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NCDRC का आदेश: 14 साल बाद सनवर्ल्ड को खरीदारों का पैसा लौटाना होगा

यमुना सिटी के सेक्टर 22D प्रोजेक्ट में फंसे खरीदारों को ब्याज सहित पूरी रकम दो महीने में वापस करने का निर्देश

यमुना सिटी सेक्टर 22D में अधूरा पड़ा आवासीय प्रोजेक्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (NCDRC) ने सनवर्ल्ड वंदिता ग्रुप को यमुना एक्सप्रेसवे स्थित यमुना सिटी के सेक्टर 22D प्रोजेक्ट के खरीदारों का पैसा लौटाने का आदेश दिया है। ये खरीदार अपने फ्लैट के लिए 14 साल से इंतजार कर रहे थे।

31 अगस्त के आदेश के अनुसार बिल्डर को दो महीने के भीतर सभी खरीदारों की पूरी जमा राशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटानी होगी। अगर भुगतान में देरी हुई तो ब्याज दर बढ़कर 15 प्रतिशत सालाना हो जाएगी।

आयोग ने बिल्डर को हर खरीदार को ₹25,000 मुकदमा खर्च देने का भी निर्देश दिया है।

बिल्डर की दलील खारिज

बिल्डर ने देरी के लिए किसानों की याचिकाओं और मुकदमेबाजी को जिम्मेदार ठहराया था। सेवानिवृत्त एवीएम जे. राजेंद्र और जस्टिस सरोज यादव की पीठ ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा, "प्रोजेक्ट का विज्ञापन करने और खरीदारों से पैसा लेने के बाद जरूरी मंजूरियां व अनुपालन सुनिश्चित करना बिल्डर की जिम्मेदारी थी।"

सनवर्ल्ड सिटी प्रोजेक्ट के प्रमोटर संजीव गुप्ता ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, "हमने खरीदारों को मूल राशि पहले ही दे दी है। NCDRC के आदेश का पालन करते हुए अब हम ब्याज की रकम देने की प्रक्रिया में हैं।"

14 साल पुराना मामला

2011 में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने सनवर्ल्ड वंदिता ग्रुप को सेक्टर-22D में जमीन आवंटित की थी। 2012 में बिल्डर ने बुकिंग शुरू की और करीब 1,400 खरीदारों ने पैसा लगाया।

2013 तक खरीदारों ने फ्लैट की कीमत का 20 से 80 प्रतिशत हिस्सा जमा कर दिया था और बिल्डर-खरीदार समझौतों पर हस्ताक्षर हो चुके थे। फ्लैट मूल रूप से 2017 के आसपास सौंपे जाने थे।

जब कुछ खरीदारों ने 2017 में साइट का निरीक्षण किया तो वहां कोई निर्माण कार्य नहीं दिखा। इसके बाद 2018 में खरीदार NCDRC पहुंचे।

शुरुआत में 91 खरीदारों ने बिल्डर के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, बाद में 27 खरीदारों ने अपने नाम वापस ले लिए। मामला कुल 64 खरीदारों की याचिका पर आगे बढ़ा।

खरीदारों ने 24 प्रतिशत ब्याज के साथ पूरी रकम वापसी, मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹2 लाख मुआवजा और ₹5 लाख मुकदमा खर्च की मांग की थी।