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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले में टक्कर, नेता सुरक्षित; अब SIT खंगालेगी हादसे की पूरी वजह

सुल्तानपुर के हलियापुर के पास काफिले के पीछे चल रही चार निजी गाड़ियां आपस में भिड़ीं; UP DGP के निर्देश पर तीन सदस्यीय SIT गठित, सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की भी होगी जांच

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले में टक्कर, नेता सुरक्षित; अब SIT खंगालेगी हादसे की पूरी वजह
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

सुल्तानपुर जाते समय काफिले में हुआ हादसा

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार, 26 अक्टूबर को सुल्तानपुर जा रहे थे, तभी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनके काफिले के पीछे चल रही कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसा सुल्तानपुर जिले के हलियापुर थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के करीब 89.5 किलोमीटर के पास हुआ।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि राहुल गांधी की अपनी गाड़ी इस टक्कर में शामिल नहीं थी और वे पूरी तरह सुरक्षित रहे। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद उनका काफिला रुका, स्थिति संभाली गई और फिर सुल्तानपुर की ओर रवाना हो गया।

यह हादसा उस समय हुआ जब राहुल गांधी लखनऊ से सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत में चल रहे 2018 के मानहानि मामले की सुनवाई के लिए जा रहे थे।

अचानक ब्रेक लगाने से हुआ हादसा?

प्रारंभिक पुलिस जानकारी के मुताबिक काफिले के आगे चल रही एक निजी गाड़ी के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया। इसके बाद पीछे चल रही गाड़ियां पर्याप्त दूरी न बना पाने के कारण एक-दूसरे से टकरा गईं। घटना करीब सुबह 10:15 बजे की बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार हादसे में शामिल कुछ वाहन ऐसे थे जो रास्ते में काफिले के साथ जुड़े थे और उनमें अमेठी क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ता भी सवार थे।

हालांकि शुरुआती जानकारी में अलग-अलग रिपोर्टों में वाहनों की संख्या को लेकर अंतर दिखाई दिया है—कुछ रिपोर्टों में चार निजी वाहन, जबकि कुछ में कुल पांच वाहन शामिल होने की बात कही गई है। इसलिए अंतिम संख्या और नुकसान की आधिकारिक तस्वीर SIT की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।

राहुल गांधी सुरक्षित, काफिला आगे बढ़ा

हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर जानकारी सामने आई। पुलिस और कांग्रेस की ओर से पुष्टि की गई कि राहुल गांधी सुरक्षित हैं और उनकी कार को कोई नुकसान नहीं हुआ।

PTI के मुताबिक कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने भी कहा कि राहुल गांधी पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी गाड़ी हादसे में शामिल नहीं थी। कुछ देर के व्यवधान के बाद काफिला सुल्तानपुर की ओर आगे बढ़ गया।

राहुल गांधी करीब 11:15 बजे सुल्तानपुर कोर्ट पहुंच गए, जहां उनके खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में कार्यवाही होनी थी।

अब सरकार ने क्यों गठित की SIT?

हादसे के बाद मामला सिर्फ एक सामान्य सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण के निर्देश पर UP Police ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) गठित की है।

SIT यह पता लगाएगी कि हादसा आखिर किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसमें किसी तरह की लापरवाही, सुरक्षा संबंधी कमी, एस्कॉर्ट व्यवस्था में चूक या ट्रैफिक मैनेजमेंट की समस्या थी।

पुलिस मुख्यालय ने टीम को दुर्घटना के सभी पहलुओं की व्यापक जांच कर जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक सुझाव देने की जिम्मेदारी भी SIT को दी गई है।

तीन सदस्यीय टीम में कौन-कौन?

UP Police द्वारा गठित SIT की अध्यक्षता लखनऊ रेंज के Inspector General of Police Kiran S करेंगी।

टीम में उनके साथ:

Additional Superintendent of Police, Sultanpur — Brij Narayan Singh

Deputy Superintendent of Police (Traffic), Sultanpur — Ram Krishna Chaturvedi

शामिल हैं।

इससे साफ है कि जांच केवल दुर्घटना के तकनीकी कारणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन के पहलू को भी देखा जाएगा।

हादसे की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

SIT की जांच में कई अहम सवाल सामने होंगे।

पहला सवाल यह होगा कि सबसे आगे चल रही गाड़ी ने अचानक ब्रेक क्यों लगाया।

दूसरा, क्या काफिले में शामिल वाहनों के बीच पर्याप्त सुरक्षित दूरी रखी गई थी?

