ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर अब भीषण प्राकृतिक आपदा के रूप में सामने आ रहा है। लगातार भारी बारिश के कारण दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई गांव पानी में डूब गए हैं, सड़कें टूट गई हैं और पहाड़ी इलाकों में मलबा गिरने से आवागमन बाधित है।
इस आपदा के बीच सबसे दर्दनाक खबर कंधमाल जिले से आई है, जहां भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक दंपती और उनका महज 9 महीने का बच्चा शामिल है। राज्य सरकार ने बचाव और राहत कार्यों को तेज कर दिया है।
कंधमाल में पहाड़ी मलबे ने उजाड़ दिया परिवार
यह दर्दनाक घटना कंधमाल जिले के रायिकिया ब्लॉक के डांगेसी गांव में हुई। शुक्रवार सुबह भारी बारिश के बीच पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर नीचे स्थित मकान पर गिर गया।
मलबे में दबने से 30 वर्षीय अच्युत प्रधान, उनकी 25 वर्षीय पत्नी अनीशा प्रधान और उनके 9 महीने के बेटे की मौत हो गई।
हादसे की सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने मलबे से दो अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रशासन ने प्रभावित इलाके में राहत और बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय स्तर पर कुछ अन्य ग्रामीणों के लापता होने की आशंका भी जताई गई, हालांकि उनकी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवार को ₹4 लाख मुआवजे की घोषणा की
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हादसे में तीन लोगों की मौत पर दुख जताया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को प्रत्येक के लिए 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण भी किया और अधिकारियों को राहत, बचाव तथा पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
गंजाम, गजपति और कंधमाल में सबसे ज्यादा असर
चक्रवात के बाद लगातार बारिश ने दक्षिणी ओडिशा के तीन जिलों में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है।
- गंजाम: लगभग 50 हजार लोग बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित बताए गए हैं।
- गजपति: करीब 30 हजार लोग प्रभावित हुए हैं।
- कंधमाल: लगभग 12 हजार लोग प्रभावित हुए हैं।
गंजाम में सैकड़ों गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क टूट गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
सैकड़ों गांव पानी में घिरे, कई जगह सड़कें बह गईं
लगातार बारिश के कारण रुशिकुल्या नदी का जलस्तर बढ़ने से गंजाम जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। सोरड़ा, अस्का, भंजनगर और पुरुषोत्तमपुर जैसे इलाके विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं।
कई स्थानों पर पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और सड़कें बह गई हैं। इसके चलते राहत सामग्री पहुंचाने में भी परेशानी आ रही है।
कंधमाल और गजपति के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन से कई संपर्क मार्ग बाधित हुए हैं। कुछ गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया हैI
23 हजार से ज्यादा लोग राहत शिविरों में पहुंचे
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है।
अधिकारियों के अनुसार, 23 हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। इसके अलावा बाढ़ में फंसे लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए नावों और हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
गंजाम जिले के 21 दुर्गम स्थानों पर हेलिकॉप्टर के जरिए खाद्य पैकेट गिराए गए हैं। भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के चार हेलिकॉप्टर राहत अभियान में लगाए गए हैं।
313 बचाव टीमें तैनात, NDRF और ODRAF संभाल रहे मोर्चा
बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में कुल 313 बचाव टीमें तैनात की गई हैं। इनमें 100 से अधिक टीमें गंजाम और गजपति में काम कर रही हैं।
NDRF, ODRAF और अग्निशमन विभाग की टीमें नावों के जरिए फंसे लोगों तक भोजन और राहत सामग्री पहुंचा रही हैं। खराब मौसम और तेज पानी के बहाव के बावजूद अभियान जारी है।
गंजाम के लिए अतिरिक्त ₹20 करोड़ जारी
मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण के बाद राज्य सरकार ने गंजाम जिले में राहत और बचाव कार्यों के लिए अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
इसके अलावा 30 वरिष्ठ ओडिशा प्रशासनिक सेवा (OAS) अधिकारियों को गंजाम जिला प्रशासन की मदद के लिए तैनात किया गया है। सरकार ने क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने के निर्देश भी दिए हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ओडिशा दौरा रद्द
बाढ़ और चक्रवात से पैदा हुए गंभीर हालात को देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 3 नवंबर से प्रस्तावित अपना तीन दिवसीय ओडिशा दौरा रद्द कर दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से फोन पर बातचीत कर प्रभावित लोगों की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी भी ली।
2 नवंबर को केंद्रीय टीम करेगी नुकसान का आकलन
राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता मांगी है। अधिकारियों के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को केंद्रीय टीम ओडिशा पहुंचकर चक्रवात और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना, भोजन और पेयजल उपलब्ध कराना तथा क्षतिग्रस्त सड़क और बिजली व्यवस्था को बहाल करना है।