प्रयागराज की अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत आठ लोगों के खिलाफ दाखिल आपराधिक शिकायत की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। अपर जिला एवं प्रभारी सत्र न्यायाधीश जयेंद्र कुमार ने यह फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का अनुकरणीय हर्जाना भी लगाया।
अदालत ने कहा कि शिकायत में कोई ठोस आपराधिक आधार नहीं मिला। इसी वजह से न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए हर्जाना तय किया गया।
याचिकाकर्ता को 30 दिन की मोहलत
कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि यह राशि 30 दिन के भीतर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रयागराज में जमा करनी होगी। यह फैसला राज्य की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मनोज कुमार पांडे और याचिकाकर्ता के वकील राकेश नाथ पांडेय की दलीलें सुनने के बाद आया।
पहले भी खारिज हो चुकी थी शिकायत
यह मामला अधिवक्ता राकेश नाथ पांडेय की आपराधिक शिकायत से जुड़ा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार को प्रतिवादी बनाया गया था।
एसीजेएम कोर्ट एमपी/एमएलए ने 29 जून 2026 को ही इस शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके बाद पांडेय ने इस आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी, जिसे अब भी नामंजूर कर दिया गया।
राजनीतिक असहमति पर अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत की सामग्री से किसी विशिष्ट अपराध का होना साबित नहीं होता। संवैधानिक शपथ के उल्लंघन का सिर्फ आरोप लगाने से कोई दंडनीय अपराध स्वतः नहीं बनता।
अदालत ने आगे कहा कि राजनीतिक या संवैधानिक असहमति के आधार पर आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि निराधार कार्यवाही को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग में बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती, और ऐसे मामलों में वास्तविक लागत वसूली जा सकती है।
50 हजार की कॉस्ट पर स्पष्टीकरण
अदालत ने आदेश के अंत में यह स्पष्ट किया कि 50 हजार रुपये की कॉस्ट याचिकाकर्ता के राजनीतिक, धार्मिक या संवैधानिक विचारों के कारण नहीं लगाई गई। यह हर्जाना इसलिए लगाया गया क्योंकि आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल ऐसे तरीके से किया गया, जिसमें किसी कानूनी रूप से टिकाऊ अपराध के जरूरी तत्व सामने नहीं आए।
बावजूद इसके, वही कार्यवाही पुनरीक्षण में आगे बढ़ाई गई। अदालत ने इस राशि को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में कानूनी सहायता सेवाओं के लिए जमा करने का निर्देश दिया है।