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कानपुर-लखनऊ-अयोध्या नमो भारत कॉरिडोर का सर्वे तेज

रैपिड रेल से कानपुर से अयोध्या धाम तक की दूरी महज 90 मिनट में पूरी होगी

नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर के निर्माण कार्य का दृश्य
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश में कानपुर-लखनऊ-अयोध्या नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर का काम रफ्तार पकड़ रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार इस रूट को दो चरणों में बनाने जा रही है।

पहले चरण में कानपुर से लखनऊ के बीच 72 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस कॉरिडोर का सर्वे कार्य तेजी से चल रहा है। जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी।

दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर बनेगा एससीआर

यह रैपिड रेल उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र यानी एससीआर के तहत बनाई जा रही है, जिसे दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी और हरदोई समेत छह जिले शामिल किए गए हैं।

कानपुर-लखनऊ रूट का प्रस्तावित रास्ता

67 किलोमीटर लंबा यह रूट कानपुर के नयागंज से शुरू होकर गंगा बैराज, मगरवारा, उन्नाव, अजगैन, जैतीपुर, बंथरा और नवाबगंज होते हुए लखनऊ के अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट तक जाएगा। यह कॉरिडोर लखनऊ मेट्रो के अमौसी स्टेशन और कानपुर मेट्रो के नयागंज नेटवर्क से भी जुड़ेगा।

इससे रैपिड रेल से आने वाले यात्री कानपुर में नौबस्ता तक फैले मेट्रो नेटवर्क का लाभ उठा सकेंगे। लखनऊ में वसंतकुंज और मुंशी पुलिया जैसे आखिरी मेट्रो स्टेशनों तक भी सीधी पहुंच मिलेगी।

दूसरे चरण में अयोध्या तक विस्तार

अमौसी, लखनऊ से अयोध्या तक प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर करीब 120 किलोमीटर का होगा। यह सुशांत गोल्फ सिटी, जुग्गौर, बरेल, सफदरगंज और भिटरिया से गुजरते हुए सीधे राम मंदिर, अयोध्या धाम तक पहुंचेगा।

इस विस्तार के पूरा होने पर कानपुर से अयोध्या धाम की दूरी सिर्फ 90 मिनट में तय की जा सकेगी। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने लखनऊ-कानपुर नमो भारत कॉरिडोर को अयोध्या तक बढ़ाने के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु ₹13.5 करोड़ की मंजूरी दी है, जबकि इससे पहले कानपुर-लखनऊ परियोजना के लिए ₹6.03 करोड़ स्वीकृत किए गए थे।

कुल रूट की लंबाई को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में इसे करीब 187 किलोमीटर बताया गया है, जबकि एक रिपोर्ट में लखनऊ-बाराबंकी-अयोध्या खंड को लगभग 150 किलोमीटर लंबा बताया गया है, जिसके लिए एलाइनमेंट, एएआर और डीपीआर का काम चल रहा है।

आगे की राह

सरकार ने इस परियोजना को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। पहले चरण की डीपीआर फाइनल होने के बाद ही दूसरे चरण में लखनऊ-अयोध्या रूट पर आगे का काम शुरू किया जाएगा।