनदीप सिंह (26) — अमृतसर, पंजाब
- रजत कुमार (19) — अमृतसर, पंजाब
- क्रिश (21) — गुरदासपुर, पंजाब
इनके साथ पंजाब के एक 17 वर्षीय नाबालिग को भी पकड़ा गया। नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
पाकिस्तानी हैंडलर 'राना भाई' पर आरोप
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश के अनुसार, शुरुआती जांच में आरोपियों के पाकिस्तान में बैठे हैंडलर 'राना भाई' के संपर्क में होने की बात सामने आई है। अधिकारियों का दावा है कि हैंडलर ने उन्हें लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सेना के जवान को निशाना बनाने का निर्देश दिया था।
ATS के मुताबिक, कथित योजना केवल हमला करने तक सीमित नहीं थी। आरोपियों को घटना का वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजना था, ताकि घटना के जरिए लोगों में भय पैदा किया जा सके।
तीन लाख रुपये का कथित लालच
जांच एजेंसी के दावे के मुताबिक, आरोपियों को टारगेट किलिंग को अंजाम देने के बदले तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपियों को यात्रा खर्च के लिए ऑनलाइन पैसे भेजे गए थे। कथित वारदात के बाद नेपाल के रास्ते भागने की योजना भी जांच में सामने आई है।
लखनऊ में रेकी और हथियार बरामदगी
ATS के अनुसार, आरोपियों ने लखनऊ पहुंचने के बाद रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर हैंडलर को भेजा था। उनके मोबाइल फोन से कुछ संदिग्ध चैट और वीडियो मिलने की बात भी कही गई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उन्होंने किन अन्य संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी और उनकी जानकारी किसे भेजी गई।
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हथियार उन्हें लखनऊ में एक स्थानीय संपर्क के जरिए मिलने का आरोप है। उस संपर्क और हथियारों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया और डिजिटल संपर्कों की जांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर Instagram और WhatsApp के माध्यम से हैंडलर के संपर्क में थे। उनके मोबाइल फोन और डिजिटल बातचीत की जांच की जा रही है। ATS यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित साजिश में अन्य स्थानीय सहयोगी, वित्तीय मददगार या हथियार सप्लाई करने वाले लोग शामिल थे या नहीं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
ADG अमिताभ यश के मुताबिक, ATS आरोपियों से आगे पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में थी। जांच के प्रमुख बिंदु हैं:
- पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर और उसके नेटवर्क की पहचान।
- लखनऊ में रेकी किए गए स्थानों की जानकारी।
- हथियार और कारतूस उपलब्ध कराने वाले संपर्कों का पता लगाना।
- आरोपियों को मिली रकम और उसके स्रोत की जांच।
- इस कथित साजिश में अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल।
मामले में जांच जारी है। फिलहाल एजेंसी की ओर से सामने रखे गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष और अदालत में साबित होने वाले तथ्यों से अलग समझना जरूरी है।