मणिपुर में जातीय तनाव के बीच दो लापता कुकी युवकों के शव मिलने से हालात फिर बिगड़ गए हैं। 1 नवंबर 2026 को सुरक्षा बलों ने सेनापति जिले के एक पहाड़ी इलाके में तलाशी अभियान के दौरान दोनों युवकों के शव बरामद किए। दोनों युवक 28 अक्टूबर से लापता थे और उनकी तलाश में पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बल अभियान चला रहे थे।
शव मिलने की खबर फैलते ही पड़ोसी कांगपोकपी जिले में आक्रोश फैल गया। लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। कई जगह टायर जलाए गए और रास्तों को लकड़ियों तथा पत्थरों से अवरुद्ध किया गया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
कौन थे मृतक युवक?
मृतकों की पहचान पाओगिनलाल हैंगशिंग (20) और टिंगिनलुन चोंगलोई (20/21) के रूप में हुई है। दोनों कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव के निवासी थे। वे 28 अक्टूबर को लापता हुए थे।
पुलिस, CRPF और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों ने उनकी तलाश में कांगपोकपी और सेनापति के सीमावर्ती इलाकों में अभियान चलाया। बाद में मणिपुर पुलिस, CoBRA, CRPF, असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स की संयुक्त टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के पूर्वी हिस्से में सेनापति-फाइबुंग रोड के आसपास तलाशी ली। इसी दौरान दोनों शव बरामद किए गए।
केले के खेत में बोरे के अंदर मिले शव
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों युवकों के क्षत-विक्षत शव एक केले के खेत में बोरे के अंदर मिले। शवों की बरामदगी के बाद उन्हें कांगपोकपी लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए।
कुकी संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि युवकों का अपहरण कर हत्या की गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसके लिए नागा उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हत्यारों की पहचान या किसी संगठन की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
कांगपोकपी में प्रदर्शन, सुरक्षा बलों से टकराव
शव मिलने के बाद कांगपोकपी में प्रदर्शन तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें बंद कीं और कई स्थानों पर टायर जलाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।
PTI के मुताबिक, इस दौरान एक प्रदर्शनकारी के सिर में चोट आई। अधिकारियों ने बताया कि उसकी हालत स्थिर है। सोमवार सुबह भी जिले में तनाव बना हुआ था और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। कुछ अवरुद्ध सड़कों को पुलिस ने खुलवा दिया।
कुकी संगठन की मांगें, शव लेने से इनकार
कांगपोकपी स्थित Committee on Tribal Unity (CoTU) ने घटना के विरोध में बंद का आह्वान किया था। संगठन ने आरोपियों की गिरफ्तारी तक दोनों युवकों के शव अंतिम संस्कार के लिए स्वीकार नहीं करने की बात कही।
संगठन ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और ताफू कुकी गांव को सेनापति पुलिस के अधिकार क्षेत्र से हटाकर कांगपोकपी पुलिस के अधीन करने जैसी मांगें भी रखी हैं। ये संगठन की मांगें हैं; इन पर सरकार का अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं है।
नागा संगठन ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की
दूसरी ओर, Naga Peoples’ Organisation (NPO) ने शव बरामद होने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने किसी भी हत्या की निंदा करते हुए कहा कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सबूतों से छेड़छाड़ या समुदायों के बीच तनाव भड़काने की आशंका दूर हो सके।
इससे साफ है कि घटना को लेकर दोनों समुदायों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए तथ्यों को स्पष्ट करना और अफवाहों को रोकना बेहद जरूरी है।
इससे पहले तीन कुकी लोगों की भी हुई थी मौत
दो युवकों के शव मिलने से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को मणिपुर के नोनी जिले में अज्ञात हथियारबंद लोगों के बीच गोलीबारी में कुकी समुदाय के तीन लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं ने राज्य में पहले से जारी अस्थिरता को और गंभीर बना दिया है।
मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुए बड़े जातीय संघर्ष में अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। वहीं, वर्ष 2026 में कुकी और नागा समुदायों के बीच भी अलग से तनाव और हिंसक घटनाएं सामने आई हैं।
सरकार और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
फिलहाल सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि तलाशी और कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी रहेंगे तथा हत्यारों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।
जांच के साथ-साथ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शव मिलने की घटना को लेकर फैल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसी नई सामुदायिक हिंसा को रोका जाए। दोनों समुदायों के संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।