AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी थी। यह समय-सीमा खत्म हो चुकी है और अब पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
ओवैसी कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहे हैं। इनमें से 100 सीटें मुस्लिम बहुल इलाकों की होंगी, जहां पार्टी मजबूत और जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवार उतारना चाहती है।
अखिलेश जिनका टिकट काटेंगे, उन्हें लड़वाएंगे ओवैसी
AIMIM की नजर खासतौर पर उन मुस्लिम नेताओं पर है जो चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन सपा से उनका टिकट कट रहा है। ऐसे नेताओं को पार्टी अपने टिकट पर मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
4 अक्टूबर को लखनऊ पहुंचे ओवैसी ने कहा, "हम किसी के लिए दरी नहीं बिछाएंगे। हम कोई वोटबैंक नहीं हैं।"
AIMIM नेताओं का दावा है कि सपा के कई नेता पहले से ही उनके संपर्क में हैं। पार्टी के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सर्वे कर संभावित चेहरों से बात कर रहे हैं।
सपा के मुस्लिम टिकटों में लगातार गिरावट
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 64 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे, जो कुल उम्मीदवारों का करीब 15.88% था। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने सिर्फ 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया, यानी महज 5%।
AIMIM को उम्मीद है कि 2027 के चुनाव में भी सपा कम मुस्लिम प्रत्याशी उतारेगी। इसी आधार पर पार्टी ऐसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं को अपने पाले में लाने की रणनीति बना रही है, जिनका टिकट कटने की संभावना है।
पूर्वांचल से पश्चिम तक रैलियों का कार्यक्रम तय
ओवैसी ने 4 अक्टूबर को श्रावस्ती जिले की भिनगा विधानसभा क्षेत्र के राजापुर रानी में जनसभा की। 11 अक्टूबर को वह आजमगढ़ जाएंगे, जहां सभी 10 विधानसभा सीटों पर सपा का कब्जा है।
18 अक्टूबर को रामपुर में जनसभा होगी। आजम खान के जेल जाने के बाद यहां सपा की पकड़ कमजोर हुई है। 25 अक्टूबर को शामली के कैराना में बड़ी जनसभा होगी, जो सपा सांसद इकरा हसन का लोकसभा क्षेत्र है।
7 नवंबर को मेरठ में बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। इससे पहले ओवैसी बहराइच की मटेरा, बिजनौर की नजीबाबाद, मुरादाबाद ग्रामीण, सहारनपुर और कानपुर में भी जनसभाएं कर चुके हैं।
2022 में सपा को कहां पहुंचाया नुकसान
यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 120 से 143 सीटों पर मुस्लिम वोटर नतीजों में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पश्चिमी यूपी की करीब 73 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30% से ज्यादा है, जिनमें रामपुर, मुरादाबाद, संभल, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और मुजफ्फरनगर शामिल हैं।
2022 में AIMIM ने करीब 97 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीती। पार्टी का वोट शेयर महज 0.49% रहा। फिर भी जिन सीटों पर पार्टी ने फोकस किया, वहां 2 हजार से 8 हजार तक वोट काटे, जहां जीत का मार्जिन इससे कम था।
छोटे दलों से समझौते के आसार
सपा-कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना खत्म होने के बाद ओवैसी छोटे दलों से हाथ मिला सकते हैं। इनमें आजाद समाज पार्टी, पीस पार्टी और राष्ट्रीय उलमा काउंसिल जैसी पार्टियां शामिल हो सकती हैं।
मुस्लिम मतदाताओं को संदेश देते हुए ओवैसी पहले ही कह चुके हैं कि भाजपा को रोकना है तो सम्मान के साथ आएं, वरना पार्टी अपनी लड़ाई खुद लड़ेगी।