गुजरात ATS की कार्रवाई, 31 अक्टूबर को लिया हिरासत में
अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के मामलों में लंबे समय से वांछित सलीम इस्माइल डोला को गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने अपने कब्जे में लिया है। यह कार्रवाई वडोदरा जिले में वर्ष 2022 में पकड़ी गई ₹438.64 करोड़ की मेफेड्रोन (MD) फैक्ट्री से जुड़े मामले में की गई है।
गुजरात ATS के सहायक पुलिस आयुक्त एस.एल. चौधरी के अनुसार, डोला को 31 अक्टूबर 2026 को कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिया गया। एजेंसी का आरोप है कि वह विदेश में रहकर ड्रग नेटवर्क संचालित कर रहा था और वडोदरा की फैक्ट्री में तैयार नशीले पदार्थों की आपूर्ति और खरीद-बिक्री में उसकी भूमिका थी।
वडोदरा की फैक्ट्री से मिला था 87.728 किलो MD ड्रग्स
इस पूरे मामले की शुरुआत 1 दिसंबर 2022 को हुई थी। उस दिन गुजरात ATS ने वडोदरा जिले के सिंधरोत गांव के पास एक कथित अवैध ड्रग निर्माण इकाई पर छापा मारा था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 87.728 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत ₹438.64 करोड़ बताई गई। इस मामले में शुरुआती कार्रवाई के दौरान 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान एजेंसी को सलीम डोला का नाम सामने आया। ATS के मुताबिक, उसने कथित तौर पर ड्रग बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की व्यवस्था की थी। इसके बाद तैयार मेफेड्रोन की खरीद-बिक्री और वितरण में भी उसकी भूमिका बताई गई।
तुर्किये से भारत लाया गया था सलीम डोला
सलीम डोला लंबे समय से भारतीय एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर था। उसके खिलाफ भारत के अनुरोध पर मार्च 2024 में इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से उसे तुर्किये में ट्रेस किया। इसके बाद 28 अप्रैल 2026 को उसे भारत वापस लाया गया। NCB ने इसे अपनी कार्रवाई ऑपरेशन ग्लोबल-हंट का हिस्सा बताया था।
NCB की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, डोला पर भारत में कई नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जरूरत थी। एजेंसी ने उसके नेटवर्क को कई देशों तक फैला हुआ बताया था।
इकबाल मिर्ची और दाऊद इब्राहिम से कथित संपर्कों की पड़ताल
सलीम डोला के पुराने अंडरवर्ल्ड संपर्क भी जांच का अहम हिस्सा हैं। गुजरात ATS के अनुसार, डोला का नाम 1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर इकबाल मिर्ची से जुड़ी गतिविधियों में सामने आया था। एजेंसी का दावा है कि उस दौर में वह कथित तौर पर मादक पदार्थों की ढुलाई करता था और बाद में उसने अपने सहयोगियों के साथ अलग नेटवर्क विकसित किया।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में डोला को दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी भी बताया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति से कथित संपर्क का उल्लेख अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। इन पुराने संपर्कों और नेटवर्क की वास्तविक भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
विदेशों में ड्रग भेजने के कथित तरीके की जांच
ATS के मुताबिक, डोला के कथित नेटवर्क पर आरोप है कि वह कानूनी रूप से निर्यात किए जाने वाले सामान से भरे कंटेनरों में नशीले पदार्थ छिपाकर विदेश भेजता था। इसके लिए विदेशी देशों में डमी कंपनियों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- ड्रग निर्माण के लिए कच्चे रसायन कहां से आते थे?
- तैयार नशीले पदार्थों को किन लोगों तक पहुंचाया जाता था?
- भारत और विदेश में नेटवर्क के दूसरे सदस्य कौन हैं?
- कथित तस्करी से प्राप्त रकम किन खातों और संपत्तियों में लगाई गई?
- विदेश में रहते हुए डोला को किसने ठिकाना और लॉजिस्टिक मदद दी?
ATS उसकी संपत्तियों और कथित अवैध कमाई की भी जांच करेगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से भी उसके कथित ड्रग नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की रिपोर्ट है।
अब पूछताछ से खुल सकते हैं नेटवर्क के नए राज
सलीम डोला की गिरफ्तारी को 2022 के वडोदरा ड्रग फैक्ट्री मामले की जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। ATS का ध्यान अब कथित सप्लाई चेन, रासायनिक पदार्थों के स्रोत, विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन पर है।
पूछताछ में यदि नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके ठिकानों की जानकारी मिलती है, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या तलाशी अभियान हो सकते हैं। हालांकि, अभी जांच जारी है और डोला के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।