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पंचायत सचिव की आईडी में सेंध, दो दिन में 498 जन्म प्रमाणपत्र जारी; यूपी से 17 राज्यों तक पहुंचा मामला

अमरोहा की तोफापुर ग्राम पंचायत का मामला; बिना आवेदन जारी हुए प्रमाणपत्रों से प्रशासन में हड़कंप, पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज की FIR

पंचायत सचिव की आईडी में सेंध, दो दिन में 498 जन्म प्रमाणपत्र जारी; यूपी से 17 राज्यों तक पहुंचा मामला
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

दो दिन में 498 प्रमाणपत्र, खुला बड़ा साइबर खेल

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। जोया ब्लॉक की तोफापुर ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव की जन्म-मृत्यु पंजीकरण संबंधी आईडी का कथित तौर पर दुरुपयोग कर महज दो दिनों में 498 जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन प्रमाणपत्रों के लिए संबंधित ग्राम पंचायत में कोई आवेदन ही नहीं किया गया था। प्रमाणपत्रों में उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कई अन्य राज्यों के लोगों के नाम और विवरण दर्ज पाए गए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक में हलचल तेज हो गई।

6 और 7 अक्टूबर को हुआ पूरा खेल

मामला जोया ब्लॉक की तोफापुर ग्राम पंचायत का है, जहां अमरजीत सिंह पंचायत सचिव के पद पर तैनात हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने वाली आईडी कुछ समय से सक्रिय नहीं थी।

आईडी दोबारा सक्रिय होने के बाद जब रिकॉर्ड की जांच की गई तो सामने आया कि 6 और 7 अक्टूबर 2026 को 498 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। सचिव के अनुसार, इन प्रमाणपत्रों को जारी करने के लिए ग्राम पंचायत में कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था।

यानी सरकारी रिकॉर्ड में प्रमाणपत्र जारी होते रहे, लेकिन संबंधित पंचायत स्तर पर उनके लिए आवेदन की कोई प्रक्रिया ही नहीं हुई।

270 प्रमाणपत्र सिर्फ यूपी के लोगों के नाम पर

जांच में सामने आया कि 498 प्रमाणपत्रों में से 270 उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लोगों के नाम पर जारी किए गए थे।

बाकी प्रमाणपत्रों में बिहार, झारखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तराखंड, सिक्किम और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।

यही वजह है कि मामला केवल स्थानीय स्तर की गड़बड़ी न रहकर अंतरराज्यीय साइबर फर्जीवाड़े की आशंका तक पहुंच गया है। हालांकि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और प्रमाणपत्र किस उद्देश्य से बनाए गए, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

आईडी सक्रिय होते ही सामने आया फर्जीवाड़ा

पंचायत सचिव की आईडी करीब एक सप्ताह तक सक्रिय नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग से संपर्क के बाद 12 अक्टूबर को आईडी सक्रिय कराई गई।

इसके बाद रिकॉर्ड की जांच में 6 और 7 अक्टूबर को जारी हुए प्रमाणपत्रों का पता चला। अधिकारियों को जानकारी दी गई और मामला तत्काल उच्च स्तर तक पहुंचाया गया।

डीएम ने मामले को गंभीर मानते हुए सीडीओ स्तर पर जांच के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित आईडी को ब्लॉक करने और संदिग्ध प्रमाणपत्रों को निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।

पुलिस ने दर्ज की FIR, साइबर एंगल से जांच

मामले में शुरुआती स्तर पर रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर कुछ प्रशासनिक असमंजस की स्थिति भी सामने आई थी। बाद में डिडौली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ IT Act के तहत FIR दर्ज की।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आईडी तक कथित तौर पर पहुंच कैसे बनाई गई, प्रमाणपत्र किस सिस्टम या लॉगिन से जारी हुए और इसके पीछे किसी संगठित गिरोह की भूमिका तो नहीं थी।