तीसरा, क्या सभी वाहन निर्धारित एस्कॉर्ट और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत चल रहे थे?

चौथा, क्या एक्सप्रेसवे पर उस समय ट्रैफिक की स्थिति या किसी अन्य वाहन की वजह से अचानक ब्रेक लगाने की जरूरत पड़ी?

इसके अलावा CCTV/एक्सप्रेसवे कैमरा फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित वाहनों की स्थिति की जांच से भी दुर्घटना का क्रम स्पष्ट किया जा सकता है।

अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर जानबूझकर हमला या साजिश का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए घटना को फिलहाल दुर्घटना के रूप में ही देखा जा रहा है और SIT का काम तथ्यों की पुष्टि करना है।

मानहानि मामले की सुनवाई से पहले हुआ हादसा

इस दुर्घटना की राजनीतिक चर्चा इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि राहुल गांधी सुल्तानपुर एक महत्वपूर्ण अदालत की कार्यवाही के लिए जा रहे थे।

यह मामला 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बारे में राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा था। स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को शिकायत दाखिल की थी।

26 अक्टूबर को अदालत में इस मामले की कार्यवाही के लिए राहुल गांधी की मौजूदगी थी। इसी यात्रा के दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर काफिले के वाहनों की टक्कर हुई।

सुरक्षा व्यवस्था पहले से थी कड़ी

राहुल गांधी के सुल्तानपुर पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कोर्ट परिसर के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

इसी कारण हादसे के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि VIP movement के दौरान escort vehicles, private vehicles और traffic coordination किस तरह किया गया था।

हालांकि अभी तक पुलिस ने यह नहीं कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था में निश्चित तौर पर कोई चूक हुई थी। यही कारण है कि SIT को संभावित security lapse की भी जांच करने को कहा गया है।

क्या कोई गंभीर रूप से घायल हुआ?

शुरुआती PTI रिपोर्ट के अनुसार घटना गंभीर नहीं थी और किसी बड़ी चोट की सूचना नहीं थी। हालांकि कुछ अन्य शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियों के घायल होने की बात कही गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में घायलों की संख्या और चोटों की गंभीरता को लेकर एकरूप जानकारी नहीं है।

इसलिए फिलहाल यह कहना अधिक उचित है कि कोई बड़ी जनहानि या गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि मामूली चोटों संबंधी रिपोर्टों की स्थिति आधिकारिक जांच से स्पष्ट हो सकती है।

हादसे के बाद राजनीतिक चर्चा क्यों तेज हुई?

राहुल गांधी देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं में से एक हैं और उनकी यात्रा के दौरान हुआ कोई भी सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व रखता है।

खास तौर पर जब घटना काफिले से जुड़ी हो, तो सिर्फ सड़क दुर्घटना की वजह तलाशना पर्याप्त नहीं होता। यह देखना भी जरूरी होता है कि VIP movement के दौरान सभी सुरक्षा और ट्रैफिक protocols का पालन हुआ या नहीं।

इसी वजह से सरकार द्वारा SIT बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि इस घटना को लेकर किसी भी तरह की साजिश या जानबूझकर हमला जैसी धारणा बनाना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में ऐसी कोई पुष्टि नहीं है।

अब आगे क्या?

अब SIT दुर्घटना की पूरी timeline तैयार करेगी। टीम यह जांचेगी कि अचानक ब्रेक क्यों लगाया गया, पीछे चल रही गाड़ियां कितनी दूरी पर थीं, एस्कॉर्ट व्यवस्था कैसी थी और क्या traffic management में कोई कमी रही।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट दी जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा संबंधी चूक सामने आती है, तो उसके आधार पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

फिलहाल सबसे अहम तथ्य यही है कि राहुल गांधी सुरक्षित हैं, उनका वाहन दुर्घटना में शामिल नहीं था और काफिला हादसे के बाद सुल्तानपुर पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक वजह SIT की रिपोर्ट से सामने आएगी।