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मेरठ में 16,726 अवैध भवन सील होंगे, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

जोन ए की सर्वे रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बाकी तीन जोन की रिपोर्ट न देने पर मेडा सचिव को फटकार लगाई

मेरठ में अवैध निर्माण पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करते अधिकारी
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

मेरठ में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट तक सीमित रही सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब पूरे शहर में फैल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोन ए में मिले 16,726 अवैध भवनों को सील करने का आदेश दिया।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि निर्माण चाहे 25 साल पुराना हो या 50 साल पुराना, वह अवैध ही रहेगा।

बेगमपुल, ब्रह्मपुरी समेत कई इलाके शामिल

मेरठ विकास प्राधिकरण यानी मेडा ने सुनवाई में जोन ए की सर्वे रिपोर्ट पेश की। इसमें बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा और तारापुरी जैसे इलाकों के 16,726 भवन अनाधिकृत बताए गए। खंडपीठ ने इन सभी भवनों को सील करने का आदेश दे दिया।

बाकी तीन जोन बी, सी और डी की रिपोर्ट अदालत में दाखिल नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने मेडा सचिव अर्पित गुप्ता पर नाराजगी जताई। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी, तब तक अनुपालन आख्या दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

44 सील भवनों पर भी सख्ती

आवास एवं विकास परिषद के अधिवक्ता ने 44 सील भवनों की अनुपालन आख्या भी कोर्ट में दाखिल की। इनमें छह भवन बिना नक्शे के बने थे, जिन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है। बाकी 38 संपत्तियां आवासीय स्वीकृति के बावजूद व्यावसायिक इस्तेमाल में पाई गईं।

इन 44 में से 24 का अवैध निर्माण आवंटियों ने खुद हटा दिया है, जबकि 20 में काम चल रहा है। कोर्ट ने सभी 44 सील भवनों को ध्वस्त करके नए सिरे से रिपोर्ट पेश करने को कहा। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना का पक्ष अधिवक्ता तुषार जैन ने रखा, वहीं सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सरकारी वकील नवीन पाहवा पेश हुए।

सेटबैक में भी 201 संपत्तियां अवैध

परिषद की रिपोर्ट के अनुसार 201 संपत्तियों में सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण पाया गया। इनमें से 63 पर अवैध हिस्सा हटाया जा चुका है, बाकी 138 पर कार्रवाई जारी है।

खंडपीठ ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहर नियोजन, चेयरमैन आवास एवं विकास परिषद तथा प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद को निगरानी के स्पष्ट निर्देश दिए। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के लिए सरकार से पुनर्वास नीति बनाने को भी कहा गया।

याचिकाकर्ता को सुरक्षा, धमकी की शिकायत

अधिवक्ता तुषार जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता लोकेश खुराना को लगातार धमकियां मिल रही हैं और उनकी जान को खतरा है। कोर्ट ने उन्हें पुलिस स्टेशन जाने की सलाह दी और कहा कि खतरा होने पर शहर छोड़ सकते हैं।

इस पर छोटे व्यवसाय की दलील दी गई, जिसके बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार को खुराना की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने 14 जुलाई को दिए गए पिछले आदेश का पालन कराने का निर्देश भी दोहराया। व्यापारियों के अधिवक्ता सूरत सिंह की पक्ष रखने की गुहार कोर्ट ने खारिज कर दी।

उल्देपुर की अवैध कॉलोनियां भी संज्ञान में

सुनवाई के दौरान मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में विकसित अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी उठा। उल्देपुर, रजपुरा विकासखंड में रुड़की रोड पर थर्ड माइलस्टोन से लावड़ जाने वाले मार्ग पर स्थित है।

याचिकाकर्ता पक्ष ने बताया कि वहां बिना नक्शा पास कराए बड़ी संख्या में अवैध प्लॉटिंग और सड़कें बनाई गई हैं, जमीन निजी है। कोर्ट ने पूछा कि यह कब से चल रहा है, जवाब मिला करीब पांच साल से। कोर्ट ने अधिकारियों से सवाल किया कि इतने वर्षों में क्या कार्रवाई हुई, और कहा कि यह मामला मेडा की सूची में शामिल ही नहीं था। खंडपीठ ने मेडा को उल्देपुर की सभी अवैध कॉलोनियां सख्ती से ध्वस्त करने का आदेश दिया।

उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने कहा कि अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी, जिसमें सभी जोन की रिपोर्ट पेश करनी होगी।