जांच में डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन गतिविधियों और प्रमाणपत्र जारी होने से जुड़े तकनीकी विवरण महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

सिर्फ अमरोहा तक सीमित नहीं दिख रहा खतरा

498 प्रमाणपत्रों का मामला सामने आने के बाद अमरोहा में दूसरी पंचायत सचिवों की आईडी को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई।

रिपोर्टों के मुताबिक, हसनपुर और मंडी धनौरा ब्लॉक के दो पंचायत सचिवों के मोबाइल और ईमेल पर OTP पहुंचे। हालांकि समय रहते अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के कारण उनकी आईडी से प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सके।

इसके बाद प्रशासन ने जिले की अन्य ग्राम पंचायतों की जन्म-मृत्यु पंजीकरण आईडी की सुरक्षा को लेकर भी कार्रवाई शुरू की। कुछ रिपोर्टों में बड़ी संख्या में आईडी निष्क्रिय किए जाने की जानकारी सामने आई है।

498 प्रमाणपत्रों को निरस्त करने की तैयारी

फर्जी या अनधिकृत तरीके से जारी हुए प्रमाणपत्रों को लेकर प्रशासन ने अब उन्हें रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

डीपीआरओ की ओर से संबंधित प्रमाणपत्रों की सूची जिला सूचना विज्ञान अधिकारी को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, ताकि रिकॉर्ड से इन प्रमाणपत्रों को हटाने की कार्रवाई की जा सके।

प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ प्रमाणपत्रों को रद्द करने की नहीं है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि इनमें दर्ज लोगों के वास्तविक विवरण क्या हैं और इन प्रमाणपत्रों का आगे कहीं इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

जन्म प्रमाणपत्रों के गलत इस्तेमाल की आशंका

जन्म प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति की पहचान और उम्र से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों में शामिल होता है। इसलिए बड़ी संख्या में संदिग्ध प्रमाणपत्र जारी होना प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

यदि कोई फर्जी प्रमाणपत्र आगे आधार, पासपोर्ट, स्कूल रिकॉर्ड, सरकारी योजनाओं या अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करे, तो इसका असर व्यापक हो सकता है।

हालांकि मौजूदा मामले में 498 प्रमाणपत्रों का वास्तव में किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाना था, इसकी पुष्टि अभी जांच का विषय है। इसलिए किसी संभावित दुरुपयोग को फिलहाल संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

क्या किसी बड़े गिरोह का हाथ है?

जांच के दौरान यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर एक स्थानीय ग्राम पंचायत की आईडी से अलग-अलग राज्यों के लोगों के लिए इतनी बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गए।

कुछ रिपोर्टों में सरकारी आईडी और पासवर्ड के कथित साइबर नेटवर्क की आशंका जताई गई है, लेकिन इस नेटवर्क की पुष्टि अभी जांच एजेंसियों को करनी है।

साथ ही, पासवर्ड, OTP, ईमेल या अन्य डिजिटल माध्यमों से आईडी तक पहुंच बनाई गई या सिस्टम में किसी अन्य तरह की तकनीकी खामी का फायदा उठाया गया—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

अमरोहा में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़ी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 2022 में भी जिले में पंचायत और स्वास्थ्य विभाग की आईडी का दुरुपयोग कर प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया था।

इस वजह से मौजूदा घटना ने अधिकारियों की चिंता और बढ़ा दी है। अब जांच सिर्फ 498 प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि जिले की पूरी डिजिटल जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था की सुरक्षा भी जांच के दायरे में आ गई है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

मौजूदा मामले के बाद कई पंचायतों की आईडी को निष्क्रिय करने और सुरक्षा जांच करने की कार्रवाई शुरू हुई है। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 498 प्रमाणपत्र किसने जारी किए, उनके लिए डेटा कहां से आया और इस पूरे मामले के पीछे कौन लोग हैं। पुलिस और प्रशासन की जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।